पिता से विरासत में मिले फलदार पेड़, लाखों में हो रही कमाई, एक हिस्सा पशु पक्षियों के लिए छोड़ देते हैं

Last Updated:December 19, 2025, 17:22 IST
Agriculture Story : सीकर जिले के कटराथल गांव में एक किसान ने खेती की सोच ही बदल दी है. धर्मेंद्र सिंह की जैविक और केमिकल-फ्री खेती आज किसी मिसाल से कम नहीं. आम से लेकर आंवले तक सैकड़ों फलदार पेड़ों से लहलहाता उनका खेत मुनाफे से ज्यादा सेवा और सेहत का संदेश दे रहा है.
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सीकर : सीकर जिले के कटराथल गांव में रहने वाले किसान धर्मेंद्र सिंह जैविक और जहर-मुक्त खेती को लेकर अपनी अलग पहचान बना चुके हैं. धर्मेंद्र सिंह की जमीन एक छोटा सा जैविक स्वर्ग है, यहां आम, अमरूद, नींबू, सेब और आंवले जैसे लगभग 600 फलदार पेड़ लहलहाते हैं, साथ ही तरह-तरह की हरी सब्ज़ियां भी उगाई जाती हैं. उनकी खेती का यह शानदार मॉडल पूरी तरह केमिकल फ्री है. उनकी यह हरियाली और जैविक विरासत अपने पिता सरजीत सिंह से विरासत में पाई है. उन्हें फलदार पेड़ लगाने का शौक था.
किसान धर्मेंद्र जी बताते हैं कि उन्हें खेती की सीख अपने पिता सरजीत से मिली है. उनके पिताजी को पेड़ लगाने का बहुत शौक था और वे हर खाली जगह पर पौधा लगा देते थे. बचपन से ही धर्मेंद्र ने अपने पिता को पेड़ों की देखभाल करते देखा और वहीं से खेती के प्रति लगाव पैदा हुआ. आज के दौर में जहां हर किसान मैक्सिमम प्रॉफिट के बारे में सोचता है, वहीं, उन्नत किसान धर्मेंद्र सिंह के लिए खेती एक शौक और सर्विस है. वो इससे कमाई करने के बजाय इसे एक सोशल कॉन्ट्रिब्यूशन मानते हैं.
पैदावार का एक हिस्सा फ्री में लोगों को देते हैंकिसान धर्मेंद्र जी की खेती की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे इसे मुनाफे के लिए नहीं करते. उनका कहना है कि वो मुनाफे के लिए खेती नहीं करते. उनका मुख्य मोटिव है गांववालों तक अच्छा और हेल्दी फूड पहुंचाना. इसीलिए वो अपनी पैदावार का कोई भी हिस्सा मंडी में बेचते नहीं हैं. बल्कि, गांव के लोगों को ये ऑर्गेनिक फल और सब्जियां फ्री में दे देते हैं. उनके लिए, लोगों की सेहत और खुशी ही असली कमाई है.
कोई भी रोक-टोक के ताजे और मीठे फल चख सकता हैउनके खेत में सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि पक्षी भी आज़ाद होकर फल खाते हैं. इस फार्म पर पक्षियों से लेकर आने-जाने वाले हर शख्स का स्वागत है. यहां कोई भी बिना किसी रोक-टोक के ताजे और मीठे फल चख सकता है. यह एक ऐसा कम्युनिटी स्पेस है जहां प्रकृति का दान सबके लिए खुला है. इससे एक शानदार इको सिस्टम बना हुआ है और लोगों को क्वालिटी, केमिकल-फ्री प्रोडक्ट्स मिल रहे हैं. आपको बता दें कि जैविक खेती में मेहनत ज्यादा होती है, लेकिन धर्मेंद्र जी इसे चैलेंज की तरह लेते हैं. वे खुद गोबर खाद, जैविक घोल और नैचुरल कंपोस्ट तैयार करते हैं. पानी का भी सही मैनेजमेंट किया जाता है ताकि व्यर्थ न हो. आज उनके पेड़ स्वस्थ हैं और फल की क्वालिटी मार्केट से कहीं बेहतर है. कई किसान उनसे सलाह लेने भी आते हैं, ताकि वे भी केमिकल फ्री खेती की शुरुआत कर सकें.
लाखों की करते हैं कमाईउन्नत किसान धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि वे फलदार पौधों की खेती करके एक हिस्से से लाखों रुपए की कमाई करते हैं. दूसरा हिस्सा वे आम लोगों और पशु पक्षियों को देते हैं. उन्होंने बताया कि मंडी के व्यापारी खुद उनके खेत में आकर फल लेकर जाते हैं. इसके अलावा उनके खेत में उगाए गए आंवले के डिमांड सबसे अधिक रहती है. आसपास की मंडियों के अलावा बाहरी राज्यों में भी उनके खेत में लगे फल सप्लाई किए जाते हैं. केमिकल कीटनाशकों से तैयार किए गए फलों के मुकाबले मेरे खेत में उगाए गए शुद्ध फल स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छे होते हैं और बाजार में उनकी मांग भी अधिक रहती है इसके अलावा मुनाफा भी अधिक मिलता है.
About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal
A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें
Location :
Sikar,Rajasthan
First Published :
December 19, 2025, 17:22 IST
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