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प्रदूषण से फूल रही सांसें, गुलेरिया बोले- बच्‍चों-बुजुर्गों को ना निकलने दें बाहर, हवा में घुला जहर

Last Updated:November 24, 2025, 23:48 IST

Delhi Pollution Health Tips: दिल्ली–एनसीआर में प्रदूषण का स्तर खतरनाक हो गया है. पूर्व एम्स डायरेक्टर डॉ. रंदीप गुलरिया ने चेताया कि दिल, गुर्दे के मरीज, बुजुर्ग और बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हैं. सांस लेने में कठिनाई, खांसी और रात को छाती टाइट होना आम समस्या बन गई है. प्रदूषण बढ़ने पर इमरजेंसी विज़िट में वृद्धि होती है. मास्क पहनें और अनावश्यक बाहर न निकलें.प्रदूषण से फूली सांसें, गुलेरिया बोले- बच्‍चों-बुजुर्गों को ना निकलने दें बाहरप्रदूषण से हालात बेकाबू हो गए हैं.

दिल्ली–एनसीआर में प्रदूषण की स्थिति दिन-ब-दिन बद से बदतर होती जा रही है. गैस चैंबर जैसी स्थिति को देखते सरकारी और प्राइवेट दफ्तरों में केवल 50 प्रतिशत कर्मचारियों को आने की इजाजत दी गई है. बाकी लोगों को वर्क फ्रॉम होम मोड पर ही काम करना होगा. इसी बीच पूर्व एम्स डायरेक्टर डॉ. रंदीप गुलरिया ने चेतावनी दी है कि हालिया एक्यूआई (AQI) स्तर स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो चुका है. उनके मुताबिक विशेष रूप से दिल और गुर्दे से संबंधित बीमारियों वाले लोग, बुजुर्ग और छोटे बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं.

डॉ. गुलरिया ने न्‍यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान कहा कि प्रदूषण के बढ़ने के कारण लोगों को सबसे ज्यादा छाती में असुविधा और सांस लेने में परेशानी महसूस हो रही है. खांसी की समस्या और रात को छाती का टाइट होना आम तौर पर दिखाई दे रहा है. अस्थमा के मरीजों के लिए स्थिति और भी गंभीर हो गई है. उन्होंने चेताया कि ऐसे समय में हार्ट फेल्यर की घटनाओं में वृद्धि होने की संभावना रहती है.

एम्स में पिछले अध्ययनों के अनुभव के अनुसार जब भी दिल्ली में प्रदूषण की मात्रा बढ़ती है उसके अगले चार से छह दिनों में अस्पतालों में इमरजेंसी विजिट में वृद्धि दर्ज की जाती है. विशेषकर छोटे बच्चों और युवाओं में सांस की तकलीफ के मामले ज्यादा देखने को मिलते हैं. डॉक्टर्स को ऐसे मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है. डॉ. गुलरिया ने लोगों को सलाह दी है कि इस समय घर से अनावश्यक बाहर निकलने से बचें और अगर बाहर निकलना जरूरी हो तो मास्क का उपयोग करें. शारीरिक गतिविधियों को कम करें और बच्चों को स्कूल जाते समय विशेष सावधानी बरतें.

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदूषण की यह समस्या केवल मौसम या वाहनों की वजह से नहीं है बल्कि औद्योगिक धुएं और निर्माण गतिविधियों के कारण भी दिल्ली की हवा लगातार जहरीली होती जा रही है. अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले सालों में स्वास्थ्य पर इसका और गंभीर असर पड़ सकता है. डॉ. गुलरिया ने अंत में चेताया कि दिल्लीवासियों को अभी से सतर्क होना होगा. शहरी आबादी, खासकर संवेदनशील समूह जैसे बुजुर्ग, बच्चे और पहले से बीमार लोग, इस प्रदूषण के प्रकोप से सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे. उन्होंने कहा कि प्रशासन और आम नागरिक दोनों को मिलकर इस स्वास्थ्य संकट से निपटने के उपाय करने होंगे.

Sandeep Gupta

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें

पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्‍त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्‍कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और… और पढ़ें

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November 24, 2025, 23:12 IST

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प्रदूषण से फूली सांसें, गुलेरिया बोले- बच्‍चों-बुजुर्गों को ना निकलने दें बाहर

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