गार्डनिंग टिप्स: महंगी स्ट्रॉबेरी भूल जाइए! घर की छत हो या बालकनी…अब दो महीनों में उगाएं स्वादिष्ट स्ट्रॉबेरी—जानें एक्सपर्ट टिप्स

Last Updated:November 19, 2025, 13:30 IST
घर की बालकनी, छत या आंगन में मीठी और ताज़ी स्ट्रॉबेरी उगाना अब बिल्कुल आसान है. सही किस्म चुनने से लेकर गमले, मिट्टी, खाद और देखभाल तक—थोड़ी सी मेहनत और सही तकनीक के साथ आप महंगी बाजार वाली स्ट्रॉबेरी की जगह अपने घर पर ही जैविक और स्वादिष्ट फल पा सकते हैं. गार्डनिंग एक्सपर्ट रमेश कुमार बताते हैं कि स्ट्रॉबेरी कम जगह में भी आसानी से उग जाती है और सिर्फ कुछ हफ्तों में फल देना शुरू कर देती है.
स्ट्रॉबेरी खाना किसे पसंद नहीं होता! यह स्वाद और सेहत दोनों के लिए फायदेमंद है, लेकिन कीटनाशकों के उपयोग और अधिक महंगी होने के कारण कई लोग इसे खाने से बचते हैं. क्या आपको पता है कि आप अपनी बालकनी, छत या आंगन में ही स्ट्रॉबेरी उगा सकते हैं? गमले में स्ट्रॉबेरी उगाना बेहद आसान होता है और इसमें ज़्यादा मेहनत भी नहीं लगती. घर की छोटी-सी बालकनी, छत या आंगन में इसे आसानी से उगाया जा सकता है. स्ट्रॉबेरी की खासियत यह है कि इसे ज़्यादा जगह की आवश्यकता नहीं होती, और सही किस्म तथा देखभाल के साथ यह मीठे और स्वादिष्ट फल आसानी से देती है. शहरी घरों में कम जगह होने के बावजूद यह पौधा आसानी से उग जाता है. इसके अलावा स्ट्रॉबेरी के पौधे की एक और खास बात यह है कि इसकी उपज कम समय में मिल जाती है.

किस्म का चयन करते समय अपने इलाके के तापमान और मौसम को ध्यान में रखना बेहद आवश्यक है. कुछ स्ट्रॉबेरी पौधों को अत्यधिक ठंड या अधिक नमी पसंद नहीं होती, जबकि कुछ किस्में फैलाव वाली होती हैं, जो छोटे गमलों के लिए उपयुक्त नहीं रहतीं. ऐसे में गमलों के लिए छोटे और सीधे बढ़ने वाले पौधे चुनना बेहतर होता है. साथ ही, कुछ किस्में स्वाद में खट्टी भी होती हैं, इसलिए स्वाद और उपयोग के अनुसार सही किस्म चुनना अधिक लाभदायक रहता है.

गमले का चुनाव स्ट्रॉबेरी उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, इसके लिए कम से कम 20 से 25 सेंटीमीटर गहरा गमला लें, ताकि जड़ों को पर्याप्त जगह मिले और पौधा स्वस्थ तरीके से बढ़ सके. गमले में निकासी के लिए छेद होना ज़रूरी है, ताकि पानी जमा न हो. लगभग 30 सेंटीमीटर चौड़े गमले में 2 से 3 पौधे लगाए जा सकते हैं, लेकिन इनके बीच पर्याप्त दूरी रखना आवश्यक है. रोपाई के बाद हल्का पानी दें, ताकि पौधे की जड़ें मिट्टी को अच्छी तरह पकड़ सकें.
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गार्डनिंग एक्सपर्ट रमेश कुमार बताते हैं कि बेहतर उत्पादन के लिए जैविक खादों के साथ संतुलित एनपीके उर्वरक का उपयोग करना चाहिए. मिट्टी मिश्रण में 50% मिट्टी, 30% गोबर या वर्मी कम्पोस्ट, 10% रेत और 10% नीम खली मिलाने से पौधों को पर्याप्त पोषण मिलता है और मिट्टी में कीट पनपने की संभावना कम होती है. गर्मियों में रोज़ पानी देना चाहिए, जबकि सर्दियों में 2 से 3 दिन के अंतर पर पानी देना पर्याप्त होता है. पौधों के आसपास पुआल या बजरी की मल्चिंग करने से नमी बनी रहती है और फल मिट्टी के संपर्क में आने से खराब नहीं होते.
First Published :
November 19, 2025, 13:30 IST
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अब दो महीनों में उगाएं स्वादिष्ट स्ट्रॉबेरी—जानें एक्सपर्ट टिप्स



