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अलवर के खैरथल–तिजारा जिले का ‘गंडुआ’ गांव बना चर्चा का विषय, ग्रामीण बोले– नाम बदलो, नहीं तो शर्मिंदगी खत्म नहीं होगी

अलवर. खैरथल–तिजारा जिले की टपूकड़ा तहसील का एक छोटा-सा गांव इन दिनों बड़े स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है. करीब ढाई सौ साल पुराने इतिहास वाला यह गांव गंडुआ नाम के कारण आज अपनी पहचान से नहीं, बल्कि शर्मिंदगी और मज़ाक का केंद्र बन गया है. गांव के बच्चे हों या युवा, पुरुष हों या महिलाएं सभी का दर्द एक ही है, “हम अपने गांव का नाम बताते हुए शर्माते हैं.”

गंडुआ गांव के लोग कहते हैं कि जब भी वे बाहर नौकरी, पढ़ाई या किसी सरकारी दफ्तर में जाते हैं और गांव का नाम बताते हैं, तो लोग हंसने लगते हैं. यह हंसी मज़ाक ग्रामीणों के लिए अपमान का कारण बन जाती है. इसी कारण गांव के ज्यादातर लोग अपने वास्तविक गांव का नाम बताने से बचते हैं और पड़ोस के गांव गुवालदा या सारे खुर्द का नाम बता देते हैं. ग्रामीणों का कहना है कि कई बार तो रिश्तेदारियां तय करने में भी दिक्कत आती है, क्योंकि लड़की–लड़के के पक्ष के लोग गांव का नाम सुनकर मज़ाक उड़ाते हैं.

विधायक और नेताओं से भी की अपील, फिर भी नाम नहीं बदलायुवा राशिद खान बताते हैं कि ग्रामीणों का एक समूह गांव का नाम बदलने की मांग लेकर स्थानीय विधायक और अन्य नेताओं के पास भी गया, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. राशिद बताते हैं कि एक बार तिजारा विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का कार्यक्रम था. गांव के लोग स्कूल अपग्रेडेशन की मांग लेकर पहुंचे थे. लेकिन जैसे ही मंच से ग्रामीणों ने अपने गांव का नाम बताया, तो पूरा पंडाल हंसने लगा. उनका कहना है, “उस समय मैं इतनी शर्मिंदा हुआ कि अपनी बात भी ठीक से नहीं रख पाया.”

नाम की शर्म ने बच्चों की पढ़ाई तक रोक दीगांव के बुजुर्गों और अभिभावकों ने बताया कि गांव के नाम के डर और शर्म की वजह से कई बच्चियां पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जा रही हैं. गांव के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाली बच्चियों ने बताया कि उन्हें अपना गांव का नाम बताने में शर्म आती है. छात्र अनुज ने कहा कि जब वे अपना गांव बताते हैं तो कई लोग जोर-जोर से हंसने लगते हैं. एक शिक्षक, जो पिछले एक साल से इस स्कूल में कार्यरत हैं, उन्होंने भी माना कि गांव का नाम बताना उनके लिए असहज कर देने वाला अनुभव होता है, इसलिए वे अक्सर अपनी ड्यूटी लोकेशन बताने में आसपास के किसी दूसरे गांव का नाम बताते हैं. उन्होंने कहा कि गांव का नाम बदलना बेहद ज़रूरी है ताकि लोग बिना शर्म के अपनी पहचान बता सकें.

ट्रक ड्राइवरों की दिक्कत: नौकरी में मजाक, चालान में परेशानीट्रक ड्राइवर निसार खान बताते हैं कि एक बार ट्रांसपोर्ट ऑफिस में नौकरी के लिए गए थे. वहां गांव का नाम बताते ही सभी लोग हंसने लगे. अब वे कहीं भी बाहर जाते हैं तो शर्म की वजह से दूसरे गांव का नाम बताते हैं. एक अन्य ड्राइवर ने तो बताया कि गांव का सही नाम न बताने की वजह से उनका चालान तक कट गया. उन्होंने शर्म के कारण दूसरे गांव का नाम बताया, लेकिन जब आईडी चेक हुई तो दस्तावेजों में ‘गंडुआ’ लिखे होने पर उन पर चालान कर दिया गया.गंडुआ गांव में लगभग 300 परिवारों में करीब 4000 लोग रहते हैं, लेकिन शिक्षा की स्थिति बेहद कमजोर है. ग्रामीणों से मिली जानकारी के अनुसार पूरे गांव में केवल 130 लोग ही शिक्षित हैं. स्नातक केवल 5 लोग हैं. 12वीं पास करीब 30 और 8वीं से 10वीं तक पढ़े हुए केवल 100 लोग हैं. गांव में केवल पांचवीं तक का स्कूल है. इसके बाद बच्चों को पढ़ाई के लिए दूसरे गांवों या टपूकड़ा कस्बे में जाना पड़ता है— लेकिन गांव का नाम बताने में होने वाली शर्म की वजह से कई बच्चे आगे पढ़ने में हिचकिचाते हैं.

गांव का नाम कैसे पड़ा ‘गंडुआ’? 250 साल पुरानी कहानीगांव के बुजुर्ग नवल खान बताते हैं कि करीब ढाई सौ साल पहले गुवालदा गांव के भानु खान और नेलू खान परिवार के लोग पहाड़ के किनारे आकर बसे थे. बरसात के मौसम में पहाड़ों से बहने वाले झरनों का पानी एक तरह की गडुआ जैसी आकृति बनाता था. गडुआ एक देसी बर्तन होता है जिसमें पानी भरा जाता है. इसी वजह से गांव का नाम पहले ‘गडुआ’ पड़ा. समय के साथ उच्चारण बदलकर नाम ‘गडुआ’ से ‘गंडुआ’ हो गया, और अब यही नाम गांव वालों के लिए शर्मिंदगी का कारण बन चुका है.

ग्रामीणों की मांग सरकार गांव का नाम बदलेगंडुआ गांव के सभी वर्गों बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों, महिलाओं और शिक्षकों की एक ही मांग है कि सरकार गांव का नाम बदल दे. गांव के लोगों का कहना है, “हम अपने गांव को लेकर गर्व महसूस करना चाहते हैं, लेकिन नाम के कारण लोग हम पर हंसते हैं. हमारी आने वाली पीढ़ी को इस शर्मिंदगी से बचाने के लिए गांव का नाम बदलना बेहद ज़रूरी है.” सरकार और प्रशासन से ग्रामीण उम्मीद कर रहे हैं कि उनकी वर्षों पुरानी इस परेशानी को समझते हुए गांव के नाम परिवर्तन पर जल्द निर्णय लिया जाएगा.

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