Garlic Farming Tips: Low Cost High Profit

सीकर. किसान जब मेहनत, पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक समझदारी तीनों को मिलाकर खेती करते हैं, तो उनका खेत ही उनके लिए ‘एटीएम बैंक’ बन जाता है. ऐसी ही एक बेहतरीन और मुनाफे वाली फसल है लहसुन (Garlic). इसकी खेती कम लागत में अधिक मुनाफा देती है और यही वजह है कि इसे अब कई किसान नकदी फसल (Cash Crop) के रूप में उगा रहे हैं. यह फसल किसानों को मात्र तीन से चार महीने में ही अच्छा रिटर्न देने की क्षमता रखती है.
बुवाई का सही समय और उन्नत बीज का चयन
लहसुन की खेती की सफलता उसके सही समय पर बुवाई और बीज के चुनाव पर निर्भर करती है.
बुवाई का समय: लहसुन की बुवाई अक्टूबर से नवंबर के बीच की जाती है. इस समय का चुनाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि लहसुन को अंकुरण और शुरुआती विकास के लिए ठंडे मौसम की आवश्यकता होती है.
बीज का चयन: एग्रीकल्चर एक्सपर्ट दिनेश जाखड़ के अनुसार, उन्नत किस्म के बीज का चयन सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह फसल की गुणवत्ता और उत्पादन को तय करता है. अच्छी गुणवत्ता वाली लहसुन की कलियों को ही बीज के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए. सामान्यतः एक बीघा खेत में 50–60 किलो लहसुन की कलिया बीज के रूप में लगाई जा सकती है.
मिट्टी और खेत की तैयारीलहसुन की खेती के लिए दोमट और बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है.
जुताई: खेत की गहरी जुताई करके उसे भुरभुरा बनाना जरूरी है ताकि लहसुन की कलिया अच्छी तरह से जम सकें और गांठ का विकास सही हो सके.
उर्वरता: खेती से पहले मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए जैविक खाद जैसे गोबर की सड़ी खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी में मिलाना बेहद लाभकारी होता है.
सिंचाई, निराई और देखभाल
लहसुन एक ऐसी फसल है जिसे नमी पसंद है.
सिंचाई: पहली हल्की सिंचाई तुरंत बुवाई के बाद करनी चाहिए. इसके बाद मौसम और मिट्टी की नमी को देखते हुए हर 10–12 दिन में नियमित पानी देना आवश्यक है. ध्यान रहे कि खेत में पानी का जमाव न हो, अन्यथा कलियां सड़ सकती हैं.
खरपतवार नियंत्रण: खेत में खरपतवार न पनपे, इसके लिए निराई-गुड़ाई समय-समय पर करनी चाहिए. खरपतवार फसल के पोषण तत्वों को छीन लेते हैं, जिससे उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ता है.
रोग और कीट नियंत्रणलहसुन की फसल में तना गलन, पत्ती झुलसा और फफूंद जैसी बीमारियों का खतरा रहता है.
फफूंदनाशक: इन रोगों से बचाव के लिए बुवाई से पहले ट्राइकोडर्मा से बीज उपचार करना या जैविक फफूंदनाशक का छिड़काव फायदेमंद है.
कीटनाशक: कीटों से सुरक्षा के लिए नीम तेल या जैविक कीटनाशक का उपयोग किया जा सकता है.
कटाई और बंपर उत्पादनलहसुन की फसल लगभग 120 से 150 दिन में तैयार हो जाती है.
कटाई का समय: पौधों की पत्तियाँ पीली पड़ने और सूखने लगने पर लहसुन तैयार होता है.
सुखाना: कटाई के बाद लहसुन को सावधानीपूर्वक खोदकर 10–15 दिन तक छाया में सुखाना चाहिए. सामान्य परिस्थितियों में एक बीघा खेत में 10–15 क्विंटल तक बंपर उत्पादन होता है.
कम लागत में ज्यादा मुनाफालहसुन की खेती में निवेश कम होता है, लेकिन बाजार में इसकी कीमत अच्छी मिलती है. वर्तमान बाजार भाव के अनुसार, लहसुन का मूल्य 100–150 रुपये प्रति किलो तक मिलता है. इस दर पर, एक बीघा खेत से किसान को 2 लाख रुपये तक की आमदनी संभव है. किसानों को सलाह दी जाती है कि वे बाजार भाव स्थिर होने तक स्टोरिंग के लिए कोल्ड स्टोरेज का इस्तेमाल करें.



