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पाली के किसानों के लिए अदरक की खेती: उन्नत किस्में व देखभाल टिप्स

पाली. सर्दियां शुरू होने के साथ ही चाय हो या फिर सब्जी, अदरक की डिमांड काफी हद तक बढ़ जाती है. ऐसे में अदरक एक ऐसी फसल है जिसे कम लागत में अच्छे मुनाफे के लिए उगाया जा सकता है. आप भी किसान हैं और अदरक की खेती कर बंपर पैदावार के जरिए अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो कुछ एग्रीकल्चर टिप्स हैं, जिन्हें अपनाकर आप अच्छी पैदावार कर सकते हैं. यही वजह है कि आज के समय में अदरक की खेती किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बन गई है. सही जलवायु, मिट्टी और देखभाल के साथ अदरक से अच्छी पैदावार हासिल की जा सकती है. यह न केवल ताजा रूप में, बल्कि सूखे रूप में भी अधिक मुनाफा देने वाली फसल है.

अगर आप जानते हैं कि बुवाई, सिंचाई, पलवार, निराई-गुड़ाई और कटाई सही समय पर कैसे करनी है, तो एक हेक्टेयर से 15–25 टन तक ताजा अदरक और सूखे उत्पादन में 20–25% तक आसानी से प्राप्त किया जा सकता है. यहां हम आपको मिट्टी के चयन से लेकर बीजोपचार, बुवाई विधि, सिंचाई, पलवार, खुदाई और भंडारण तक अदरक की खेती की जानकारी देंगे.

मिट्टी से लेकर अदरक फसल के लिए उन्नत किस्में

अदरक की फसल के लिए उन्नत किस्में जैसे सुप्रभा, सुरूचि, सुरभि, वर्दा, हिमगिरी, महिमा, रेजाता आदि उपलब्ध हैं. अदरक की खेती विभिन्न प्रकार की मिट्टी में की जा सकती है. लेकिन अदरक की खेती के लिए अच्छे जल निकास वाली, जीवांश युक्त दोमट या बलुई दोमट मिट्टी उपयुक्त रहती है.

बुवाई से पहले जरूर करें यह काम

अदरक की अच्छी खेती के लिए भूमि को गर्मी की शुरुआत में अच्छी गहरी जुताई करके मिट्टी भुरभुरी बना लेना चाहिए. अदरक का बीज प्रकंद होता है. बुवाई के लिए 2.5–5.0 सेमी लंबे, 20–25 ग्राम वजन वाले प्रकंद जिनमें कम से कम 2–3 अंकुरित आंखें हों, बोने के लिए उपयुक्त होते हैं. एक हेक्टेयर में बुवाई हेतु 15–20 क्विंटल प्रकंदों की आवश्यकता होती है. अदरक के बीज प्रकंद को बुवाई से पहले 30 मिनट तक मेंकोजेब 3 ग्राम/लीटर पानी के साथ उपचारित करें और फिर 3–4 घंटे छायादार जगह पर सुखाएं.

बुवाई के वक्त रखें यह ध्यान

वर्षा आधारित क्षेत्रों के लिए प्रकंदों की बुवाई हेतु 4 सेमी ऊंची, 1 मीटर चौड़ी तथा आवश्यकतानुसार लंबी क्यारियां तैयार करें. प्रकंदों को 15–20 सेमी की दूरी पर 3–4 सेमी की गहराई में बो दें. सिंचित क्षेत्रों में क्यारियां बनाकर उनमें 40 सेमी की दूरी पर मेड़ बना लें और 20–25 सेमी की दूरी पर 3–4 सेमी गहराई में प्रकंदों की बुवाई कर दें. बुवाई के समय पर्याप्त नमी होना जरूरी है। अंकुरण के बाद शीघ्र सिंचाई करें.

हरी और सूखी अदरक की बुवाई का सही समय

हरी और सूखी अदरक की बुवाई कर रहे हैं तो कुछ खास दिनों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है. हरी अदरक के लिए इसकी खुदाई बुवाई के 180 दिन बाद करें. सूखी अदरक के लिए बुवाई के 240–260 दिन बाद, जब पत्तियां पीली पड़ जाएं और धीरे-धीरे सूखने लगें, तब खुदाई करें.खुदाई करते समय ध्यान रखें कि प्रकंद फटने न पाए, पौधों को सावधानीपूर्वक फावड़े या कुदाली की सहायता से उखाड़कर प्रकंद को जड़ और मिट्टी से अलग कर लें. खुदाई के बाद प्रकंद को अच्छी तरह पानी से धोकर एक दिन के लिए धूप में सुखा लें, ताकि फसल अच्छी रहे.

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