नागौर में फसलों की सरकारी खरीद बंद…किसान बाजार के भरोसे लाचार, किसानों को बोली का भी इंतजार करना पड़ रहा

नागौर. जिले सहित पूरे मारवाड़ में इस बार किसान गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं, सरकार ने पहले खरीफ फसलों की सरकारी खरीद 1 नवंबर और फिर 10 नवंबर से शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन तारीख बीत जाने के बावजूद खरीद शुरू नहीं हो सकी है. ऐसे में लगातार बढ़ती आवक, प्लेटफॉर्म की कमी, बारिश से खराब हुई उपज और व्यापारियों द्वारा मनमाने दाम तय किए जाने से किसानों की स्थिति और खराब हो गई है. मेड़ता कृषि मंडी में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि आवक नियंत्रित करने के लिए एक दिन का अवकाश रखकर सिर्फ लोडिंग का काम करवाया जा रहा है, ताकि प्लेटफॉर्म खाली किया जा सके.
मूंग का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 8,768 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित है, लेकिन मंडी में किसानों को 3,000 से 8,000 रुपए तक के ही दाम मिल रहे हैं. कई किसानों का कहना है कि मूंग का वाजिब भाव 10,000 रुपए तक मिलना चाहिए था, मगर मजबूरी में उन्हें लागत से भी कम 3,000 से 5,000 रुपए में उपज बेचनी पड़ रही है. नागौर, जो राजस्थान के कुल मूंग उत्पादन में करीब 43% की हिस्सेदारी रखता है, सबसे ज्यादा कीमतों की गिरावट का सामना कर रहा है. कृषि विभाग पहले ही 4 लाख हेक्टेयर में बोई गई फसल में से 33% से 75% नुकसान का आकलन दे चुका है, लेकिन बावजूद इसके सरकारी खरीद में देरी ने किसानों की परेशानी और बढ़ा दी है.
मूंग उत्पादन की लागत इस बार 6,000 से ऊपर
किसानों का कहना है कि इस बार प्रशासनिक देरी और सरकारी उदासीनता के कारण उन्हें अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ रही है. उन्होंने मांग की कि बारिश से मूंग के रंग में आए बदलाव को देखते हुए खरीद मानकों में छूट दी जाए और एमएसपी पर खरीद तुरंत शुरू की जाए. किसानों का कहना है कि मूंग उत्पादन की लागत इस बार 6,000 से 7,000 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच चुकी है. बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और डीजल के दाम बढ़ने से उत्पादन खर्च कई गुना बढ़ गया है. ऐसे में 3,000 रुपए में उपज बेचनी पड़ना दोहरे नुकसान जैसा है पहले बारिश से फसल खराब और अब व्यापारी कम भाव दे रहे हैं.
बोली का इंतजार करना पड़ रहा
मंडी में बढ़ती आवक और प्लेटफॉर्म की कमी से अव्यवस्था चरम पर है, किसानों को कई-कई घंटे तुलाई और बोली का इंतजार करना पड़ रहा है. कई किसान मजबूरी में अपनी उपज सड़क किनारे खुले में डाल रहे हैं, जिससे नुकसान बढ़ रहा है. मंडी प्रशासन भीड़ कम करने के उपाय कर रहा है, लेकिन स्थिति लगातार चुनौतीपूर्ण बनी हुई है. किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद जल्द शुरू नहीं हुई तो हालात और बिगड़ेंगे और उनका सीजन पूरी तरह बर्बाद हो जाएगा.



