Guinea-Bissau coup | military takeover Guinea-Bissau: 50 फीसदी मुस्लिम आबादी वाले मुल्क में तख्तापलट, सत्ता पर सेना का कब्जा

बांग्लादेश के बाद एक और मुस्लिम बहुल मुल्क में तख्तापलट हो गया. पश्चिम अफ्रीकी मुल्क गिनी-बिसाऊ में सेना ने संसद पर धावा बोल दिया और राष्ट्रपति को गिरफ्तार कर लिया. इसके साथ ही सत्ता पर सेना काबिज हो गई है. सेना के एक गुट ने खुद को देश की सत्ता का पूर्ण नियंत्रण रखने वाला घोषित कर दिया. देश की राजनीति पहले ही चुनावी विवादों से तप रही थी और इसी बीच फायरिंग, धुआं, दहशत और अचानक लगाए गए कर्फ्यू ने हालात को और खतरनाक बना दिया.
सबसे बड़ा झटका तब लगा, जब खबर आई कि राष्ट्रपति उमरो सिसोको एम्बालो को सेना ने गिरफ्तार कर लिया है. यानी जिस देश में धर्म, समुदाय और जातीय समूह मिलकर रहते हैं, वह आज एक बार फिर सेना के बूट तले आ चुका है. गिनी-बिसाऊ में लगभग 45–50% मुस्लिम आबादी रहती है. जबकि 20–22% क्रिश्चियन और तकरीबन 30% अफ्रीकी और अन्य पारंपरिक धर्म के लोग रहते हैं. देश की पहचान सेक्युलर और मिश्रित है. लेकिन राजनीतिक अस्थिरता ने इसे वर्षों से असुरक्षित बनाए रखा है. 1974 में पुर्तगाल से आजादी के बाद से यहां कई बार तख्तापलट हो चुके हैं.
चुनावी नतीजों से पहले ही फट गया बारूद
रविवार को देश में राष्ट्रपति चुनाव हुए थे. नतीजे गुरुवार को आने थे, लेकिन इससे पहले ही माहौल जहरीला हो गया. दोनों टॉप उम्मीदवार मौजूदा राष्ट्रपति एम्बालो और उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी फर्नांडो डायस ने बिना सबूत के खुद को विजेता घोषित कर दिया. चुनाव की ईमानदारी पर विपक्ष और सिविल सोसाइटी पहले ही सवाल उठा रहे थे, क्योंकि देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी PAIGC को उम्मीदवार खड़ा करने से रोक दिया गया था. यानी तनाव बढ़ रहा था और सेना ने उसी मौके को पकड़कर कदम बढ़ा दिया.
सेना का ऐलान-देश पर हमारा पूरा कंट्रोल
बुधवार दोपहर गिनी-बिसाऊ की राजधानी बिसाऊ में अचानक गोलियों की आवाजें तेज हुईं. फायरिंग की आवाजें चुनाव आयोग के दफ्तर, राष्ट्रपति भवन और गृह मंत्रालय के आसपास एक साथ सुनाई दीं. कुछ ही देर बाद टीवी पर सेना के अफसरों का एक समूह प्रकट हुआ. उन्होंने खुद को कहा, व्यवस्था बहाल करने के लिए सेना ने कमान अपने हाथ में ले ली है. इन अफसरों ने तीन बड़े ऐलान किए. चुनावी प्रक्रिया को अगले आदेश तक निलंबित किया जाता है. देश की जमीन–हवा–समुद्र सभी सीमाओं को बंद किया जाता है. रात का कर्फ्यू तुरंत लागू. यह असल में सीधे-सीधे सत्ता पर कब्जे का ऐलान था.
राष्ट्रपति और विपक्ष के नेता दोनों गिरफ्तार
अल जज़ीरा ने पुष्टि की कि सेना ने राष्ट्रपति एम्बालो को गिरफ्तार कर लिया है. केवल इतना ही नहीं, मुख्य विपक्षी नेता डोमिंगोस सिमोएस पेरेइरा को भी हिरासत में ले लिया गया. देश में इंटरनेट बंद करने की कोशिशें भी शुरू हो गईं. सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि तख्तापलट की अगुवाई कर रहा अफसर डेनिस एन’काना, वही व्यक्ति है जो राष्ट्रपति का सुरक्षा प्रमुख था. यानी राष्ट्रपति को उसी व्यक्ति ने पकड़ा, जिसे उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी.
क्यों सेना ने सत्ता हथियाई?
विशेषज्ञों की मानें तो यह तख्ता पलट राजनीतिक अराजकता और चुनावी विवादों का नतीजा है. चुनाव पारदर्शी नहीं बताया जा रहा था. दोनों उम्मीदवार पहले ही जीत का दावा कर चुके थे. विपक्ष पहले ही भड़क चुका था और PAIGC को चुनाव लड़ने नहीं दिया गया था. यानी देश में एक बार फिर विजेता कौन? का संकट खड़ा हो गया था. सेना ने ठीक इसी मौके पर कदम उठाया. गौर करने वाली बात यह है कि 2019 के चुनाव में भी यही हुआ था. तभी भी दोनों बड़े उम्मीदवारों ने खुद को विजेता बताया था और चार महीने तक राजनीतिक संकट चला था.



