Rajasthan

झुंझुनूं में गैंगवार की आग! खिरोड़ में गोलियों की गूंज, क्या शेखावाटी में लौट रहा है अपराध का दौर?

झुंझुनूं. राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में अपराध की काली परछाई फिर लंबी हो रही है. अक्टूबर में हिस्ट्रीशीटर डेनिस बावरिया की सनसनीखेज हत्या से शुरू हुई गैंगवार की आहट अब खुली जंग में बदल चुकी है. गुरुवार को झुंझुनूं के नवलगढ़ उपखंड के खिरोड़ गांव में दिनदहाड़े फायरिंग से दो बदमाश कृष्णकांत उर्फ गोलू स्वामी और सुनील सुंडा की मौत हो गई. ये घटनाएं न सिर्फ पुलिस को हिलाकर रख दिया है, बल्कि पूरे इलाके में दहशत फैला दी है.अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या ये डेनिस गैंग के बदले की कड़ी है? या शेखावाटी के पुराने गैंग्स जैसे लॉरेंस बिश्नोई, राजू ठेहट का नया चैप्टर शुरू होने वाला है. राजस्थान के शेखावाटी क्षेत्र में गैंगवार का इतिहास लंबे समय से रक्तरंजित रहा है. सीकर, चूरू, झुंझुनूं और इससे सटे नागौर तक कई गैंग वर्षों तक वर्चस्व की लड़ाई में भिड़ती रहीं.

कुख्यात आनंदपाल सिंह और राजू ठेहट जैसे बड़े नाम यहीं से उभरे, जिन्होंने अपने-अपने नेटवर्क के सहारे रंगदारी, हथियार और हत्या की घटनाओं के जरिए अपराध की दुनिया में दबदबा बनाया. इनके मारे जाने के बाद इनके गुर्गे अलग-अलग छोटे गुटों में बंटकर नई गैंगों से जुड़ गए, जिससे क्षेत्र में आपराधिक ढांचे का और विस्तार हुआ. 1996 से 2010 के बीच शेखावाटी में गैंगवार का दौर इतना खतरनाक था कि पुलिस की हर बड़ी कार्रवाई के बावजूद हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही थी. हालांकि कुछ वर्षों तक हालात शांत रहे, लेकिन हाल के महीनों में हुई लगातार वारदातों ने फिर संकेत दिया है कि पुराने गैंग नेटवर्क दोबारा सक्रिय हो रहे हैं और पुलिस के लिए चुनौती एक बार फिर गहरी होती जा रही है.

डेनिस के नाम से कांपता था शेखावाटी क्षेत्र

शेखावाटी का अपराध जगत ‘डेनिस’ नाम से ही कांपता था. झुंझुनूं का यह हिस्ट्रीशीटर डेनिश बावरिया हत्या, जबरन वसूली, हथियार तस्करी जैसे दर्जनभर से ज्यादा केसों में नामजाद था. 19 अक्टूबर 2025 को रविवार रात झुंझुनूं के बापड़ी गांव में उसका किडनैपिंग हुआ. दो बोलेरो कैंपर गाड़ियों में सवार हथियारबंद बदमाशों ने डेनिस की स्कॉर्पियो को टक्कर मारी और हथियार लहराकर जबरदस्ती गाड़ी में बिठाया और फरार हो गए. पुलिस चेज में किडनैपर्स की एक गाड़ी पलट गई, जिसमें दो बदमाश मंदीप उर्फ मदिया और जॉनी मारे गए. बाकी ने डेनिस की बेरहमी से मारपीट कर रसोड़ा गांव में फेंक दिया. स्थानीय लोगों ने घायल डेनिस को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया, जहां पहले उसका झुंझुनूं के बीडीके अस्पताल में इलाज हुआ. बाद में हालत नाजुक होने पर उसे जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल रेफर किया गया. डॉक्टरों ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन उसने दम तोड़ दिया.

डेनिस की हत्या करने में 12 लोग थे शामिल

पुलिस जांच में खुलास हुआ कि हत्या का मास्टरमाइंड मंदीप था, जो डेनिस से पुरानी दुश्मनी रखता था. दिवाली से ठीक पहले अक्टूबर में प्लानिंग हुई और जॉनी को 19 अक्टूबर को ही मैसेज आया कि डेनिस बावरिया की हत्या करनी है और चार-पांच लड़के लेकर आना है. इसके बाद छोटी दीपावली के दिन डेनिस की हत्या को अंजाम देने की कोशिश की गई. इसमें कुल 12 आरोपी थे. जिसमें मुख्य तीन इनामी हितेश मील, प्रशांत उर्फ पोखर, अजय उर्फ संदीप जाट शामिल थे. प्रत्येक पर 50-50 हजार का इनाम घोषित था. नवंबर 2025 में ट्रेन के जनरल डिब्बे में भीख मांगते पकड़ा गया. इसके अलावा ताराचंद, पंकज जाट आदि की गिरफ्तारियां हुई. एसपी प्रीतम सिंह ने कहा कि ये गैंगवार की कड़ी थी और इसको लेकर पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड में है.

