Rajasthan

कम मेहनत में ज्यादा आमदनी वाली फसल, सीकर के किसान कर रहे तगड़ी कमाई, जानिए कैसे करें मौसंबी की खेती

Last Updated:November 10, 2025, 12:48 IST

Sikar Sweet Lime Cultivation: राजस्थान के सीकर जिले में किसान अब पारंपरिक फसलों की जगह मौसंबी की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. बेरी गांव की उन्नत किसान संतोष खेदड़ ने जैविक तरीकों से मौसंबी की खेती कर लाखों की कमाई की है. कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली यह फसल अब किसानों के लिए मुनाफे का बेहतर विकल्प बन रही है.

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सीकर. राजस्थान में सैकड़ों किसान परंपरागत फसलों के साथ-साथ फलदार पौधों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं, इसका कारण अच्छा मुनाफा है. फलदार फसलों की खेती में कम मेहनत में अधिक कमाई है और एक बार पौधे लगाने के बाद कई साल तक उत्पादन मिलता है. इन्हीं फसलों में से एक है मौसंबी की खेती, जो धीरे-धीरे किसानों के लिए मुनाफे का सौदा बनती जा रही है. इसके जूस, औषधीय और पोषण संबंधी मांग के चलते मार्केट में इसकी हमेशा डिमांड रहती है. मौसंबी की खेती की खास बात ये है कि इसकी फसल कम पानी में भी आसानी से उत्पादन दे देती है. ऐसे में यह कम पानी वाले क्षेत्र में किसी वरदान से कम नहीं है.

सीकर जिले में दर्जनों किसान मौसंबी की खेती कर रहे हैं. बेरी गांव की उन्नत किसान संतोष खेदड़ मौसम की खेती कर लाखों रुपए की कमाई कर रही है. उन्होंने बताया कि यह फसल सर्दी और गर्मी दिनों के लिए सही है. इसकी खेती के लिए 25 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान और दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है. उन्होंने बताया कि मौसंबी की बढ़ती मांग के कारण इसकी खेती लगातार बढ़ती जा रही है. राजस्थान की जलवायु के हिसाब से मौसंबी की खेती एक दम परफेक्ट है. किसानों को इसकी खेती में कम मेहनत करनी पड़ती है और अधिक मुनाफा भी मिलता है.

कैसे करें मौसंबी की खेती

उन्नत किसान संतोष खेदड़ ने बताया कि मौसंबी की अच्छी पैदावार के लिए गोबर की खाद के साथ-साथ नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की उचित मात्रा देना जरूरी होता है. पौधों में कीट और फफूंद रोगों से बचाव के लिए नीम आधारित जैविक कीटनाशक या ट्राइकोडर्मा जैसे जैव नियंत्रण उपाय कारगर माने जाते हैं. मौसंबी विटामिन C का बेहतरीन स्रोत है. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ पाचन को भी दुरूस्त रखता है. गर्मियों में मौसंबी का रस सबसे ज्यादा बिकता है, जिसके कारण इसका जूस उद्योगों में भी उपयोग होता है.

अधिक पैदावार के लिए जैविक तरीके अपनाए

किसान संतोष खेदड़ के अनुसार, मौसमी की फसल में अधिक पैदावार प्राप्त करने के लिए कीटनाशकों का उपयोग नहीं करना चाहिए. इसके मुकाबले जैविक तरीके अपनाने चाहिए. उन्होंने बताया कि जैविक कीटनाशकों और खाद से पौधों में पोषण अधिक मिलता है और वृद्धि भी अधिक होती है. इससे इसकी एक डाली से करीब 10 किलो से अधिक मौसमी प्राप्त की जा सकती है. इसके अलावा अगर इन फलों को अधिक समय तक तोड़ते नहीं हैं तो भी ये खराब होकर अपने आप टूटने लगते हैं. जैविक तरीके से की गई मौसमी की खेती में मुनाफा डबल हो जाता है.

deep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट… और पढ़ें

Location :

Sikar,Rajasthan

First Published :

November 10, 2025, 12:48 IST

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कम मेहनत में ज्यादा आमदनी वाली है यह फसल, जानिए कैसे करें मौसंबी की खेती

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