‘हिंदी का विरोध नहीं लेकिन…’ NEP पर विवाद के बीच पवन कल्याण ने दी सफाई, विरोधियों को लपेटा

Last Updated:March 15, 2025, 22:18 IST
Pawan Kalyan on NEP: अभिनेता से नेता बने पवन कल्याण ने हिंदी थोपने के आरोपों पर सफाई दी. उन्होंने ‘नेशनल एजुकेशन पॉलिसी’ पर विवाद के बीच कहा कि हिंदी को जबरदस्ती लागू करने का विरोध किया था. उन्होंने एनईपी में त…और पढ़ें
पवन कल्याण अभिनेता से नेता बने हैं.
हाइलाइट्स
पवन कल्याण ने हिंदी थोपने के आरोपों पर सफाई दी.पवन ने एनईपी में तीन भाषाओं की नीति का समर्थन किया.कल्याण ने कहा, हिंदी को जबरदस्ती लागू करने का विरोध किया था.
नई दिल्ली: आंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम और जनसेना पार्टी के हेड पवन कल्याण ‘हिंदी भाषा’ पर अपने बयान की वजह से विवादों से घिर गए हैं. उन्होंने शनिवार 15 मार्च को ‘हिंदी थोपने’ के मामले पर अपने बयान पर सफाई दी. वे पहले हिंदी को जबरदस्ती लागू करने के खिलाफ थे, लेकिन अब उन पर अपना रुख बदलने के आरोप लग रहे हैं. पवन कल्याण ने तमिलनाडु में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) पर चल रहे बवाल में बीजेपी का साथ दिया.
दरअसल, साउथ के राज्य, केंद्र सरकार पर हिंदी थोपने का आरोप लगा रहे हैं. इससे पहले, जनसेना पार्टी चीफ ने तमिल नेताओं की आलोचना की थी. उन्होंने कहा था कि ये नेता एक तरफ तो हिंदी का विरोध करते हैं, लेकिन अपनी फिल्मों को हिंदी में डब करवा के खूब पैसा कमाते हैं. उनके इस बयान की खूब आलोचना हुई, यहां तक कि एक्टर प्रकाश राज ने भी पवन कल्याण का विरोध किया.
पवन कल्याण का आलोचकों को कड़ा जवाबआंध्र प्रदेश के डिप्टी सीएम पवन कल्याण ने एनईपी में तीन भाषाओं वाली नीति का सपोर्ट करते हुए बीजेपी का बचाव किया. न्यूज18 इंग्लिश की रिपोर्ट के अनुसार, पवन कल्याण ने आलोचकों पर पलटवार करते हुए कहा कि उन्होंने कभी हिंदी भाषा का विरोध नहीं किया, बल्कि इसे जबरदस्ती लागू करने का विरोध किया था. उन्होंने एक लंबे पोस्ट में लिखा, ‘किसी भी भाषा को जबरदस्ती थोपना या उसका आंख मूंदकर विरोध करना, दोनों ही हमारे भारत की एकता के लिए सही नहीं है. मैंने कभी हिंदी का विरोध नहीं किया. मैंने तो बस इसे जबरदस्ती लागू करने का विरोध किया था. जब एनईपी 2020 खुद हिंदी को अनिवार्य नहीं करती, तो ऐसे में इसे थोपने की अफवाहें फैलाना लोगों को बेवकूफ बनाने जैसा है.’
‘एनईपी’ में स्टूडेंट की पसंद को दी तवज्जोएनईपी को और साफ करते हुए कल्याण ने कहा कि स्टूडेंट्स को अपनी मातृभाषा के अलावा कोई भी दो भारतीय भाषाएं और एक विदेशी भाषा सीखने की आजादी है. उन्होंने आगे कहा, ‘अगर उन्हें हिंदी नहीं सीखनी है, तो वो तेलुगु, तमिल, मलयालम, कन्नड़, मराठी, संस्कृत, गुजराती, असमिया, कश्मीरी, उड़िया, बंगाली, पंजाबी, सिंधी, बोडो, डोगरी, कोंकणी, मैथिली, मणिपुरी, नेपाली, संथाली, उर्दू या कोई और भारतीय भाषा चुन सकते हैं.
First Published :
March 15, 2025, 22:18 IST
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