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Gangour Festival 2025: गणगौर के पर्व का दूसरा फैज हुआ शुरू, यह है अनोखी परंपरा, 31 मार्च को निकाली जाएगी सवारी 

Last Updated:March 23, 2025, 11:36 IST

Gangour Festival 2025: राजस्थानी परंपरा और संस्कृति का प्रमुख गणगौर के त्यौहार का दूसरा फैज शुरू हो चुका है. अब कुंवारी लड़कियां और महिलाएं गणगौर पूजन के साथ घुड़ला घूमना भी शुरू करेंगी. इसमें कुंवारी लड़कियां…और पढ़ेंX
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गणगौर के त्यौहार का दूसरा फैज शुरू

राजस्थानी परंपरा और संस्कृति का प्रमुख गणगौर के त्यौहार का दूसरा फैज शुरू हो चुका है. अब कुंवारी लड़कियां और महिलाएं गणगौर पूजन के साथ घुड़ला घूमना भी शुरू करेंगी. इसमें कुंवारी लड़कियां और महिलाएं छिद्रयुक्त घुड़ले में दीप जलाकर आसपास के घरों में जाती है. इस दौरान राजस्थानी भाषा में गणगौर के गीत जाती है. इस बार गणगौर का त्यौहार 18 दिन का मनाया जाएगा, जिसमें कुंवारी लड़कियां, नवविवाहिता सहित महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती को ईसर और गणगौर के रूप में पूजा करती है.

इसके अलावा रोजाना नवविवाहिताएं और युवतियां एकत्रित होकर कुओं से दूब लेकर आती हैं. उसी से महिलाएं गणगौर का पूजन करती हैं. धार्मिक मान्यता है कि जो महिलाएं ये व्रत रखती हैं, उन्हें भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है. कुंवारी लड़कियां को अच्छा वर मिलता है और विवाहिताओं के पति की उम्र लंबी होती है. यह त्यौहार राजस्थान के सभी जिलों में बहुत सादगी पूर्ण तरीके से मनाया जाता है. यह राजस्थान की संस्कृति को प्रदर्शित करने वाला त्यौहार है, इसलिए इसे देखने के लिए देसी विदेशी पर्यटक भी आते हैं.

क्यों मनाया जाता है गणगौर का त्यौहार इस त्यौहार से जुड़ी मान्यता है कि माता पार्वती होली के दूसरे दिन अपने पीहर आती हैं और अठारह दिनों के बाद भगवान शिव उन्हें फिर लेने के लिए आते हैं और चैत्र शुक्ल तृतीया को उनकी विदाई होती है. इस कारण यह त्यौहार शिव और पार्वती के मिलन का प्रतीक है और यह वैवाहिक सुख, अखंड सौभाग्य और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना के लिए मनाया जाता है. राजस्थान में इस त्योहार को बड़े हर्ष उल्लास के साथ मनाया जाता है, राज्य के कई बड़े शहरों में गणगौर की सवारी भी निकाली जाती है.

31 मार्च को होगा समापन इस बार गणगौर पूजन का समापन 31 मार्च को होगा. इस दिन से नवरात्र की शुरुआत भी होगी. 31 मार्च को महिलाएं ईसर और गणगौर को धूमधाम से गीत गाते हुए कुए पर लेकर जाती है. राजस्थान के अलग-अलग जिलों में अलग-अलग तरीके से यह गणगौर पूजन पूजन के समापन का कार्यक्रम होता है. यह त्यौहार राजशाही परंपरा से चला आ रहा है. जयपुर में धूमधाम के साथ राजशाही परंपरा के अनुसार मुख्य मार्गो से होते हुए गणगौर की सवारी निकाली जाती है.

Location :

Jaipur,Rajasthan

First Published :

March 23, 2025, 11:36 IST

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