Health Benefits of Motha Grass (Nut Grass / Cyperus Rotundus)

Last Updated:November 12, 2025, 09:19 IST
Health Benefits of Motha Grass: खेतों में उगने वाली मोथा घास दिखने में भले साधारण लगे, लेकिन इसके औषधीय गुण चमत्कारी हैं. यह खाँसी, बुखार, त्वचा रोग और पाचन विकार में असरदार है. आयुर्वेद में इसे प्राकृतिक औषधि के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, जो शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाती है और त्रिदोष को संतुलित करती है.

सीकर. हमारे आसपास ऐसे बहुत सारे पौधे होते हैं, जो किसी औषधीय खजाने से कम नहीं होते हैं. लेकिन, जानकारी के अभाव में हम उन्हें खरपतवार समझ कर फेंक देते हैं. ऐसा ही मानव शरीर के लिए बहुत फायदेमंद पौधा है मोथा घास. यह एक आम सा दिखने वाला घास प्रजाति का पौधा है और यह खरपतवार के रूप में उगती है. सबसे अधिक यह किसानों के खेतों में उगता है. दिखने में यह पौधा बहुत साधारण सा लगता है, लेकिन इसका उपयोग आयुर्वेद में किया जाता है. इसके उपयोग से अनेक बीमारियों का इलाज किया जाता है, वहीं, इसकी दवाइयाँ भी बनाई जाती हैं.

आज के हेल्थ स्पेशल में, हम आपको इसी मोथा घास के औषधीय गुणों के बारे में बता रहे हैं. आयुर्वेदिक डॉक्टर किशन लाल के अनुसार, मुख्य रूप से मोथा घास का उपयोग खाँसी, उल्टी और बुखार में किया जाता है. पुराने समय में घरेलू नुस्खों में इस औषधि का उपयोग बुजुर्ग करते थे. इसके अलावा, यह आँखों की बीमारियों में भी कारगर औषधि है. उन्होंने बताया कि पुराने समय में इस घास का उपयोग नशा उतारने के लिए भी किया जाता था. इसका उपयोग आमतौर पर काढ़ा बनाकर किया जाता है, जिससे इसके औषधीय गुण शरीर को आसानी से मिल सकें.

यह खास प्रकार की घास खेती में लगातार नमी रहने के बाद उगती है. फसल बुवाई के बाद जब सिंचाई की जाती है, तब खरपतवार के साथ यह मोथा घास भी उगती है. बहुत से किसान इस घास की जड़ को तोड़कर सुखा लेते हैं, इसके बाद इसका पाउडर बनाकर इसका नियमित उपयोग भी करते हैं. किसानों के अनुसार, मोथा घास के इस नुस्खे से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है, जिससे वे दिनभर खेत में काम कर पाते हैं. वहीं, आयुर्वेदिक डॉक्टर के अनुसार मोथा घास का औषधीय महत्व इतना अधिक है कि इसे स्वास्थ्यवर्धक और मानसिक शक्ति बढ़ाने वाली जड़ी-बूटी कहा जाता है.

आपको बता दें कि, मोथा घास में केवल इसके कंद का उपयोग ही औषधीय उपयोग में किया जाता है. यानी जमीन के अंदर उगने वाली जड़ ही उपयोगी औषधि है, जबकि बाकी पत्तियाँ दुधारू पशुओं के लिए फायदेमंद हैं. आयुर्वेदिक डॉक्टर किशन लाल ने बताया कि इसकी कंद का उपयोग पाचन शक्ति बढ़ाने, गैस, दस्त और भूख न लगने की समस्याओं में किया जाता है. यह शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालकर रक्त को शुद्ध करती है. इसके अलावा, यह बुखार और शरीर की गर्मी में भी लाभकारी मानी जाती है. इस प्रकार, मोथा घास का कंद कई आंतरिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए एक प्रभावी प्राकृतिक उपचार है.

इसके अलावा, इसकी कंद का लेप त्वचा रोगों में भी फायदेमंद है. यह खुजली और एलर्जी को ठीक करने में सहायक है. इसके नियमित उपयोग से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है और मानसिक तनाव तथा अनिद्रा जैसी समस्याओं में भी लाभ मिलता है. इसके उपयोग से अनेकों आयुर्वेदिक दवाएं भी बनती हैं. आयुर्वेदिक हॉस्पिटलों और दवा केंद्रों पर आसानी से इस खास औषधीय पौधे से बनी दवाएं खरीदी जा सकती हैं, जो इसके व्यापक स्वास्थ्य लाभों को प्रमाणित करती हैं.

ऐसे में मोथा घास कई बीमारियों में रामबाण औषधि से कम नहीं है. अब धीरे-धीरे इसका उपयोग भी बढ़ने लगा है. इस घासनुमा औषधि की खास बात ये है कि इसके उपयोग से शरीर को किसी तरीके का साइड इफेक्ट नहीं होता है, बल्कि रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है. कई स्थानीय वैद्य अपनी अलग-अलग विधि का उपयोग करके इस औषधि से आयुर्वेदिक दवा बनाते हैं. यह प्रमाणित करता है कि मोथा घास एक सुरक्षित, प्राकृतिक और बहुउपयोगी जड़ी-बूटी है जो शरीर को लाभ पहुँचाती है.
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November 12, 2025, 09:19 IST
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खांसी, बुखार और त्वचा रोग का रामबाण इलाज, खेतों की ये घास भी कर सकती है काम…



