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धरोहर : 17वीं सदी की खतरनाक बंदूकें! चकमक पत्थर से फायर, भरतपुर म्यूजियम में छिपा युद्ध तकनीक का बड़ा रहस्य

Last Updated:January 08, 2026, 17:15 IST

Dharohar : भरतपुर का ऐतिहासिक संग्रहालय अपनी भव्य इमारत के साथ-साथ 17वीं शताब्दी की दुर्लभ बंदूकों के लिए भी देशभर में चर्चित है. यहां संरक्षित चकमक पत्थर से चलने वाली अनोखी बंदूक उस दौर की उन्नत युद्ध तकनीक और शिल्पकला का जीवंत प्रमाण है, जिसे देखने देश-विदेश से पर्यटक पहुंच रहे हैं.

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भरतपुर : भरतपुर का ऐतिहासिक संग्रहालय न केवल अपनी स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहां संरक्षित प्राचीन हथियार भी इतिहास प्रेमियों के लिए आकर्षण का बड़ा केंद्र है. संग्रहालय में 17वीं शताब्दी की दुर्लभ और प्राचीन बंदूकों का एक अनमोल संग्रह सुरक्षित रखा गया है जो उस दौर की उन्नत हथियार तकनीक और शिल्पकला की झलक प्रस्तुत करता है. इनमें एक विशेष प्रकार की चकमक पत्थर से चलने वाली बंदूक पर्यटकों के बीच सबसे अधिक चर्चा का विषय बनी हुई है.

यह बंदूक अपने समय की अत्याधुनिक तकनीक का उदाहरण मानी जाती है. संग्रहालय अधिकारियों के अनुसार इस बंदूक में आधुनिक ट्रिगर प्रणाली नहीं थी बल्कि ट्रिगर के स्थान पर चकमक पत्थर का उपयोग किया गया था जैसे ही इसे दबाया जाता था चकमक पत्थर सामने लगी लोहे की कटोरी से टकराता था. जिससे तेज चिंगारी उत्पन्न होती थी यही चिंगारी बंदूक की नाल में भरी बारूद को सुलगाने का काम करती थी और इसके बाद बंदूक से फायर होता था उस समय यह तकनीक युद्ध और सुरक्षा के लिहाज से बेहद प्रभावी मानी जाती थी.

17वीं सदी की बंदूकेंइस अनोखी बंदूक का निर्माण 17वीं शताब्दी के आसपास किया गया था और इसका उपयोग उस काल में शासकों और सेनाओं द्वारा किया जाता था यह बंदूक न केवल हथियार के रूप में बल्कि उस समय की धातुकला और तकनीकी ज्ञान का भी प्रमाण है. भरतपुर संग्रहालय के अधिकारी राजन सिंह ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि भरतपुर म्यूजियम में बंदूकों का जो संग्रह है, वह पूरे भारत में बेहद दुर्लभ माना जाता है. उन्होंने कहा कि ऐसी चकमक पत्थर से चलने वाली बंदूकें देश के बहुत ही कम संग्रहालयों में देखने को मिलती हैं.

भरतपुर में छिपा है बंदूकों का रहस्य!यह संग्रह न केवल इतिहासकारों बल्कि आम दर्शकों के लिए भी काफी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. राजन सिंह ने आगे बताया कि भरतपुर संग्रहालय में संजोई गई ये ऐतिहासिक बंदूकें आज भी अपनी बनावट और कार्यप्रणाली के कारण लोगों को आश्चर्यचकित कर देती हैं. इन्हें देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी बड़ी संख्या में पर्यटक यहां पहुंचते हैं. यह संग्रह भरतपुर के गौरवशाली इतिहास और उसकी समृद्ध विरासत को जीवंत रूप में दर्शाता है.

About the AuthorRupesh Kumar Jaiswal

A Delhi University graduate with a postgraduate Diploma in Journalism and Mass Communication, I work as a Content Editor with the Rajasthan team at India Digital. I’m driven by the idea of turning raw in…और पढ़ें

Location :

Bharatpur,Rajasthan

First Published :

January 08, 2026, 17:15 IST

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जानें भरतपुर संग्रहालय की 17वीं सदी की दुर्लभ बंदूकें और उनका महत्व

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