2.60 करोड़ की लागत से जोधपुर में बनेगी हाईटेक सूक्ष्म जीव विज्ञान लैब, स्विट्जरलैंड से मिली स्वीकृति, जानें फायदे

जोधपुर. कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर में अब पश्चिमी राजस्थान की पहली हाईटेक ‘सूक्ष्म जीव विज्ञान प्रयोगशाला’ स्थापित होने जा रही है. गौरतलब है कि इसके लिए विश्वविद्यालय को कृषि वानिकी परियोजना के अंतर्गत स्वीटजरलैंड से 2.60 करोड़ रुपए की अंतरराष्ट्रीय स्वीकृति मिली है. इस हाईटेक लैब में लगातार बदलते जलवायु परिवर्तनों के कारण होने वाले पौधों में बदलाव, मिट्टी के पोषक तत्वों सहित विभिन्न सूक्ष्म जीवों पर शोध किया जाएगा. यह जैव विविधता को बढ़ाने की दिशा में भी अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होगा.
कृषि वानिकी से जुड़े विभिन्न शोधों को आधार मिलेगा. कृषि वानिकी परियोजना की प्रधान अन्वेषक डॉ. कृष्णा सहारण ने बताया कि कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर को एग्रोफोरेस्ट्री प्रमोशन नेटवर्क (APN), स्विट्ज़रलैंड से कृषि वानिकी आधारित शोध के लिए यह स्वीकृति प्राप्त हुई है. यह परियोजना वर्ष 2026 से 2029 तक संचालित की जाएगी. इसके तहत हाईटेक प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी.
मील का पत्थर साबित होगी यह परियोजना
इस लैब में कृषि वानिकी से संबंधित फसल-वृक्ष अंतःक्रिया, भूमि में कार्बन संरक्षण, सहयोगी सूक्ष्मजीवों का अध्ययन, मिट्टी में पोषक तत्वों की स्थिति, जल का ठहराव, जलवायु परिवर्तनों के दौरान पौधों की तनाव सहनशीलता, मिट्टी व पौधों का सूक्ष्मजीवों के माध्यम से प्राकृतिक उपचार जैसे विभिन्न अनुसंधान कार्य किए जाएंगे. ये अनुसंधान मृदा स्वास्थ्य में सुधार, जैव विविधता संरक्षण, पोषक तत्व चक्रण एवं जल संसाधनों के कुशल उपयोग में अत्यंत सहायक साबित होंगे. यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं टिकाऊ कृषि विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक और मील का पत्थर साबित होगी.
कृषि वानिकी से मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ता है
कृषि वानिकी के दौरान खेत में फसलों के साथ-साथ उपयोगी पेड़ लगाए जाते हैं. इसमें पेड़ और फसल को एक ही जमीन पर वैज्ञानिक तरीके से उगाया जाता है. कृषि वानिकी से मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ता है, लाभकारी सूक्ष्मजीव सक्रिय होते हैं और पानी की बचत होती है. पेड़ वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में मदद करते हैं. इस पद्धति से किसान को फसल के साथ-साथ लकड़ी, फल, चारा एवं औषधीय पौधों से अतिरिक्त आमदनी भी प्राप्त होती है.
पश्चिमी राजस्थान के लिए महत्वपूर्ण है यह प्रोजेक्ट
पश्चिमी राजस्थान की शुष्क एवं अर्ध-शुष्क परिस्थितियों में यह प्रोजेक्ट अत्यंत महत्वपूर्ण है. कृषि वानिकी के एडवांस रिसर्च के लिए लैब की स्थापना की जाएगी. इसके तहत वृक्षों एवं फसलों के आपसी संयोजन के दीर्घकालिक प्रभावों का अध्ययन भी किया जाएगा. इसके लिए विश्वविद्यालय को 2.60 करोड़ रुपए की स्वीकृति प्राप्त हुई है. प्रयोगशाला के माध्यम से वैज्ञानिकों के साथ अन्य विश्वविद्यालयों के विद्यार्थी एवं शोधार्थी अनुसंधान का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त करेंगे. किसानों के लिए भी यह सहायक साबित होगी.
कृषि वानिकी को मिलेगा वैज्ञानिक आधार
यह परियोजना शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कृषि वानिकी को वैज्ञानिक आधार प्रदान करने, अनुसंधान-आधारित टिकाऊ मॉडल विकसित करने तथा किसानों के लिए व्यावहारिक, पर्यावरण-अनुकूल और लाभकारी कृषि वानिकी प्रणालियां स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान देगी.



