डॉक्टरों की गलती या सिस्टम की चूक? राजस्थान के अस्पतालों में मरीजों के साथ ये क्या हो रहा है?

जयपुर. चिकित्सा क्षेत्र में लापरवाही के मामले आए दिन सामने आते रहते हैं, लेकिन कुछ इतने गंभीर होते हैं कि पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बन जाते हैं. खासकर जब सर्जरी के दौरान डॉक्टर मरीज के शरीर में चाकू, ब्लेड, स्पंज या अन्य उपकरण छोड़ देते हैं और फिर प्लास्टर कर देते हैं. ऐसे मामलों में एक्स-रे से ही गलती सामने आती है, लेकिन तब तक मरीज को भारी नुकसान हो चुका होता है. हाल के वर्षों में राजस्थान में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां डॉक्टरों की इस लापरवाही ने मरीजों की जिंदगी को खतरे में डाल दिया. ताजा मामला राजस्थान के सबसे बड़े अस्पतालों में शुमार होने वाले बीकानेर के पीबीएम अस्पताल से सामने आया है. बीकानेर के पीबीएम अस्पताल से चिकित्सकीय लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया. यहां एक बच्चे उवेश रजा के पैर में प्लास्टर करने के दौरान सर्जिकल ब्लेड अंदर ही छूट गई.
बच्चे को घर ले जाने के बाद तेज दर्द हुआ, जिस पर दोबारा अस्पताल लाया गया. एक्स-रे में ब्लेड का पता चला, तो परिजनों में आक्रोश भड़क उठा.परिजनों के अनुसार, प्लास्टर के बाद बच्चा दर्द से कराहने लगा और पैर हिला नहीं पा रहा था. शुरुआत में डॉक्टरों ने शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया. खुद पहल कर एक्स-रे करवाने पर प्लास्टर के अंदर ब्लेड साफ दिखी. इससे अंदरूनी चोट, नसों को नुकसान या संक्रमण का बड़ा खतरा था. परिजनों ने अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया और कहा कि समय पर पता न चलता तो बच्चे का पैर गंभीर रूप से खराब हो सकता था. इसी तरह का मामला कोटा, जयपुर, बाड़मेर सहित अन्य जिलों से आ चुका है. आइए जानते हैं चिकित्सीय लापरवाही के वैसे मामले जो केवल राजस्थान नहीं नहीं देशभर में सूर्खियां बटोरी. इसमें कई मामले तो कोर्ट तक भी पहुंचा.
कोटा के एमबीएस अस्पताल में प्लास्टर के अंदर छोड़ दी गई थी ब्लेड
राजस्थान के कोटा में सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में एक युवक का सड़क हादसे में हाथ टूट गया. डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने प्लास्टर लगाया, लेकिन अंदर सर्जिकल ब्लेड ही छोड़ दी. युवक को 7 दिन तक भारी दर्द हुआ. जब वह पक्का प्लास्टर करवाने गया, तब एक्स-रे और जांच से ब्लेड का पता चला. स्टाफ ने पहले कच्चा प्लास्टर दोबारा बांधा, लेकिन गलती उजागर होने पर हंगामा हुआ. यह मामला अस्पताल की गंभीर लापरवाही का उदाहरण बना और मीडिया में काफी चर्चित रहा. मरीज ने आरोप लगाया कि स्टाफ की अनदेखी से संक्रमण का खतरा बढ़ गया.
जयपुर के फोर्टिस अस्पताल में हार्ट सर्जरी के बाद कैंची छूटी
जयपुर के नामी फोर्टिस अस्पताल में एक मरीज की ओपन हार्ट सर्जरी हुई. ऑपरेशन सफल बताया गया, लेकिन मरीज की मौत के बाद दाह संस्कार के दौरान अस्थियां बिनते समय परिजनों को सर्जिकल कैंची मिली. आरोप लगा कि सर्जरी के दौरान कैंची शरीर में ही छोड़ दी गई. परिजनों के होश उड़ गए और अस्पताल पर मुकदमा चला. यह मामला पूरे राजस्थान में चर्चा का विषय बना, क्योंकि बड़े प्राइवेट अस्पताल में भी ऐसी लापरवाही हुई. जांच में अस्पताल ने इनकार किया, लेकिन रिपोर्ट्स और एक्स-रे से सवाल उठे.
बाड़मेर में प्लास्टर की लापरवाही से बच्चे का हाथ हुआ खराब
बाड़मेर के जॉइंट्स ट्रॉमा एंड डेंटल केयर अस्पताल में एक बच्चे के हाथ पर बिना ठीक जांच के कच्चा प्लास्टर लगा दिया गया. इससे संक्रमण फैला और बच्चे का पूरा हाथ खराब हो गया. परिजनों ने डॉक्टर पर घोर लापरवाही का आरोप लगाया. मामला कोर्ट पहुंचा और परिवार को लाखों का मुआवजा मिला. एक्स-रे से गलती सामने आई, लेकिन तब तक बच्चे को स्थायी नुकसान हो चुका था. यह केस राजस्थान में प्लास्टर ट्रीटमेंट की अनदेखी का बड़ा उदाहरण बना.
कुचामन सिटी में सिजेरियन के दौरान गॉज छोड़ा
हाल ही में कुचामन सिटी में एक महिला के सिजेरियन ऑपरेशन में डॉक्टरों ने गॉज (कपड़े का टुकड़ा) पेट में ही छोड़ दिया. महिला को लगातार दर्द और संक्रमण हुआ. जांच से लापरवाही उजागर हुई और मामला मीडिया में छाया रहा. ऐसे केस राजस्थान में आम हैं, जहां सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर सवाल उठते हैं. प्लास्टर या ऑपरेशन के बाद भी मरीज और परिजन दोनों को सतर्क रहना चाहिए. दर्द या सूजन दिखे तो तुरंत जांच करवाएं. ये लापरवाहियां न सिर्फ मरीज की जिंदगी खतरे में डालती है, बल्कि डॉक्टरों और अस्पतालों की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाती है.



