Rajasthan

धरोहर: कहां है यह मंदिर जहां गणेश जी ‘खड़े होकर’ देते हैं आशीर्वाद? भारत में सिर्फ यहीं मिलती है ऐसी प्रतिमा

कोटा. राजस्थान अपनी सांस्कृतिक धरोहर और धार्मिक मान्यताओं के लिए विश्वभर में जाना जाता है. इन्हीं अनोखे धार्मिक स्थलों में से एक है—कोटा का प्रसिद्ध खड़े गणेश जी मंदिर. जो अपनी अद्वितीय प्रतिमा और प्राचीन परंपराओं के लिए जाना जाता है.

चंबल नदी के किनारे स्थित यह मंदिर 600 साल से अधिक पुराना बताया जाता है और यहाँ भगवान गणेश जी की खड़ी मुद्रा में स्थापित प्रतिमा पूरे देश में बेहद दुर्लभ मानी जाती है. इस मंदिर का इतिहास और यहाँ की मान्यताएं इसे भक्तों और पर्यटकों के बीच विशेष स्थान दिलाती हैं.

यहाँ स्थापित गणेश जी की प्रतिमा लगभग 500 वर्ष पुरानी है. जिसकी खड़ी मुद्रा भक्तों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है. आमतौर पर भगवान गणेश की प्रतिमा बैठी हुई या लेटी हुई मुद्रा में होती है. लेकिन यह दुर्लभ खड़ी प्रतिमा इस मंदिर को अद्वितीय बनाती है.

आसपास स्थित एक पवित्र कुंड और ‘गणेश उद्यान’ मंदिर की सुंदरता को और बढ़ा देते हैं. उद्यान में बड़ी संख्या में मोरों का दिखाई देना यहाँ आने वाले हर व्यक्ति को प्राकृतिक सौंदर्य का एक अद्भुत अनुभव कराता है. शांत और मनमोहक वातावरण भक्तों को आध्यात्मिकता की गहरी अनुभूति प्रदान करता है.

बुधवार का विशेष आयोजन—भंडारे में उमड़ती भीड़मंदिर में हर बुधवार को विशेष भंडारे का आयोजन होता है. बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है. इसलिए इस दिन यहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक श्रद्धालुओं को प्रसाद रूपी भोजन दिया जाता है.

धार्मिक कार्यक्रमों और भंडारे की यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है. जिससे स्थानीय लोगों की आस्था और भी गहरी हुई है. भंडारे का यह आयोजन सामुदायिक सद्भाव और सेवा भाव का प्रतीक है.

उलटे और सीधे स्वास्तिक की अनोखी परंपरामंदिर से जुड़ी एक मान्यता इसे और भी रहस्यमयी और चमत्कारिक बनाती है. यहाँ उलटे–सीधे स्वास्तिक की एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है.

उलटा स्वास्तिक. यदि किसी भक्त की कोई इच्छा या मनोकामना अधूरी होती है. तो वह मंदिर में उलटा स्वास्तिक बनाकर भगवान गणेश जी से प्रार्थना करता है. यह उनके अटूट विश्वास को दर्शाता है.
सीधा स्वास्तिक. मनोकामना पूरी होने पर भक्त वापस मंदिर आता है. सीधा स्वास्तिक बनाता है और भगवान गणेश जी के चरणों में धोक लगाकर आभार व्यक्त करता है तथा आशीर्वाद ग्रहण करता है.

इस अनोखी और चमत्कारिक परंपरा के कारण यह मंदिर ‘मनोकामना पूर्ण करने वाले धाम’ के रूप में भी प्रसिद्ध है.

पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षणचंबल नदी की ठंडी हवा. मोरों की चहचहाहट. उद्यान की हरियाली और मंदिर की दिव्यता—इन सभी का मिश्रण इस स्थान को आध्यात्मिक और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम बनाता है.

गणेश चतुर्थी के समय यहाँ विशाल आयोजन होते हैं. जिनमें देश-विदेश से भक्त शामिल होते हैं. कोटा घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए खड़े गणेश जी मंदिर एक ऐसा स्थान है जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता है. यह मंदिर कोटा की गौरवशाली धार्मिक विरासत को दर्शाता है.

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