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पपीते की खेती से बदली किस्मत, भीलवाड़ा का युवा किसान बना मिसाल

Last Updated:December 30, 2025, 18:22 IST

Agriculture News : भीलवाड़ा जिले के कोदूकोटा गांव में एक पढ़ा-लिखा युवा किसान आधुनिक खेती की मिसाल बनकर उभरा है. ग्रेजुएशन के बाद दिव्यन सोमानी ने पपीते की खेती को करियर बनाया और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर लाखों की कमाई शुरू कर दी. उनकी सफलता ने आसपास के किसानों को भी नई खेती की ओर प्रेरित किया है.

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भीलवाड़ा – आज के आधुनिक दौर में लगातार बदलती टेक्नोलॉजी और नई तकनीक की शिक्षा के साथ अब किसान भी आधुनिक हो रहे हैं ऐसे में खेती की ओर युवा किसानों का भी रुख बढ़ रहा है. जिसमें किसान पारंपरिक खेती को छोड़ आधुनिक खेती की ओर अपना कैरियर आजमा रहे हैं. कुछ ऐसा ही एक नजर भीलवाड़ा जिले के कोदूकोटा गांव में देखने को मिला जहां ग्रेजुएशन कंप्लीट होने के बाद भीलवाड़ा के दिव्यन सोमानी पपीते की खेती करने की शुरुआत की और इतना ही नहीं पपीते की खेती के माध्यम से वह अच्छा खासा मुनाफा भी कमा रहे हैं और कहीं ना कहीं उनकी इस खेती से प्रभावित होकर अन्य किसान भी उनके पास इस खेती की तकनीक सीखने के लिए पहुंच रहे हैं.

Local 18 से खास बातचीत करते हुए दिव्यन सोमानी ने बताया कि उच्च शिक्षा एवं व्यवसायिक वर्ग से जुड़े होने के बावजूद बागवानी को व्यवसाय के रूप में अपनाकर आज लाखों रुपये की कमाई कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर इंसान में कुछ कर गुजरने की चाह हो तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं होती. खेती में अपार संभावनाएं हैं और थोड़ी सी हिम्मत, सही मार्गदर्शन और कड़ी मेहनत से असाधारण मुकाम हासिल किया जा सकता है. साथ ही उन्होंने अपने इस प्रयास से दर्जनों लोगों को रोजगार भी उपलब्ध कराया है.

15 एकड़ में पपीते की खेती  दिव्यन सोमानी ने कोदूकोटा के समीप उद्यान विभाग के अधिकारियों के मार्गदर्शन में मार्च 2025 में 15 एकड़ भूमि पर करीब 15 हजार पपीते के पौधे लगाकर बगीचा स्थापित किया. वैज्ञानिक तरीके से की गई खेती का परिणाम यह रहा कि सिर्फ 7 महीने में ही पौधों पर फल आने लगे, जिससे उनकी मेहनत सफल होती नजर आई. दिव्यन सोमानी पपीते को पूरी तरह पौधे पर पकने के बाद ही तुड़वाते हैं. इससे पपीते की मिठास और गुणवत्ता बेहतर रहती है. इसी वजह से उनके पपीते बाजार में ग्राहकों की पहली पसंद बने हुए हैं और उन्हें अन्य किसानों की तुलना में बेहतर बाजार भाव भी मिल रहा है.

कई बड़े शहरों में पपीते की भारी डिमांडदिव्यन सोमानी ने बताया कि नवंबर 2025 तक करीब 200 क्विंटल पपीता बेच चुके हैं. औसतन 22 रुपये प्रति किलो के भाव से उन्हें लगभग 4.40 लाख रुपये की आय हो चुकी है. यह कुल उत्पादन का मात्र 10 प्रतिशत है, जबकि अभी 90 प्रतिशत पपीता पौधों पर मौजूद है, जिसकी तुड़ाई आगे की जाएगी. दिव्यन सोमानी द्वारा उत्पादित पपीता भीलवाड़ा के साथ-साथ उदयपुर, जयपुर और अहमदाबाद की मंडियों में भी भेजा जा रहा है. गुणवत्ता के कारण उनके पपीते की मांग लगातार बढ़ रही है, जिससे भविष्य में आय और बढ़ने की संभावना है.

About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal

A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें

Location :

Bhilwara,Rajasthan

First Published :

December 30, 2025, 18:22 IST

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भीलवाड़ा के दिव्यन सोमानी ने पपीते की खेती से लाखों की कमाई की

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