Rajasthan

गांधारी किला मंचेरियल: ट्रैकिंग और इतिहास का केंद्र | Gandhari Khilla Telangana Guide

Last Updated:December 27, 2025, 10:58 IST

Gandhari Fort: तेलंगाना के मंचेरियल में स्थित गांधारी किला इतिहास और एडवेंचर का मिश्रण है. 12वीं सदी के इस किले में 8 फीट की नाग शेषु मूर्ति और प्राचीन मंदिर हैं. घने जंगलों में ट्रैकिंग और प्राचीन कुएं इसे पर्यटकों के लिए एक बेहतरीन वीकेंड गेटवे बनाते हैं.

ख़बरें फटाफट

तेलंगाना. यदि आप इतिहास के पन्नों को पलटने के साथ-साथ रोमांच के शौकीन हैं. तो तेलंगाना के मंचेरियल जिले में स्थित गांधारी किला (Gandhari Khilla) आपके लिए एक आदर्श गंतव्य हो सकता है. हैदराबाद से लगभग 270 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह प्राचीन किला अपनी वास्तुकला. रहस्य और कठिन चढ़ाई के लिए जाना जाता है. प्रकृति की गोद में स्थित यह स्थल इतिहास प्रेमियों और एडवेंचर के शौकीनों को अपनी ओर आकर्षित करता है.

12वीं शताब्दी के आसपास निर्मित यह किला काकतीय राजवंश और स्थानीय गोंड राजाओं के वैभव की कहानी बयां करता है. इतिहासकारों के अनुसार इस किले का निर्माण गोंड आदिवासियों ने काकतीय शासकों की सहायता से किया था. यहाँ की चट्टानों पर उकेरी गई मूर्तियाँ और विशाल प्रवेश द्वार विशिष्ट काकतीय शैली की याद दिलाते हैं. किले के भीतर भगवान शिव. गणेश. हनुमान और काल भैरव की प्राचीन प्रतिमाएं आज भी सुरक्षित मौजूद हैं.

8 फीट की नाग शेषु मूर्ति: एक अनोखा आकर्षणकिले का सबसे बड़ा आकर्षण एक ही पत्थर को तराश कर बनाई गई 8 फीट ऊंची नाग शेषु की भव्य मूर्ति है. इसके अलावा यहाँ कई ऐसे प्राचीन कुएं स्थित हैं. जिनका पानी भीषण गर्मी में भी कभी नहीं सूखता. यह जल प्रबंधन की प्राचीन तकनीक का उत्कृष्ट उदाहरण पेश करते हैं. पूरा किला बलुआ पत्थर की पहाड़ियों पर फैला हुआ है. जो अपनी मजबूती के लिए प्रसिद्ध है.

एडवेंचर और ट्रैकिंग का रोमांचघने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों के बीच स्थित होने के कारण गांधारी किले तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है. पर्यटकों को मुख्य द्वार तक पहुंचने के लिए लगभग एक घंटे की रोमांचक चढ़ाई करनी पड़ती है. यह रास्ता ऊबड़-खाबड़ और संकरा है. जो इसे पर्वतारोहियों और ट्रेकर्स के बीच बेहद लोकप्रिय बनाता है. ट्रैकिंग के दौरान घने जंगलों की हरियाली और शांति पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती है.

धार्मिक महत्व और औषधीय पौधेकिले में स्थित गांधारी मैसम्मा मंदिर स्थानीय आदिवासियों के लिए गहरी आस्था का केंद्र है. हर दो साल में यहाँ ‘मैसम्मा जतारा’ का आयोजन होता है. जिसमें तेलंगाना के अलावा महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से भी हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं. साथ ही यह पूरा क्षेत्र दुर्लभ औषधीय पौधों के लिए भी जाना जाता है. जहाँ वनस्पति प्रेमी अक्सर शोध के लिए आते हैं.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore is a multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience in digital media, social media management, video production, editing, content writing, and graphic, A MAJMC gra…और पढ़ें

Location :

Mancherial,Adilabad,Telangana

First Published :

December 27, 2025, 10:58 IST

homelifestyle

तेलंगाना: जंगलों में छिपा एक रहस्यमयी किला, ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए जन्नत

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj