Harsh Temple: The Shiva temple which was destroyed by Aurangzeb’s army has now become a tourist spot, this place is near Khatushyam ji

Last Updated:February 16, 2025, 13:12 IST
राजस्थान के सीकर जिला मुख्यालय से 14 किलोमीटर दूर हर्ष पर्वत है. यह पर्वत अपनी ऊंचाई और चोटी पर बने भगवान शिव और भैरव नाथ के मंदिर के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. हर्ष पर्वत की ऊंचाई लगभग 3100 फीट है.X
3100 फीट ऊंचे पर्वत पर बना है हर्ष पर्वत
राजस्थान के सीकर जिला मुख्यालय से 14 किलोमीटर दूर हर्ष पर्वत है. यह पर्वत अपनी ऊंचाई और चोटी पर बने भगवान शिव और भैरव नाथ के मंदिर के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है. हर्ष पर्वत की ऊंचाई लगभग 3100 फीट है. यह प्रदेश में माउंट आबू के बाद दूसरा सबसे ऊंचा पर्वत माना जाता है. यहां पर 1018 में चौहान राजा सिंह राज ने हर्ष नगरी और हर्षनाथ मंदिर की स्थापना करवाई थी.
इन मंदिरों के अवशेषों पर मिला एक शिलालेख बताता है कि यहां कुल 84 मंदिर थे. अभी यहां सभी मंदिर खंडहर अवस्था में हैं, जो पहले विशाल और बहुत सुंदर थे. इस मंदिर को 1679 ई. में मुगल बादशाह औरंगजेब के निर्देश पर मंदिर तोड़ो नीति के तहत उसके सेनापति खान जहान बहादुर और उसकी सेना ने इस मंदिर को पूरा तोड़ दिया है था. अभी, केवल इस मंदिर के अवशेष मिलते हैं. इतिहास और धार्मिक दोनों दृष्टि से यह मंदिर बहुत विशेष है.
विंड एनर्जी हब भी बना हर्ष पर्वत पर पवन चक्कियां लगाई गई हैं. कई फीट ऊंचाई पर लगे पंखे वायु वेग से घूमकर बिजली बनाते हैं. यहां पर साल 2004 में 7.2 मेगावाट की पवन विद्युत परियोजना शुरू की गई थी. यहां पवन को ऊर्जा में परिवर्तित करने वाले टावर लगे हैं. यहां उत्पन्न होने वाली विद्युत ऊर्जा फिलहाल विद्युत निगम विभिन्न गांव-ढाणियों में सप्लाई करता है.
पर्यटकों की संख्या बढ़ रही 3100 फीट ऊंचे पर्वत पर जाने के लिए पक्की सड़क बनाई गई है. इससे पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है. हर्ष पर्वत का सन सेट देखने के लिए दूर दूर से लोग आते हैं. लोग राइडिंग के लिए भी काफी लोग यह पर आते हैं. पर्वत पर पहुंचने पर प्रकृति का सुंदर नजारा भी यहां से दिखता है. खाटूश्याम जी से 45 किलोमीटर दूर यह टूरिस्ट पॉइंट बना हुआ है.
Location :
Sikar,Rajasthan
First Published :
February 16, 2025, 13:12 IST
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इन मंदिरों के अवशेषों पर मिला एक शिलालेख बताता है कि यहां कुल 84 मंदिर थे. अभी यहां सभी मंदिर खंडहर अवस्था में हैं, जो पहले विशाल और बहुत सुंदर थे