डेनिस की हत्या के बाद शुरू हुआ गैंगवार का दौर

डेनिस की हत्या ने गैंग बैलेंस बिगाड़ दिया. उसके गुट बावरिया फैमिली ने बदला लेने की धमकी दी, जो अब खिरोड़ जैसे छोटे गांवों में फैल रही है. शेखावाटी में 5-6 मुख्य गैंग्स एक्टिव हैं. जिसमें लॉरेंस विश्नोई, राजू ठेहट, गोल्डी बराला और लोकल जैसे कटेवा-स्वामी जैसे गैंग्स शामिल हैं. डेनिस इनके बीच वसूली का ‘मिडलमैन’ था. उसकी हत्या से पावर वॉयड और छोटे गुटों में टकराव बढ़ गया. 2025 में शेखावाटी में 15 से अधिक गैंग रिलेटेड इंसिडेंट्स हुए. जिसमें गांजा स्मगलिंग जो असम-ओडिशा से लाया गया था भी शामिल था. पुलिस ने 800 किलो पकड़ा, जिसकी 4 करोड़ वैल्यू थी. वहीं गैंग को मजबूत बनाने के लिए युवाओं को शामिल किया जाने लगा. इन गैंग्स को सोशल मीडिया पर फोलो करने वाले 6 युवकों को गिरफ्तार भी किया गया. गैंगवार की बढ़ती घटना को लेकर पुलिस पुरी तरह से अलर्ट मोड में है.

युवाओं को अपराध से दूर रहने की देता था सलाह

डेनिस उर्फ नरेश बावरिया झुंझुनूं की जीत की ढाणी का रहने वाला था. डेनिस बावरिया 2010 से अपराध जगत में सक्रिय था. इसे शेखावाटी में वसूली का सरगना कहा जाता था. 2023 में राजू ठेहट हत्याकांड से जुड़े लॉरेंस गैंग के साथ टकराव के बाद लगातार सूर्खियों में रहने लगा. इसको लेकर ही लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने कई गाड़ियों को बुलेटप्रूफ करवा लिया था. डेनिस युवाओं को अपराध की दुनिया से दूर रहने की सलाह देता था. उसने कहा था कि “जो इस लाइन में आएगा, एक दिन दुख ही पाएगा.” डेनिस ने यह भी बताया था कि उसके माता-पिता हमेशा चाहते थे कि वह पढ़ाई करे या खेती में लग जाए, लेकिन वे कभी नहीं चाहते थे कि वह अपराधी बने. उसने यह भी कहा था कि समाज में लोग सामने तो कुछ नहीं कहते लेकिन पीछे उसकी बुराई करते हैं. डेनिस की हत्या के बाद शेखावाटी में गैंगवार की आशंका बढ़ गई थी. उसकी मौत के बाद से ही झुंझुनूं में पुलिस सतर्क थी और गैंगवार की आशंका को देखते हुए निगरानी बढ़ा दी थी.

खिरोड़ गांव में दिखा गैंगवार का नजारा

गुरुवार की सुबह 10 बजे नवलगढ़ के खिरोड़ गांव की कच्ची सड़क पर गूंजीं गोलियां. दो ग्रुपों के बीच फायरिंग हुई जिसमें एक तरफ रविंद्र कटेवा गैंग तो दूसरी तरफ गोलू स्वामी-सुनील सुंडा गुट था. चार बदमाशों ने कटेवा पर हमला किया, लेकिन गोली सुनील सुंडा को लगी. जवाबी फायरिंग में गोलू स्वामी उर्फ कृष्णकांत उर्फ रविकांत भी मारा गया. भागते आरोपी ने खुद को गोली मार ली. एसपी प्रीतम सिंह के मुताबिक इसका मोटिव पुरानी रंजिश थी. एसपी ने बताया कि दोनों हिस्ट्रीशीटर थे और दोनों पर 20-20 केस दर्ज था. इलाके को सील कर पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है.वहीं जबकि 5 संदिग्ध फरार हैं. गैंगवार की दहशत एक बार फिर मंडराने लगा है.

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