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How to Check Biological Age at Home | Science Backed Methods to check Biological Age | घर बैठे बायोलॉजिकल उम्र का पता लगाने के तरीके

5 Ways to Check Biological Age at Home: मॉडर्न लाइफस्टाइल का असर लोगों की सेहत पर बुरी तरह पड़ रहा है. इससे न सिर्फ आपका शरीर कमजोर हो रहा है, बल्कि कई बीमारियों का रिस्क भी बढ़ रहा है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो खराब खान-पान और अनहेल्दी लाइफस्टाइल के कारण लोग जवानी में ही बूढ़े हो रहे हैं. यह सुनने में अजीब लगता है, लेकिन यह एक कड़वा सच है. आज के जमाने में लोगों की बायोलॉजिकल एज तेजी से बढ़ रही है. बायोलॉजिकल एज बताती है कि आपका शरीर अंदर से कितना बूढ़ा या जवान है. यह अंदरूनी ऑर्गन्स के कामकाज के आधार पर तय होती है. राहत की बात यह है कि बायोलॉजिकल एज को रिवर्स किया जा सकता है. कई लोग तो बेहतरीन रुटीन फॉलो करके बायोलॉजिकल एज को अपनी असली उम्र से भी कम कर लेते हैं.

बायोलॉजिकल एज का पता लगाने के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाते हैं, जिसमें ब्लड और सलाइवा टेस्ट से लेकर डीएनए टेस्ट शामिल होते हैं. ये लैब टेस्ट काफी महंगे होते हैं, जिसकी वजह से तमाम लोग अफॉर्ड नहीं कर पाते हैं. हालांकि आजकल बाजार में बायोलॉजिकल एज टेस्ट किट भी उपलब्ध है, जिसके जरिए लोग घर पर ही अपनी जैविक उम्र का पता लगा सकते हैं. यह किट भी सस्ती नहीं होती है और हर जगह नहीं मिलती है. ऐसे में आम लोगों के सामने सवाल उठता है कि वे अपनी बायोलॉजिकल उम्र का पता कैसे लगा सकते हैं? BBC साइंस फोकस मैगजीन की एक रिपोर्ट में घर पर अपनी बायोलॉजिकल एज का पता लगाने के कुछ बेहद आसान तरीके बताए गए हैं, जिन्हें हर कोई अपना सकता है.

घर बैठे ऐसे चेक करें अपनी बायोलॉजिकल एज

चेहरा बताता है शरीर की उम्र : आपके चेहरे से बायोलॉजिकल उम्र का पता चलता है. यह बात सुनने में मजाक लगती है, लेकिन यह बिल्कुल सच है. रिसर्च बताती हैं कि आप जितने साल के दिखते हैं, अक्सर आपकी बायोलॉजिकल उम्र भी उसी के आसपास होती है. 2009 में ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में छपी एक स्टडी में 70 साल से ऊपर के करीब 1000 जुड़वां लोगों को शामिल किया गया. नतीजा चौंकाने वाला था. जो ट्विन ज्यादा बूढ़ा दिखता था, उसकी मौत पहले हुई. वजह यह है कि स्किन की उम्र बढ़ने की प्रक्रिया वही बायोलॉजिकल बदलाव दर्शाती है, जो शरीर के अंदर चल रहे होते हैं. कोलेजन की कमी, DNA डैमेज और इम्यून सिस्टम की कमजोरी चेहरे पर भी दिखती है और शरीर के अंदर भी दिखती है.

एक पैर पर खड़े होने से खुलता है सीक्रेट : आप अपने एक पैर पर खड़े होकर अपनी बायोलॉजिकल उम्र का पता लगा सकते हैं. वैज्ञानिक इसे टाइम्ड यूनिपेडल स्टैंस टेस्ट कहते हैं. इसमें आपको अपने एक पैर पर खड़े होना है और अपने हाथों को फोल्ड कर लेना है. इसके बाद अपनी आंखें बंद कर लें. आंखें बंद करके अगर आप 10-15 सेकंड तक संतुलन बना पाते हैं, तो आपकी नसों, मांसपेशियों और दिमाग के बीच तालमेल अच्छा माना जाता है. कई लोग 2 सेकंड भी ऐसा नहीं कर पाते हैं. इसका मतलब है कि उनकी बायोलॉजिकल उम्र असली उम्र से कहीं ज्यादा है. बेहतर संतुलन का मतलब है बेहतर नर्वस सिस्टम यानी कम बायोलॉजिकल उम्र.

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फिटनेस बताएगी आप अंदर से कितने जवान : साइंस के मुताबिक आपकी फिटनेस उम्र से ज्यादा जरूरी है. VO₂ Max यानी शरीर एक्सरसाइज के दौरान कितनी ऑक्सीजन इस्तेमाल कर सकता है. यह लंबी उम्र का मजबूत संकेत माना जाता है. लैब में इसका टेस्ट कठिन होता है, लेकिन स्मार्टवॉच अब इसका अनुमान लगाने लगी हैं. रिसर्च बताती है कि जिन लोगों की कार्डियो फिटनेस अच्छी होती है, उनमें समय से पहले मौत का खतरा लगभग आधा हो जाता है. नियमित वॉक, रनिंग या साइक्लिंग से 60 साल का व्यक्ति भी 30-35 साल जैसी फिटनेस पा सकता है. इससे आप बायोलॉजिकल एज रिवर्स कर सकते हैं.

सुनने की क्षमता भी उम्र का आईना : हमारे कानों के अंदर मौजूद बेहद नाजुक हेयर सेल्स उम्र के साथ धीरे-धीरे खत्म होते जाते हैं. अगर आप बहुत तेज आवाजें (12000 हर्ट्ज से ऊपर) नहीं सुन पाते हैं, तो आपकी हियरिंग एज 50 से ऊपर हो सकती है. दिलचस्प बात यह है कि सुनने की कमजोरी को डिमेंशिया और ब्रेन एजिंग से भी जोड़ा गया है. समय रहते जांच और सही ट्रीटमेंट न सिर्फ सुनने की क्षमता, बल्कि दिमाग की सेहत भी बेहतर हो सकती है.

ब्लड टेस्ट और एपिजेनेटिक क्लॉक एडवांस तरीका : बायोलॉजिकल एज टेक करने का सबसे हाई-टेक तरीका एपिजेनेटिक क्लॉक है. यह DNA पर मौजूद मिथाइलेशन पैटर्न देखकर उम्र का अनुमान लगाती है. यही वजह है कि कुछ लोग अपनी असली उम्र से काफी युवा निकलते हैं. हालांकि ये टेस्ट महंगे होते हैं, लेकिन PhenoAge जैसे टूल सामान्य ब्लड रिपोर्ट जैसे शुगर, कोलेस्ट्रॉल और सूजन के मार्कर से भी बायोलॉजिकल उम्र का अंदाजा लगा लेते हैं.

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