नागौर पान मैथी की खेती से किसानों की आमदनी बढ़ी, देश विदेश में मांग.

Last Updated:December 17, 2025, 15:01 IST
नागौर में पान मैथी की खेती किसानों के लिए खुशखबरी बनकर आई है, अपनी अनोखी सुगंध, स्वाद और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध यह फसल न केवल व्यंजनों में उपयोग होती है, बल्कि किसानों की आमदनी बढ़ाने में भी सहायक साबित हो रही है. जिले के मेड़ता, खींवसर और मूण्डवा क्षेत्र के लगभग चार हजार किसान इस फसल से जुड़े हैं. औसतन 5-6 हजार हेक्टेयर में उगाई जाने वाली पान मैथी का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 25-30 क्विंटल होता है और इसका कारोबार हर साल 200 करोड़ रुपए से अधिक का होता है.
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पान मैथी की खेती
नागौर. किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने वाली पान मैथी इन दिनों लहलहा रही है. जिले का नाम विश्व पटल पर चमकाने वाली पान मैथी की फसल इन दिनों परवान पर है. यहां विशेष किस्म की मैथी है जो अपने अनूठे स्वाद, तीखी सुगंध और औषधीय गुणों के लिए प्रसिद्ध है. यह एक ऐसी फसल हैं जिसने छोटे किसानों के आमदनी को बढ़ाने में मदद की है. इस फसल का उपयोग न केवल व्यंजनों में किया जाता है, बल्कि यह सेहत के लिए भी वरदान है. जलवायु ही पान मैथी की खेती के लिए अनुकूल मानी गई है.
पिछले करीब पांच साल से पान मैथी की खेती को लेकर किसानों का रुझान भी बढ़ता जा रहा है. पहले यहां पान मैथी की नाममात्र ही खेती होती थी, लेकिन अब किसानों का रुझान बढ़ने से बुवाई का रकबा बढ़ता जा रहा है. जानकारी के अनुसार जिले मे मेड़ता, खींवसर , मूण्डवा, नागौर उपखंड क्षेत्र के गांवों में करीब चार हजार से अधिक किसान पान मैथी के उत्पादन से जुड़े हुए हैं. जिले में औसतन 5 से 6 हजार हैक्टेयर क्षेत्र मे पान मैथी की पैदावार होती है.
पान मैथी का उत्पादन औसतन प्रति हैक्टेयर 25 से 30 क्विंटल
पान मैथी का उत्पादन औसतन प्रति हैक्टेयर 25 से 30 क्विंटल होता है. वही नागौरी मैथी देश के कई राज्यों सहित विदेशों में भी निर्यात की जाती है. जिले में हर साल पान मैथी का करीब 200 करोड़ से ज्यादा का कारोबार होता है. मई 2017 मे नोटिफाई कमोडिटी में शामिल किया गया था. वहीं 2025 में केन्द्र सरकार ने मशाला अनुसूची में में क्रम संख्या 53 के रूप में “पान मेथी” को शामिल किया गया था. किसानों का कहना है कि जिले में छोटे बड़े करीब दौ सौ से ज्यादा व्यापारी आते है.
जो किसानों की फसल अपने मनमाने दाम पर खरीदते है और खुद मोटा मुनाफा वसूलते हैं. किसान नागौरी पान मैथी का उत्पादन कर 100 से 150 प्रति किलो के हिसाब से बेच रहे हैं. जबकि देश-दुनिया के मार्केट में यही नागौरी पान मेथी कंपनियों के लोग 700 से 1500 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बेचकर 90 फीसदी मुनाफा कमा रहे हैं. अपनी गुणवत्ता से पहचान रखने वाली नागौरी पान मैथी का 90 फीसदी उत्पादन अकेले नागौर में होता है.
नागौर की पहचान बन चुकी पान मेथी
किसान ओमप्रकाश चौधरी ने बताया कि इस बार नागौरी पान मेथी की बुवाई पिछले वर्षों की तुलना में काफी अधिक हुई है. उन्होंने कहा कि रूण और इसके आसपास के गांवों में किसानों ने इस फसल को बड़े स्तर पर अपनाया है, जिससे उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की उम्मीद है. बेड़ा ने बताया कि अगर मौसम अनुकूल रहा, तो इस बार पान मेथी की खुशबू और गुणवत्ता दोनों पहले से बेहतर रहेंगी.
उन्होंने किसानों को सलाह दी कि वे कटिंग के बाद खेत की नमी बनाए रखें और समय-समय पर हल्की सिंचाई करते रहें. उन्होंने कहा कि नागौरी पान मेथी की बढ़ती लोकप्रियता से किसानों का मनोबल बढ़ा है. बेहतर दाम और लगातार बढ़ती मांग के कारण यह फसल अब नागौर की पहचान बनती जा रही है.
About the AuthorMonali Paul
Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें
Location :
Nagaur,Rajasthan
First Published :
December 17, 2025, 15:01 IST
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नागौर पान मैथी की खेती से किसानों की आमदनी बढ़ी, देश विदेश में मांग



