वर्ल्ड हेरिटेज जयपुर में ‘डीम परमीशन’ का खेल

वार्ड 73 जो कि अब है वार्ड 111 इसमें धड़ल्ले से अवैध कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स आवासीय के नाम पर, किशनपोल जोन की भूमिका सवालों के घेरे में

निराला समाज जयपुर।
यूनेस्को से वर्ल्ड हेरिटेज सिटी का दर्जा प्राप्त गुलाबी नगरी जयपुर में विरासत अब कागजों में सिमटती जा रही है, जबकि ज़मीन पर अवैध व्यावसायिक निर्माण बेखौफ खड़े हो रहे हैं। नगर निगम जयपुर में प्रशासक बैठने के बाद हेरिटेज क्षेत्रों में डीम परमीशन और आवासीय अनुमति की आड़ में जिस तरह से कॉमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं, उसने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे चौंकाने वाले मामले नगर निगम किशनपोल जोन के अंतर्गत सामने आए हैं।
यहाँ निवर्तमान वार्ड संख्या 73 जो कि वर्तमान वार्ड संख्या 111 है में एक ही बिल्डर द्वारा एक के बाद एक व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स खड़े किए गए। कागजों में ये निर्माण आवासीय बताए गए, लेकिन हकीकत में हर कॉम्प्लेक्स में दो दर्जन से अधिक दुकानें संचालित हो रही हैं।

न फायर NOC, न सुरक्षा—फिर भी व्यापार चालू
इन परिसरों में न तो फायर एनओसी ली गई और न ही अग्निशमन उपकरण लगाए गए। इसके बावजूद नगर निगम ने इन्हें न तो सील किया और न ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की। सवाल यह है कि बिना फायर सुरक्षा के इन परिसरों में रोजाना सैकड़ों लोगों की आवाजाही आखिर किसके भरोसे चल रही है?
सरकारी नालियां निगलीं, सरकारी जमीन पर ट्रांसफार्मर

जांच में सामने आया है कि कई परिसरों में पानी निकासी की सरकारी नालियों को ही बंद कर दिया गया। इतना ही नहीं, नगर निगम और विद्युत विभाग की मदद से सरकारी जमीन पर ट्रांसफार्मर तक स्थापित कर दिए गए, जिससे साफ होता है कि यह सिर्फ बिल्डर का खेल नहीं, बल्कि एक संगठित तंत्र का नतीजा है।
पितलियों का चौक, बारह गणगौर और लड़ीवालों की गली बने हॉटस्पॉट

हेरिटेज क्षेत्र पितलियों का चौक (एलएमबी के पीछे) में नियमों को दरकिनार कर पांच मंजिला परिसर खड़ा किया गया, जिसमें दो दर्जन से अधिक दुकानें बेच दी गईं।
इसके बाद बारह गणगौर चौराहा पर जी प्लस थ्री कॉम्प्लेक्स खड़ा कर सरकारी नाली और जमीन पर कब्जा किया गया।
इसी बिल्डर ने लड़ीवालों की गली में उस अवैध व्यावसायिक परिसर के सामने नया कॉम्प्लेक्स खड़ा कर दिया, जहाँ 25 मार्च 2023 को भीषण आग लगने से पूरा कॉम्प्लेक्स जलकर खाक हो गया था।
जोन उपायुक्त पूजा मीणा का आंशिक एक्शन सवालों में
बारह गणगौर क्षेत्र में ही तत्कालीन जोन उपायुक्त पूजा मीणा ने नारायण मूंगे वाले के अवैध परिसर को सीज किया, लेकिन उसके सामने बने इस बिल्डर के व्यावसायिक परिसर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसी चयनात्मक कार्रवाई ने बिल्डर के हौसले इतने बुलंद कर दिए कि अब चौकड़ी विश्वेश्वरजी की विरासत पर सीधा हमला शुरू हो गया है।
जन शिकायतें बेअसर, अब हाईकोर्ट की तैयारी
चौकड़ी विश्वेश्वरजी के निवासी नगर निगम में दर्जनों शिकायतें कर चुके हैं, लेकिन हर बार या तो नोटिस देकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया या कार्रवाई का श्रेय ले लिया गया। हताश स्थानीय लोग अब नगर निगम नहीं, बल्कि राजस्थान हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर करने की तैयारी कर रहे हैं।
आपदा में कौन होगा जिम्मेदार?
संकरी गलियों में बने इन अवैध कॉम्प्लेक्सों के कारण हालात ऐसे हो गए हैं कि आपात स्थिति में न तो दमकल वाहन पहुंच सकते हैं, न एंबुलेंस और न ही पुलिस। सवाल यह है कि यदि कोई बड़ा हादसा हुआ, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा—बिल्डर, जोन अधिकारी या नगर निगम प्रशासन?
आज जयपुर की लड़ाई सिर्फ अवैध निर्माण से नहीं, बल्कि उस सिस्टम से है जो वर्ल्ड हेरिटेज को कंक्रीट में बदलने की मूक अनुमति दे रहा है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो गुलाबी नगरी का हेरिटेज टैग भी सिर्फ एक नाम भर रह जाएगा।
वर्तमान में ये है जवाबदेह:
संभागीय आयुक्त प्रशासक नगर निगम श्रीमती पूनम
आयुक्त नगर निगम हैरिटेज – डॉक्टर गौरव सैनी
उपायुक्त किशनपोल जोन : बिजेन्द्र सिंह
कनिष्ठ अभियंता : बिजेन्द्र मीणा
गजधर : सुरेश शर्मा



