Rajasthan

खीरे की खेती में नेमाटोड नियंत्रण और पैदावार बढ़ाने के देसी उपाय.

Last Updated:December 11, 2025, 15:51 IST

खीरे की खेती में नेमाटोड जैसे कीट और जड़ रोग सबसे बड़ी चुनौती होते हैं, लेकिन रोपाई से पहले खेत की सही तैयारी और देसी तकनीकों के उपयोग से फसल को रोगमुक्त रखा जा सकता है। खेत की मिट्टी में 200 लीटर पानी में गुड़, बेसन और वेस्ट डीकंपोज़र से तैयार घोल डालने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधे मजबूत बनते हैं। नेमाटोड नियंत्रण के लिए हींग का पानी जड़ों तक पहुँचाना प्रभावी माना जाता है। नियमित रूप से यही जैविक घोल देने से खीरे की बढ़वार, फूल-फल उत्पादन और पैदावार में उल्लेखनीय वृद्धि होती है तथा रासायनिक दवाओं की आवश्यकता कम हो जाती है।करौली

खीरे की खेती करने वाले किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती फल और जड़ों में लगने वाले रोग होते हैं, खासकर नेमाटोड जैसे कीट, जो धीरे-धीरे पूरी फसल को बर्बाद कर देते हैं. लेकिन यदि रोपाई से पहले खेत की सही तैयारी कर ली जाए और कुछ देसी उपायों का समय पर उपयोग किया जाए, तो खीरे की पूरी फसल को स्वस्थ और रोगमुक्त रखा जा सकता है.

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विशेषज्ञ किसान बताते हैं कि खीरे की खेती में कुछ आसान टिप्स और ट्रिक्स अपनाने से न केवल रोगों पर नियंत्रण मिलता है, बल्कि पैदावार भी कई गुना बढ़ जाती है.

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खीरे की खेती से पहले खेत की मिट्टी को हल्का बनाना ज़रूरी होता है. मिट्टी तैयार करते समय 200 लीटर पानी में 15 किलो गुड़, 4 किलो बेसन और 200 मिली वेस्ट डीकंपोज़र मिलाकर तैयार घोल को खेत में डाल देना चाहिए. इस घोल को कुछ दिनों तक ढककर रखा जाता है, जिससे इसमें अच्छे जीवाणु विकसित हो जाते हैं.

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यह मिश्रण खेत में डालने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, जड़ें मज़बूत होती हैं और खीरे के पौधे शुरुआत से ही रोग-प्रतिरोधक बन जाते हैं.

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खीरे की फसल में सबसे अधिक नुकसान नेमाटोड कीट पहुंचाते हैं. ये जड़ों को चूसकर पौधे की वृद्धि रोक देते हैं, इससे बचने के लिए हींग का पानी बेहद असरदार माना जाता है. हींग को पीसकर पानी में घोलकर, ड्रिप सिंचाई के माध्यम से यदि पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाए, तो यह जड़ों को नेमाटोड से बचाता है. यह उपाय खीरे की जड़ प्रणाली को मजबूत करता है और पौधे तेजी से बढ़ते हैं.

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खीरे की अधिक पैदावार के लिए खेत में समय-समय पर वही विशेष घोल देना चाहिए, जो गुड़, बेसन और वेस्ट डीकंपोज़र से तैयार किया जाता है. इसे सिंचाई के पानी के साथ खेत में देने से पौधों की बढ़वार तेज होती है, फूल और फल अधिक आते हैं, फसल में कीट-रोग नहीं लगते और मिट्टी की ताकत बनी रहती है.

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किसानों का कहना है कि इस देसी तकनीक से खीरे की पैदावार हर साल बढ़ रही है और रासायनिक दवाओं की जरूरत लगभग खत्म हो जाती है.

First Published :

December 11, 2025, 15:51 IST

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खीरे की खेती से पहले किसान खेत में डाल दें यह देसी घोल, बंपर होगी पैदावार!

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