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Harold Holt Death Mystery: Australian Prime Minister Disappeared On 17 December 1967, What Happened That Day | 17 दिसंबर 1967 की वो काली सुबह, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री हेरोल्ड होल्ट की ‘जल समाधि’ का राज जो कभी नहीं खुला

नई दिल्ली: तारीख थी 17 दिसंबर, 1967. जगह थी ऑस्ट्रेलिया का विक्टोरिया प्रांत. एक देश का प्रधानमंत्री अपने दोस्तों के साथ समुद्र किनारे पिकनिक मनाने गया था. वह पानी में उतरा, कुछ दूर तैरा और फिर अचानक गायब हो गया. न कोई चीख सुनाई दी, न कोई संघर्ष दिखा. बस एक इंसान हवा की तरह गायब हो गया. यह कहानी किसी फिल्म की नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री हेरोल्ड होल्ट की है. आज 58 साल बाद भी यह दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक और रहस्यमय घटनाओं में से एक है. एक ऐसा पीएम जिसका शव आज तक नहीं मिला. क्या उन्हें समुद्र निगल गया? या उन्हें किसी पनडुब्बी ने किडनैप कर लिया? आइए जानते हैं इस खौफनाक घटना का पूरा सच.

खराब मौसम और पीएम की वो जिद

हेरोल्ड होल्ट को तैराकी का बहुत शौक था. वह समुद्र से बेहद प्यार करते थे. उस रविवार को वे अपने दोस्तों के साथ ‘चेवियट बीच’ (Cheviot Beach) पर गए थे. मौसम बहुत खराब था. समुद्र में ऊंची लहरें उठ रही थीं. पानी का बहाव बहुत तेज था. जिसे ‘रिप करंट’ कहा जाता है, वह अपने चरम पर था.

उनके साथियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की. लेकिन होल्ट को अपनी तैराकी पर बहुत भरोसा था. वे नहीं माने और पानी में उतर गए. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वे लहरों के बीच तेजी से आगे बढ़ रहे थे. लेकिन अचानक पानी के एक बड़े बुलबुले और झाग ने उन्हें घेर लिया. देखते ही देखते वे नजरों से ओझल हो गए. उनके दोस्तों को लगा कि वे मजाक कर रहे हैं या तैर रहे हैं. लेकिन जब काफी देर तक वे ऊपर नहीं आए, तब हड़कंप मच गया. ऑस्ट्रेलिया का प्रधानमंत्री समुद्र में समा चुका था.

इतिहास का सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन

खबर मिलते ही पूरा देश सन्न रह गया. सरकार ने तुरंत अब तक का सबसे बड़ा सर्च ऑपरेशन शुरू किया. रॉयल ऑस्ट्रेलियाई नेवी, एयर फोर्स और पुलिस के सैकड़ों जवान काम पर लगा दिए गए. गोताखोरों ने समुद्र का कोना-कोना छान मारा. हेलीकॉप्टर आसमान से नजर रख रहे थे.

कई दिनों तक यह अभियान चला. लेकिन हैरानी की बात यह थी कि पीएम का कोई नामोनिशान नहीं मिला. न उनकी लाश मिली, न उनके कपड़े, न ही कोई और सुराग. ऐसा लग रहा था जैसे समुद्र ने उन्हें पूरी तरह से मिटा दिया हो. अंत में सरकार ने इसे एक दुर्घटना मान लिया. कहा गया कि तेज लहरों ने उन्हें खींच लिया और उनकी डूबने से मौत हो गई.

समुद्र में तैरते हुए हेरोल्ड होल्ट के गायब होने की खौफनाक दास्तां. (Photo : National Museum of Australia)

चीनी पनडुब्बी और जासूसी की थ्योरी

भले ही सरकार ने इसे हादसा मान लिया हो, लेकिन दुनिया मानने को तैयार नहीं थी. शव न मिलने के कारण कई ‘कॉन्स्पिरेसी थ्योरीज’ (Conspiracy Theories) ने जन्म लिया. इसमें सबसे मशहूर और सनसनीखेज थ्योरी थी- ‘चीनी जासूसी’ की.

ब्रिटिश पत्रकार एंथनी ग्रे ने अपनी किताब ‘द प्राइम मिनिस्टर वॉज अ स्पाई’ में दावा किया कि हेरोल्ड होल्ट चीन के लिए जासूसी करते थे. इस थ्योरी के मुताबिक, होल्ट डूबे नहीं थे. बल्कि उन्हें लेने के लिए एक चीनी पनडुब्बी वहां पहले से मौजूद थी. वे तैरते हुए पनडुब्बी तक गए और चीन भाग गए. हालांकि, इस दावे का कभी कोई ठोस सबूत नहीं मिला. होल्ट की पत्नी और दोस्तों ने इसे बकवास बताया. लेकिन यह कहानी आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय है.

आत्महत्या या सीआईए की साजिश?

एक और थ्योरी यह थी कि होल्ट डिप्रेशन में थे. उस वक्त वियतनाम युद्ध चल रहा था और ऑस्ट्रेलिया पर दबाव था. कहा गया कि राजनीतिक दबाव और निजी तनाव के चलते उन्होंने खुदकुशी कर ली. कुछ लोगों ने तो यहां तक कहा कि इसमें अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) का हाथ था, क्योंकि होल्ट वियतनाम युद्ध से ऑस्ट्रेलिया को बाहर निकालना चाहते थे.

हालांकि, 2005 में हुई एक न्यायिक जांच (Inquest) ने इन सभी थ्योरियों को खारिज कर दिया. कोरोनर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि होल्ट ने अपनी क्षमताओं पर बहुत ज्यादा भरोसा किया. खराब मौसम और खतरनाक जगह पर तैरना उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी गलती साबित हुई.

लाश मिली न सुराग! क्या अपनी ही मर्जी से गायब हुए थे हेरोल्ड होल्ट? (Photo : Parliament of Australia)

एक रहस्य जो कभी नहीं सुलझा

हेरोल्ड होल्ट की मौत आज भी एक पहेली है. एक शक्तिशाली देश का प्रमुख, जिसके पास सुरक्षा का पूरा तामझाम था, वह ऐसे कैसे गायब हो सकता है? उनकी याद में ऑस्ट्रेलिया में एक स्विमिंग सेंटर का नाम ‘हेरोल्ड होल्ट स्विमिंग सेंटर’ रखा गया. यह अपने आप में एक विडंबना है कि जिस इंसान की मौत डूबने से हुई, उसके नाम पर तैराकी का केंद्र है.

आज भी जब लोग चेवियट बीच पर जाते हैं, तो उन्हें 17 दिसंबर 1967 का वह दिन याद आता है. समुद्र की लहरें आज भी वही शोर मचाती हैं, लेकिन अपने अंदर दफन उस राज को कभी बाहर नहीं आने देतीं.

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