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अन्नदाता खुद बीमार! खेतों में काम करते-करते किसानों की किडनी पर मंडरा रहा खतरा – Madhya Pradesh News

Health Tips : भारत के किसान देश का पेट भरते हैं. लेकिन एक चौंकाने वाली सच्चाई सामने आ रही है. देश के विभिन्न हिस्सों में खेती-किसानी से जुड़े लोगों में किडनी की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं. यह समस्या अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले रही है. हाल ही में हुए शोध ने इसकी मुख्य वजह सामने लाई है. इस विषय पर विस्तृत जानकरी दे रहे हैं रीवा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के अधीक्षक डाॅक्टर अक्षय श्रीवास्तव.

यह समस्या कितनी गंभीर

ग्रामीण इलाकों में रहने वाले किसानों और खेतिहर मजदूरों में क्रोनिक किडनी डिजीज (सीकेडी) के मामले खतरनाक गति से बढ़े हैं. विशेष रूप से गर्म इलाकों में यह समस्या अधिक देखी जा रही है. इसके पीछे कोई एक कारण नहीं बल्कि कई कारण जिम्मेदार हैं.

खतरनाक रसायन और पेस्टिसाइड्सकिसान फसलों को कीटों से बचाने के लिए विभिन्न प्रकार के रसायनों का उपयोग करते हैं. ये रसायन सीधे त्वचा के संपर्क में आते हैं. साथ ही, ये जहरीले पदार्थ पानी और मिट्टी में मिलकर भूजल को दूषित कर देते हैं. फलस्वरूप, यही दूषित पानी पीने से किडनी धीरे-धीरे खराब होने लगती है.

पानी की कमी (डिहाइड्रेशन)किसान घंटों धूप में काम करते हैं. इस दौरान उन्हें पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पाता. नतीजतन, शरीर में पानी की कमी हो जाती है. लगातार डिहाइड्रेशन की स्थिति किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालती है. अंततः इससे किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होती है.

भारी धातुओं का विषैला प्रभावकुछ इलाकों की मिट्टी और पानी में कैडमियम और लेड जैसी भारी धातुएं प्राकृतिक रूप से मौजूद होती हैं. लंबे समय तक इन धातुओं के संपर्क में रहने से किडनी की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है. इसके अलावा, कुछ रासायनिक उर्वरक भी मिट्टी में इन धातुओं की मात्रा बढ़ा देते हैं.

दर्द निवारक दवाओं का अत्यधिक उपयोग मजदूरी करने वाले किसान अक्सर शरीर के दर्द को ignore करते हैं. वे बिना डॉक्टर की सलाह के दर्द निवारक दवाएं लेते हैं. ये दवाएं सीधे किडनी पर toxic प्रभाव डालती हैं. समय के साथ यह आदत किडनी फेलियर का कारण बन सकती है.

किडनी खराब होने के शुरुआती लक्षण क्या हैं-इन लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है.

थकान और कमजोरी लगातार बने रहना.

पैरों और आंखों में सूजन आना.

भूख कम लगना या जी मिचलाना.

पेशाब की मात्रा में कमी आना.

त्वचा में रूखापन और खुजली होना.

कैसे बचें इस गंभीर समस्या से-किसान अपनी मेहनत से अनाज का भंडार भरते हैं. उनका स्वस्थ रहना हमारे लिए बहुत जरूरी है. निम्नलिखित उपाय अपनाकर वे सुरक्षित रह सकते हैं.

सुरक्षात्मक उपकरणों का उपयोग जरूर करेंखेत में रसायनों का छिड़काव करते समय हमेशा दस्ताने, मास्क और पूरे बाजू के कपड़े पहनें. इससे त्वचा का सीधा संपर्क रसायनों से नहीं होगा.

भरपूर मात्रा में पानी पिएंधूप में काम करते समय अपने साथ पानी की बोतल जरूर रखें. नियमित अंतराल पर पानी पीते रहें. इससे डिहाइड्रेशन और किडनी पर दबाव दोनों कम होंगे.

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