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उदयपुर में श्री महालक्ष्मी यज्ञ और भैरव आराधना का भव्य महोत्सव, श्रद्धालुओं ने लिया आध्यात्मिक अनुभव!

Last Updated:January 05, 2026, 18:11 IST

उदयपुर की पावन धरती पर श्री महालक्ष्मी कुंकुमार्चन यज्ञ के दौरान भक्तिमय माहौल देखने को मिला. कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु पूज्यपाद श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज की पावन निश्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने दीपदान कर भगवान भैरव और शिव की आराधना की. मंत्रों की गूंज, यज्ञाग्नि की लपटें और दीपों की रोशनी के बीच भक्तों ने आध्यात्मिक अनुभव का आनंद लिया. महोत्सव में शिव पुराण कथा, प्रसादी वितरण और महाराणा प्रताप की विशाल प्रतिकृति पर पुष्पांजलि जैसे कार्यक्रमों ने पूरे उदयपुर को भक्तिरस में सराबोर कर दिया.

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उदयपुर. शहर में इन दिनों भक्ति और आस्था का वातावरण बना हुआ है, श्री महालक्ष्मी कुंकुमार्चन यज्ञ पूजा साधना महामहोत्सव के तहत कृष्णगिरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु पूज्यपाद श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज की पावन निश्रा में हजारों श्रद्धालुओं ने दीपदान कर भगवान भैरव की आराधना की. यज्ञ परिसर में जैसे ही हजारों दीप एक साथ प्रज्ज्वलित हुए और गुरुजी के श्रीमुख से मंत्रोच्चार शुरू हुआ, पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया. श्रद्धालुओं का कहना था कि मंत्रों की गूंज, यज्ञाग्नि की लपटें और दीपों की रोशनी के बीच ऐसा लग रहा था मानो स्वयं भगवान भैरव भक्तों को आशीर्वाद देने आए हो.

समिति अध्यक्ष नानालाल बया और महामंत्री देवेन्द्र मेहता ने बताया कि गुरुजी ने करीब 25 मिनट तक लगातार भैरव मंत्रों का उच्चारण करवाया. यह साधना भैरव कृपा प्राप्ति के लिए करवाई गई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया. जगद्गुरु श्री वसंत विजयानन्द गिरी जी महाराज की पावन निश्रा में चल रहा श्री महालक्ष्मी कुंकुमार्चन यज्ञ दिन-प्रतिदिन और भव्य होता जा रहा है. हर दिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ रही है. यज्ञ के साथ-साथ शिव आराधना, मंत्र जाप और भोजन प्रसादी का आयोजन भी लगातार हो रहा है. हजारों लोग प्रतिदिन प्रसादी ग्रहण कर आध्यात्मिक लाभ ले रहे हैं.

एकलिंगजी के 77वें दीवान श्री लक्ष्यराजसिंह मेवाड़ भी रहे उपस्थित

श्री एकलिंगजी शिव पुराण कथा के सातवें दिन गुरुजी ने पुनीतवती के जीवन प्रसंग को सरल और भावपूर्ण शब्दों में समझाया. गुरुजी ने बताया कि कैसे पुनीतवती ने अपने पति के विरोध और दुखों के बावजूद शिव भक्ति का मार्ग नहीं छोड़ा. शिव की सच्ची आराधना से उन्हें ऐसा वरदान मिला कि स्वयं भगवान शिव ने उन्हें ‘मां’ कहकर पुकारा. गुरुजी ने कहा कि सच्ची भक्ति वही है, जिसमें न स्वार्थ हो और न अपेक्षा, बस पूर्ण समर्पण हो. कथा के दौरान मेवाड़ राजवंश के श्री जी हुजूर, एकलिंगजी के 77वें दीवान श्री लक्ष्यराजसिंह मेवाड़ भी उपस्थित रहे.

उन्होंने आसंदी पर विराजित गुरुजी से आशीर्वाद लिया और माल्यार्पण किया. गुरुजी ने श्री जी हुजूर को सर्वमंगल का आशीर्वाद देते हुए समृद्धि कलश भेंट किया. श्री जी हुजूर ने पूरे समय खड़े होकर कथा का श्रवण किया. कथा समाप्ति के बाद गुरुजी की निश्रा में श्री जी हुजूर ने महोत्सव परिसर में स्थापित महाराणा प्रताप की 25 फीट ऊंची विशाल प्रतिकृति पर पुष्पांजलि अर्पित की. इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे, यज्ञ, कथा और गुरुजी के आशीर्वाद से पूरा उदयपुर भक्तिरस में सराबोर नजर आया.

About the AuthorMonali Paul

Hello I am Monali, born and brought up in Jaipur. Working in media industry from last 9 years as an News presenter cum news editor. Came so far worked with media houses like First India News, Etv Bharat and NEW…और पढ़ें

Location :

Udaipur,Rajasthan

First Published :

January 05, 2026, 18:11 IST

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उदयपुर महालक्ष्मी यज्ञ में भक्ति, हजारों श्रद्धालु हुए शामिल

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