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FDs vs Small Savings Schemes: अगर आप रिस्क से दूर रहकर सुरक्षित निवेश करना चाहते हैं, तो आपके पास कई ऑप्शन हैं. फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के अलावा स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY), नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC), किसान विकास पत्र (KVP) और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) जैसे पॉपुलर और भरोसेमंद ऑप्शन हैं.
फिलहाल सरकार ने केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही के लिए स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है. सरकारी आदेश के मुताबिक, 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2026 तक सभी छोटी बचत योजनाओं पर ब्याज दरें वही रहेंगी, जो तीसरी तिमाही में लागू थीं. इन स्कीम्स में 6.9% से 7.5% सालाना तक ब्याज मिल रहा है. वहीं, बैंक एफडी पर ज्यादातर बैंकों की ब्याज दर 6% से 7% के बीच है. ऐसे में निवेशकों के सामने सवाल उठता है कि एफडी में निवेश करें या फिर स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स में पैसा लगाएं? जवाब आपकी जरूरत, समय और टैक्स प्लानिंग पर निर्भर करता है.
स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स पर ब्याज दरें (जनवरी-मार्च 2026)
सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) – 8.2%
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) – 7.1%
सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) – 8.2%
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) – 7.7%
किसान विकास पत्र (KVP) – 7.5% (115 महीना)
सेविंग्स डिपॉजिट – 4%
5 साल की रिकरिंग डिपॉजिट- 6.7%
मंथली इनकम स्कीम – 7.4%
एक साल की टाइम डिपॉजिट – 6.9%
2 साल की टाइम डिपॉजिट – 7%
3 साल की टाइम डिपॉजिट – 7.1%
5 साल की टाइम डिपॉजिट – 7.5%
ब्याज दर: कहां मिलेगा बेहतर रिटर्नअगर सिर्फ ब्याज दर की बात करें, तो स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स थोड़ा आगे दिखती हैं. प्रोविडेंट फंड, नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम जैसी स्कीम्स बैंक एफडी के मुकाबले ज्यादा रिटर्न दे रही हैं. कंजरवेटिव निवेशकों के लिए यह फर्क मायने रखता है, खासकर तब जब निवेश लॉन्ग टर्म के लिए किया जा रहा हो. हालांकि, ब्याज दर ही एकमात्र पैमाना नहीं है, क्योंकि बाकी शर्तें भी उतनी ही अहम होती हैं.
लॉक-इन और लिक्विडिटी: पैसा कितने समय के लिए बंधेगाफिक्स्ड डिपॉजिट की सबसे बड़ी खासियत इसकी फ्लेक्सिबिलिटी है. जरूरत पड़ने पर इसे समय से पहले तुड़वाया जा सकता है, भले ही थोड़ा पेनल्टी देनी पड़े. वहीं, स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स में लॉक-इन पीरियड लंबा होता है. एनएससी में 5 साल और पीपीएफ में 15 साल का लॉक-इन है. अगर आपको पैसों की जरूरत अचानक पड़ सकती है, तो एफडी ज्यादा सुविधाजनक ऑप्शन बन जाती है.
टैक्स का असर: असली कमाई कितनी बचेगीटैक्स के मामले में स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स को साफ बढ़त मिलती है. एफडी पर मिलने वाला ब्याज आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होता है. इसके उलट पीपीएफ और एनएससी जैसी योजनाओं से मिलने वाला ब्याज टैक्स-फ्री होता है. हालांकि पुराने टैक्स रिजीम में निवेश पर छूट अब नहीं मिलती, लेकिन ब्याज आय टैक्स से मुक्त रहना लंबे समय में बड़ा फायदा देता है.
सही स्ट्रैटेजी: एक नहीं, दोनों का इस्तेमालफाइनेंशियल एक्सपर्ट्स मानते हैं कि एफडी और स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स में से किसी एक को चुनने की जरूरत नहीं है. दोनों को मिलाकर निवेश करना ज्यादा समझदारी है. पीपीएफ लॉन्ग टर्म के गोल्स और टैक्स-फ्री रिटर्न के लिए बेहतर है, एनएससी मिड-टर्म जरूरतों के लिए काम आता है, जबकि एफडी शॉर्ट-टर्म गोल्स और इमरजेंसी फंड के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. सही बैलेंस बनाकर निवेश करने से आपका पैसा भी सुरक्षित रहता है और रिटर्न भी बैलेंस मिलता है.



