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किसान इस विदेशी फल की करें खेती, 6 महीने में चमक जाएगी किस्मत, प्रति बीघा लाखों में होगी कमाई

Last Updated:November 20, 2025, 16:05 IST

रसभरी खेती टिप्स: करौली के किसान दयाराम मीणा और खेमचंद रसभरी की खेती करके अच्छी कमाई कर रहे हैं. रसभरी की खेती के लिए उच्च गुणवत्ता वाले बीज, हल्की दोमट मिट्टी, कम पानी और नियमित निराई-गुड़ाई जरूरी है.पौधे लगाने के 5-6 महीने बाद फल लगना शुरू हो जाता है और फसल 3 महीने तक चलती है. किसानों के अनुसार, सही देखभाल और अच्छी क्वालिटी बीज से सालाना ₹2 लाख तक कमाई संभव है.करौली

किसानों के बीच विदेशी फल रसभरी की खेती तेजी से लोकप्रिय हो रही है. करौली के सलेमपुर गांव के किसान दयाराम मीणा और उनके साथी खेमचंद ने इसे अपनाकर शानदार कमाई की मिसाल पेश की है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसान रसभरी की खेती कैसे कर सकते हैं और यह कितनी फायदेमंद है?

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एक्सपर्ट्स के अनुसार, रसभरी की खेती की सफलता 70 प्रतिशत बीज की क्वालिटी पर निर्भर करती है. इसकी खेती के लिए करौली के किसान हर साल दिल्ली और मुंबई से हाई क्वालिटी का बीज मंगाते हैं. इस फल की खेती करने वाले किसान बताते हैं कि इसके कमजोर बीच से पौधा छोटा होता है और अच्छे और क्वालिटी के बीज से फल भारी और उत्पादन अधिक होता है.

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रसभरी हल्की दोमट और अच्छी जल निकासी वाली मिट्टी में बेहतर उगती है. इसलिए इसकी खेती से पहले खेत को अच्छी तरह जुताई कर समतल करें और पौधारोपण के लिए 2-2.5 फीट की दूरी पर गड्ढे बनाए जाते हैं. ऐसे करने से ग्रोथ रेट बढ़ जाता है.

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रसभरी का पौधा जुलाई में लगाना सबसे लाभकारी है. यह पौधा ठंडे मौसम में तेजी से बढ़ता है, इसलिए मानसून का समय बिल्कुल उपयुक्त है. रसभरी की खासियत है कि इसे बहुत ज्यादा पानी नहीं चाहिए. पूरे सीजन में केवल 3 बार पानी देना पर्याप्त है. कम पानी में भी यह पौधा अच्छी तरह बढ़ जाता है और लागत भी कम रहती है.

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रसभरी के पौधे के आस-पास खरपतवार तेजी से उगता है. इसलिए 3-4 बार निराई-गुड़ाई अनिवार्य है. इससे पौधा मजबूत होता है और फलन अच्छे से होता है. साथ ही समय-समय पर देखभाल करना भी बेहद जरूरी है. खरपतवार नियंत्रण के लिए हमेशा जैविक तरीके का ही प्रयोग करें.

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रसभरी की खेती में पौधे लगाने के लगभग 5-6 महीने बाद फल लगना शुरू हो जाता है. रसभरी की फसल लगातार 3 महीने चलती है. पौधों से अच्छी क्वालिटी का पीला फल मिलता है जो बाजार में महंगे दाम पर बिकता है. करौली में इस फल की खेती करने वाले किसान दयाराम मीणा बताते हैं कि रसभरी की एक भीगा जमीन में खेती करने से सालाना ₹200000 से ज्यादा कमाई कर सकते हैं.

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किसान दयाराम मीणा बताते हैं कि इसकी खेती में लागत भी काम आती है. वह कहते हैं कि इसमें मेहनत जरुर परंपरागत खेती से थोड़ी ज्यादा होती है.लेकिन मुनाफा 4 गुना ज्यादा होता है. इस फल की खेती में पानी की कम मात्रा में जरूरत पड़ती है. बाजारों में भी इस फल की मांग स्थाई रूप से रहती है और कम समय में उत्पादन अधिक होता है इसलिए छोटे किसानों के लिए यह खेती पारंपरिक खेती से भी अधिक उपयुक्त है.

First Published :

November 20, 2025, 16:05 IST

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