Gardening Tips : अब खेत नहीं, घर में उगेगा राजमा, बालकनी में ऐसे लें शुद्ध और भरपूर पैदावार

Last Updated:January 07, 2026, 15:29 IST
Best Gardening Tips : राजमा अब बालकनी या गमले में भी आसानी से उगाई जा सकती है. ऑर्गेनिक बीज, सही मिट्टी, धूप और जैविक खाद से 70-90 दिन में ताजा, रसायनमुक्त राजमा घर पर मिलती है. राजमा उगाने के लिए सबसे पहले अच्छे और स्वस्थ बीज का चयन करना जरूरी होता है. बाजार से केमिकल-फ्री या ऑर्गेनिक राजमा बीज लें, ताकि अंकुरण बेहतर हो. बुवाई से पहले बीजों को 8 से 10 घंटे तक पानी में भिगोकर रखें, इससे बीज जल्दी और समान रूप से अंकुरित होते हैं.
राजमा को आमतौर पर पहाड़ी इलाकों या खेतों की फसल माना जाता है, लेकिन अब इसे घर की बालकनी, छत या गमले में भी आसानी से उगाया जा सकता है. शहरी बागवानी के बढ़ते चलन के साथ लोग सब्जियों के साथ-साथ दालें भी घर पर उगाने लगे हैं. राजमा पौष्टिक होने के साथ-साथ उगाने में भी ज्यादा मेहनत नहीं मांगता हैं. सही गमला, सही मिट्टी और थोड़ी सी देखभाल से घर पर ताजा और शुद्ध राजमा की अच्छी पैदावार ली जा सकती है, जो स्वास्थ्य और स्वाद दोनों के लिए लाभकारी होती है.

राजमा उगाने के लिए सबसे पहले अच्छे और स्वस्थ बीज का चयन करना जरूरी होता है. बाजार से केमिकल-फ्री या ऑर्गेनिक राजमा बीज लें, ताकि अंकुरण बेहतर हो. बुवाई से पहले बीजों को 8 से 10 घंटे तक पानी में भिगोकर रखें, इससे बीज जल्दी और समान रूप से अंकुरित होते हैं. भिगोने के बाद बीजों को हल्की नमी वाली मिट्टी में बोएं. बीज बहुत गहराई में न डालें, करीब एक से डेढ़ इंच की गहराई पर्याप्त मानी जाती है.

राजमा के लिए मिट्टी का चयन बहुत महत्वपूर्ण होता है. गमले में उगाने के लिए दो भाग उपजाऊ मिट्टी, एक भाग गोबर की सड़ी खाद और एक भाग रेत मिलाकर मिश्रण तैयार करें. इससे मिट्टी में जल निकास अच्छा रहता है और जड़ें सड़ने से बचती हैं. गमले का आकार कम से कम 12 से 14 इंच गहरा होना चाहिए, ताकि पौधे की जड़ें अच्छे से फैल सकें. गमले में नीचे छेद जरूर हों, जिससे अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके.
Add as Preferred Source on Google

राजमा के पौधे को अच्छी धूप की जरूरत होती है. रोजाना कम से कम 5 से 6 घंटे की सीधी धूप मिलने से पौधा स्वस्थ रहता है और फूल-फल अच्छे आते हैं. पानी देने में संतुलन रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि ज्यादा पानी से जड़ें गल सकती हैं. मिट्टी सूखने पर ही हल्का पानी दें. गर्मियों में सुबह या शाम को सिंचाई करें. समय-समय पर जैविक खाद या वर्मी कम्पोस्ट डालने से पौधे की वृद्धि तेज होती है.

राजमा बेल वाली फसल होती है, इसलिए पौधे को सहारे की आवश्यकता होती है. गमले में लकड़ी की छड़ी, जाली या तार का सहारा लगाएं, जिससे बेल आसानी से ऊपर चढ़ सके. इससे पौधे को हवा और धूप अच्छी मिलती है और कीट-रोग का खतरा भी कम होता है. यदि पत्तियों पर कीड़े दिखाई दें तो नीम तेल का छिड़काव करें, जो पूरी तरह जैविक और सुरक्षित उपाय है. नियमित निरीक्षण से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है.

राजमा की फसल आमतौर पर 70 से 90 दिनों में तैयार हो जाती है. जब फलियां पूरी तरह सूखने लगें और उनका रंग हल्का भूरा हो जाए, तब कटाई का सही समय होता है. फलियों को तोड़कर धूप में अच्छी तरह सुखाएं और फिर दाने निकाल लें. घर पर उगाया गया राजमा न केवल स्वाद में बेहतर होता है, बल्कि इसमें किसी भी प्रकार के रसायन का उपयोग नहीं होता. इस तरह बालकनी या गमले में राजमा उगाकर आत्मनिर्भर और स्वस्थ जीवनशैली अपनाई जा सकती है.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।First Published :
January 07, 2026, 15:29 IST
homelifestyle
अब खेत नहीं, घर में उगेगा राजमा, बालकनी में ऐसे लें शुद्ध और भरपूर पैदावार



