धरोहर : इस जगह पर परशुराम ने सहस्त्रबाहु अर्जुन से युद्ध कर छुड़वाई थी अपने पिता की कामधेनु गाय, आज विराजमान हैं जाबेजी महादेव

Last Updated:November 29, 2025, 20:24 IST
धरोहर : जिले के इस ऐतिहासिक मंदिर के स्थान पर यहां भ्रगु ऋषि के वंशज परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि का आश्रम हुआ करता था. आज यह स्थान जाबेजी या जाबेश्वर महादेव के रूप में पहचाना जाता हैं. मुख्य मंदिर में जमदग्नि ऋषि की प्रतिमा और शिवलिंग विराजमान हैं इसके अलावा यहां जमदग्नि के पुत्र भगवान परशुराम का मंदिर भी है. परिसर में बने जलकुंडके बीच भगवान शिव स्थापित है
सिरोही : भगवान परशुराम के पिता ऋषि जमदग्नि की तपोस्थली माने जाने वाले वासा गांव के जाबेश्वर महादेव मंदिर में हर वर्ष हजारों भक्त यहां पहुंचते हैं. जिले के इस ऐतिहासिक मंदिर के स्थान पर यहां भ्रगु ऋषि के वंशज परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि का आश्रम हुआ करता था. आज यह स्थान जाबेजी या जाबेश्वर महादेव के रूप में पहचाना जाता हैं. मुख्य मंदिर में जमदग्नि ऋषि की प्रतिमा और शिवलिंग विराजमान हैं इसके अलावा यहां जमदग्नि के पुत्र भगवान परशुराम का मंदिर भी है. मंदिर परिसर में बने जलकुंडके बीच भगवान शिव की मूर्ति स्थापित हैं. मंदिर परिसर में एक गौशाला, धर्मशाला व भोजनशाला भी बनी हुई हैं.
वासा गांव से करीब 1.5 किलोमीटर दूर स्थित इस मंदिर के आगे बने कुंड को लेकर भी काफी मान्यता है. इस कुंड को मंदाकिनी कुंड के नाम से जाना जाता हैं. इस कुंड में बिना किसी मोटर या हिटर के के प्राकृतिक रूप से गर्म पानी आता हैं. जो भक्तों में आकर्षण का केंद्र हैं. पास में एक तालाब में काफी संख्या में कमल के फूल खिलते हैं. इस मंदिर को कई समाजों के लोग कुलदेवता मानते हैं. यहां लोग मन्नत करने आते हैं और मन्नत पूरी होने पर प्रसादी का आयोजन करते हैं. मुंडन, धोक देने समेत अन्य रस्मों के लिए सामाजिक आयोजन भी करवाते हैं.
मंदिर को लेकर प्रसिद्ध हैं ये किंवदतिसेवानिवृत प्रधानाचार्य और रोहिड़ा गांव निवासी भक्त राजेश दवे ने बताया कि मंदिर को लेकर एक कथा प्रसिद्ध हैं. जिसके अनुसार एक बार राजा सहस्त्रबाहु अर्जुन अपनी सेना के साथ यहां रुके थे. पूरी सेना को यहां भरपेट खाना मिलने पर सहस्त्रबाहु अर्जुन को आश्चर्य हुआ कि घने जंगल में बने छोटे से आश्रम में पूरी सेना को भोजन कैसे मिला. यहां कामधेनु नंदिनी गाय का पता लगने पर सहस्त्रबाहु अर्जुन के मन में लालच आया और उन्होंने ऋषि से गायें मांग ली. ऋषि के मना करने पर राजा बलपूर्वक गायों को अपनी सेना के साथ ले जाने लगे. इसके बारे में ऋषि के पुत्र परशुराम को पता लगने पर उन्होंने सहस्त्रबाहु के साथ युद्ध किया और और गायों को मुक्त करवाकर पुनः आश्रम में लेकर आए.
About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal
रुपेश कुमार जायसवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस और इंग्लिश में बीए किया है. टीवी और रेडियो जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं. फिलहाल नेटवर्क18 से जुड़े हैं. खाली समय में उन…और पढ़ें
Location :
Sirohi,Rajasthan
First Published :
November 29, 2025, 20:23 IST
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जहां परशुराम ने बचाई कामधेनु, वहीं विराजमान हैं जाबेजी महादेव



