राजस्थान बीजेपी कार्यकारिणी में कितने ओबीसी? वसुंधरा कैंप को भी मिली जगह… अंदर का संतुलन चौंकाने वाला!

जयपुर. राजस्थान बीजेपी अध्यक्ष मदन राठौड़ की नई प्रदेश कार्यकारिणी सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि राठौड़ ने टीम गठन में जातीय और क्षेत्रीय बैलेंस को किस तरह साधा है. पार्टी के कोर वोटर माने जाने वाले ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य समुदाय को नई टीम में प्रमुख स्थान दिया गया है, जबकि पंचायत और निकाय चुनावों को ध्यान में रखते हुए ओबीसी और मूल ओबीसी वर्ग को भी मजबूत हिस्सेदारी दी गई है. हालांकि, दूसरी ओर एससी-एसटी समुदाय का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम नजर आता है, जो पार्टी की रणनीति पर नए सवाल खड़े कर रहा है.
इन सबके बीच यह भी दिलचस्प है कि राठौड़ की टीम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का कोटा सबसे ज्यादा प्रभावी रहा है, जबकि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और केंद्रीय मंत्रियों के खेमों को भी विशेष महत्व दिया गया है.
कहां से कितने चेहरे शामिल, भरतपुर पूरी तरह बाहर
राजस्थान में बीजेपी संगठन की दृष्टि से 44 जिले हैं, लेकिन नई कार्यकारिणी में इनमें से सिर्फ 18 जिलों को प्रतिनिधित्व मिला है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के गृह जिले भरतपुर से किसी भी चेहरे को जगह नहीं दी गई. जयपुर और जयपुर देहात से सबसे बड़ी संख्या में 13 नेताओं को टीम में शामिल किया गया है. इसके बाद बीकानेर से 4, अजमेर और हनुमानगढ़ से 2–2, तथा चूरू, नागौर, सीकर, झुंझुनूं, सिरोही, पाली, कोटा, बांसवाड़ा, दौसा, सवाई माधोपुर और उदयपुर से 1–1 प्रतिनिधि शामिल किए गए हैं.
दिलचस्प यह भी है कि बीजेपी को हाल ही में सबसे ज्यादा नुकसान पूर्वी राजस्थान और शेखावाटी अंचल में हुआ था, लेकिन फिर भी इन दोनों क्षेत्रों से केवल दो–दो नेताओं को ही स्थान मिला. सीकर से श्रवण बगड़ी और झुंझुनूं से मुकेश दाधीच टीम में हैं, लेकिन दोनों ही मूल रूप से जयपुर की राजनीति से जुड़े हुए माने जाते हैं.
चौंकाने वाले चेहरे, प्रमोशन और 53% रिपीट सदस्यनई कार्यकारिणी में छगन माहूर की नियुक्ति सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित कर रही है. अंता उपचुनाव में जहां बीजेपी को हार मिली, वहीं माहूर उस चुनाव के सह–सहयोगी थे, इसके बावजूद उन्हें उपाध्यक्ष बनाया गया है. माहूर को वसुंधरा राजे का करीबी माना जाता है.वहीं, श्रवण बगड़ी और मुकेश दाधीच को दोबारा वही पद मिलने से यह लगभग तय माना जा रहा है कि इन दोनों को बोर्ड–आयोग में प्रस्तावित राजनीतिक नियुक्ति अब फिलहाल ठंडे बस्ते में चली गई है.टीम में करीब 53% यानी 18 पदाधिकारी दोबारा शामिल किए गए हैं. इनमें भूपेंद्र सैनी, मिथिलेश गौतम, कैलाश मेघवाल और नारायण मीणा जैसे नेताओं को उनके परफॉर्मेंस या सिफारिश के आधार पर प्रमोशन भी मिला है.
किस वर्ग पर सबसे ज्यादा फोकस?राठौड़ की कार्यकारिणी बताती है कि बीजेपी ने सामान्य वर्ग और ओबीसी–मूल ओबीसी पर सबसे अधिक भरोसा जताया है. महिलाओं को भी 7 स्थान देकर संतुलन साधने की कोशिश की गई है. हालांकि, एससी–एसटी प्रतिनिधित्व सीमित है, और पूर्वी राजस्थान व शेखावाटी जैसे चुनाव में कमजोर साबित हुए क्षेत्रों को भी अपेक्षाकृत कम महत्व मिला है. कुल मिलाकर यह टीम संगठनात्मक स्थिरता, चुनावी गणित और विभिन्न खेमों के बीच सामंजस्य बनाकर तैयार की गई रणनीतिक संरचना दिखती है.



