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ग्राउंड रिपोर्ट : सिंचाई के लिए पानी खरीदने की मजबूरी! बारिश के बाद भी दौसा में जल संकट, सरसों का भविष्य अधर में

Last Updated:November 29, 2025, 16:52 IST

Dausa Ground Report : दौसा जिले के आभानेरी क्षेत्र में बारिश के बावजूद जल प्रबंधन की कमजोरी से किसान कैलाश चंद्र सैनी और रामावतार जैसे लोग महंगे टैंकर से सिंचाई को मजबूर हैं, लागत बढ़ रही है.

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दौसा. जिले में इस बार बारिश सामान्य से बेहतर हुई थी और कई बांधों में पानी की अच्छी आवक भी दर्ज की गई थी, लेकिन इसके बावजूद आभानेरी क्षेत्र सहित आसपास के कई गांव अभी भी पानी की गंभीर कमी से जूझ रहे हैं. पेयजल और सिंचाई दोनों स्तरों पर संकट लगातार गहराता जा रहा है. हालात ऐसे हैं कि किसान अपनी सरसों की फसल को बचाने के लिए महंगे दामों पर पानी खरीदकर टैंकरों से सिंचाई कराने को मजबूर हैं. बारिश अच्छी होने के बावजूद गांवों में पानी की अनुपलब्धता ने ग्रामीणों और किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं. ऐसे में फसल बचाने के लिए किसानों के सामने खर्च बढ़ने की चुनौती खड़ी हो गई है.

आभानेरी निवासी किसान कैलाश चंद्र सैनी ने बताया कि पानी की कमी के कारण इस बार उनकी खेती पर संकट मंडरा रहा है. उन्होंने कहा कि सरसों की बुवाई भले समय पर कर दी गई थी, लेकिन नमी न होने के कारण फसल सूखने लगी है. मजबूरी में 600 रुपये प्रति टैंकर की दर से पानी खरीदकर फसल पर छिड़काव किया जा रहा है. कैलाश सैनी के अनुसार एक बीघा भूमि में 6 से 7 टैंकर पानी लगता है, जिससे लागत तेजी से बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि बुवाई के तुरंत बाद ही खेतों को पानी की आवश्यकता होती है और नमी न होने से सिंचाई अनिवार्य हो जाती है.

पानी की कमी से बढ़ी सिंचाई की लागतकैलाश सैनी ने बताया कि खेतों में नमी न होने से बुवाई के बाद पहली सिंचाई अत्यंत जरूरी हो जाती है. पहले दौर में टैंकर से पानी डालकर निराई-गुड़ाई का कार्य किया गया था, लेकिन अब फिर से सिंचाई की जरूरत है. पानी दूर-दूर से लाना पड़ता है, जिससे टैंकर का खर्च और बढ़ जाता है. किसानों का कहना है कि यदि समय पर सिंचाई न की जाए तो सरसों की फसल पूरी तरह खराब हो सकती है. ऐसे में फसल बचाने के लिए टैंकर मंगवाना मजबूरी बन चुका है.

किसान रामावतार ने भी कहा कि क्षेत्र में लंबे समय से पानी की कमी बनी हुई है. कई गांवों में पेयजल सप्लाई भी सुचारू नहीं है. पानी की कमी के चलते टैंकर मालिक गांवों में पानी पहुंचा रहे हैं और किसान 500 से 600 रुपये प्रति टैंकर की दर से पानी खरीद रहे हैं. इससे किसानों को कुछ राहत मिलती है, लेकिन लगातार बढ़ते खर्च से किसान आर्थिक रूप से कमजोर हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि बारिश पर निर्भर बुवाई अब पानी न मिलने से खतरे में है और कई किसानों की फसल सूखने लगी है.

जल प्रबंधन की कमजोरियों से बिगड़े हालातग्रामीणों का कहना है कि बारिश अच्छी होने के बावजूद गांवों तक पानी न पहुंच पाना जल प्रबंधन की कमजोरी को दर्शाता है. बांधों और जलाशयों में पानी उपलब्ध होने के बावजूद सिंचाई योजनाएं प्रभावी रूप से नहीं चल पा रही हैं. किसानों ने मांग की है कि गांवों में जल सप्लाई व्यवस्था दुरुस्त की जाए ताकि फसलें बच सकें और किसान आर्थिक संकट से उबर सकें. लगातार बढ़ता खर्च उनकी लागत को दोगुना कर रहा है. फसल के गिरते दाम और पानी की महंगाई ने किसानों की चिंताएं और भी बढ़ा दी हैं.

क्षेत्र में पानी की किल्लत का असर सिर्फ खेती तक सीमित नहीं है. कई गांवों में पेयजल की सप्लाई बाधित है, जिससे लोगों को पीने का पानी भी खरीदकर लाना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से पानी की समस्या बनी हुई है, लेकिन इस बार हालात और गंभीर होते जा रहे हैं. कुल मिलाकर, दौसा जिले के ग्रामीण इलाकों में पानी की कमी बड़ा संकट बन चुकी है. किसान दिन-रात मेहनत कर फसल बचाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन महंगे टैंकरों के कारण खेती की लागत लगातार बढ़ती जा रही है. ग्रामीणों और किसानों ने प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की है ताकि फसल का नुकसान और अधिक न बढ़े.About the AuthorAnand Pandey

नाम है आनंद पाण्डेय. सिद्धार्थनगर की मिट्टी में पले-बढ़े. पढ़ाई-लिखाई की नींव जवाहर नवोदय विद्यालय में रखी, फिर लखनऊ में आकर हिंदी और पॉलीटिकल साइंस में ग्रेजुएशन किया. लेकिन ज्ञान की भूख यहीं शांत नहीं हुई. कल…और पढ़ें

Location :

Dausa,Rajasthan

First Published :

November 29, 2025, 16:52 IST

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सिंचाई के लिए पानी टैंकर खरीदने की मजबूरी! बारिश के बाद भी दौसा में जल संकट

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