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आपके नल का पानी कितना सेफ? एक्सपर्ट से समझें 17 अनिवार्य टेस्ट की पूरी कहानी – Chhattisgarh News

Health Tips : पानी जीवन की सबसे बुनियादी आवश्यकता है, लेकिन यदि यही पानी शुद्ध न हो तो यह कई गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है. हाल ही में इंदौर में हुए  गंदा पानी कांड से लोगों में सर्तकता का अहसास औऱ हुआ है. जिले में लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में डिस्ट्रिक्ट वॉटर टेस्टिंग लेबोरेटरी, बालोद अहम भूमिका निभा रही है. इस लैब की खास बात यह है कि यह नेशनल लेवल (NABL) की मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला है, जिसका 2025 में सफलतापूर्वक रिनिवल भी कराया गया है.

जांचने के लिए 16 से 17 अलग – अलग पैरामीटर

डिस्ट्रिक्ट वॉटर टेस्टिंग लेबोरेटरी बालोद की केमिस्ट वंदना जैन ने बताया कि यहां पानी की गुणवत्ता जांचने के लिए 16 से 17 अलग – अलग पैरामीटर पर परीक्षण किया जाता है. इन जांचों में फिजिकल, केमिकल और बैक्टीरियोलॉजिकल टेस्टिंग शामिल है. विशेष रूप से बैक्टीरियोलॉजिकल जांच में ई. कोलाई (E. coli) जैसे खतरनाक बैक्टीरिया की जांच की जाती है, जो दूषित पानी से फैलने वाली बीमारियों का प्रमुख कारण बनते हैं.

सबसे पहले इन सैंपलों की कोडिंग

उन्होंने बताया कि फिजिकल और केमिकल कैटेगरी में NABL से 11 पैरामीटर को मान्यता प्राप्त है. पानी की शुद्धता जांचने के लिए जिले के अलग-अलग इलाकों से विभाग के माध्यम से पानी के सैंपल लैब में भेजे जाते हैं. सबसे पहले इन सैंपलों की कोडिंग की जाती है, ताकि जांच प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी बनी रहे. कोडिंग के बाद वैज्ञानिक पद्धति से लैब में परीक्षण किया जाता है, जिसमें 24 से 48 घंटे का समय लगता है. इसके बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाती है.

रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाता है कि पानी पीने योग्य है या नहीं, यदि सभी 17 पैरामीटर तय मानकों के भीतर होते हैं, तो पानी को शुद्ध और सुरक्षित माना जाता है. वहीं, किसी भी पैरामीटर में सीमा से बाहर परिणाम आने पर पानी को पीने योग्य नहीं माना जाता.

पानी की गुणवत्ता जांच में जिन प्रमुख मानकों को देखा जाता है, उनमें पानी में मौजूद कैल्शियम की मात्रा, नमक जैसे तत्व (क्लोराइड), पानी का रंग, मैग्नीशियम की मात्रा, गंध, पीएच मान (अम्लीय या क्षारीय स्तर), स्वाद, कुल क्षारीयता, कुल घुलनशील ठोस पदार्थ (TDS), पानी की कठोरता और मटमैलेपन (टर्बिडिटी) जैसी जांच शामिल है. ये सभी पैरामीटर सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं.

घर के पानी की जांच करानी जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि आम लोगों को भी समय-समय पर अपने घर के पानी की जांच करानी चाहिए, ताकि जलजनित बीमारियों से बचा जा सके. डिस्ट्रिक्ट वॉटर टेस्टिंग लेबोरेटरी बालोद की यह पहल न केवल जल गुणवत्ता सुनिश्चित करने में मदद कर रही है, बल्कि लोगों में स्वच्छ पेयजल को लेकर जागरूकता बढ़ाने का भी काम कर रही है.

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