Kota Shiv Dham Tourism | कोटा के पाँच प्राचीन शिव स्थल

Last Updated:December 08, 2025, 08:24 IST
कोटा सिर्फ शिक्षा का हब नहीं, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता, इतिहास और शिवभक्ति का केंद्र भी है. पाँच प्राचीन शिव धाम—कंसुआ महादेव (पांडव काल), गेपरनाथ महादेव (झरने), नीलकंठ महादेव (शांति), शिवपुरी धाम (साधना) और गराड़िया महादेव (ग्रैंड कैन्यन)—हर साल लाखों भक्तों और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं.

गराड़िया महादेव एक प्रसिद्ध प्राकृतिक चमत्कार और पवित्र धार्मिक स्थल है. यह चंबल नदी की गहरी घाटियों के बीच हरी-भरी प्राकृतिक सुंदरता से घिरा हुआ है. गराड़िया महादेव में आने वाले यात्रियों को चंबल नदी के मनमोहक दृश्य देखने को मिलते हैं, जो गहरी घाटियों से होते हुए घूमती-बलखाती आगे बहती है. यहाँ का मुख्य आकर्षण प्राचीन महादेव मंदिर है, जो भगवान शिव को समर्पित है. श्रद्धालु और भक्त यहाँ आकर भगवान शंकर के दर्शन करते हैं और इस शांत, आध्यात्मिक वातावरण में मानसिक शांति का अनुभव करते हैं. गराड़िया महादेव प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक शांति और रोमांचक दृश्यों का अद्भुत संगम है जो इसे कोटा के सबसे आकर्षक पर्यटन स्थलों में से एक बनाता है.

शिवपुरी धाम 525 शिवलिंगों के लिए प्रसिद्ध है, जिसकी स्थापना दिवंगत नागा साधु राणा रामपुरी महाराज ने की थी और उनके शिष्य सनातन पुरी महाराज ने इसे पूर्ण किया. यह मंदिर स्वास्तिक आकार में बना है और यहाँ दर्शन से 12 ज्योतिर्लिंगों का फल मिलता है. मंदिर का इतिहास 1980 के दशक में शुरू हुआ जब राणा रामपुरी महाराज ने पशुपतिनाथ मंदिर से प्रेरित होकर कोटा में ऐसा धाम बनाने का संकल्प लिया था जहाँ लाखों भक्त एक साथ पूजा कर सकें. और 2007 में 121 कुंडीय महायज्ञ के साथ 525 शिवलिंगों की प्राण-प्रतिष्ठा की गई. शिवपुरी धाम अपनी अद्भुत आस्था और 525 शिवलिंगों के भव्य दर्शन के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. यहाँ आने वाले भक्त शांत वातावरण में भगवान शिव की दिव्य उपस्थिति का अनुभव करते हैं.

नीलकंठ महादेव मंदिर मुख्य रूप से रेतवाली पुराने शहर में स्थित है. यह शहर के मध्य का एक अत्यंत प्राचीन और प्रसिद्ध शिव मंदिर है. इस मंदिर का सबसे अनोखा और प्रमुख आकर्षण है पाताल-मुखी शिवलिंग, जिसके बारे में माना जाता है कि यह धीरे-धीरे पाताल की ओर समा रहा है. कोटा में नीलकंठ महादेव के अन्य मंदिर भी स्थित हैं, पर रेतवाली वाला नीलकंठ महादेव मंदिर अपनी प्राचीनता, रहस्य और धार्मिक महत्व के कारण विशेष पहचान रखता है. यहाँ स्थापित श्री नीलकंठ महादेव के दर्शन करने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और इस पवित्र स्थल की दिव्यता तथा शांत वातावरण में आध्यात्मिक अनुभूति प्राप्त करते हैं.
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कंसुआ महादेव मंदिर (कर्णेश्वर मंदिर) एक प्राचीन एवं ऐतिहासिक रूप से अत्यंत समृद्ध धार्मिक स्थल है. यह मंदिर पौराणिक और ऐतिहासिक दोनों ही दृष्टियों से विशेष महत्व रखता है. माना जाता है कि इसका संबंध पांडवों, ऋषि कण्व तथा मौर्य/गुप्त काल (लगभग 738 ईस्वी) से जुड़ा हुआ है. मंदिर की मुख्य विशेषता इसका चार-मुखी (चतुर्मुखी) शिवलिंग है, जो अत्यंत दुर्लभ और अद्वितीय माना जाता है. अपनी विशिष्ट वास्तुकला, सूक्ष्म नक्काशी, और पौराणिक कड़ियों के कारण कंसुआ महादेव मंदिर कोटा का एक प्रमुख आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर स्थल माना जाता है. श्रद्धालु और पर्यटक यहाँ आकर न सिर्फ धार्मिक शांति का अनुभव करते हैं, बल्कि राजस्थान की ऐतिहासिक विरासत से भी रूबरू होते हैं.

गेपरनाथ एक ऐतिहासिक और बेहद दर्शनीय पिकनिक स्थल है, जो प्राचीन गेपरनाथ महादेव मंदिर के इर्द-गिर्द विकसित हुआ है. ऐसा माना जाता है कि यह मंदिर 500 से अधिक वर्ष पुराना है और इसे 16वीं शताब्दी में राजा भोज की पत्नी द्वारा बनवाया गया था. यह मंदिर अपनी अनोखी विशेषता—शिवलिंग के ऊपर से बहते प्राकृतिक झरने—के लिए प्रसिद्ध है. यह प्राकृतिक झरना मंदिर की पवित्रता और सौंदर्य को और भी अद्भुत बनाता है, जिसके कारण यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है. गेपरनाथ न केवल धार्मिक महत्व रखता है बल्कि पर्यटन के लिहाज़ से भी अत्यंत लोकप्रिय है.
First Published :
December 08, 2025, 08:24 IST
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विरासत और शिवभक्ति का अद्भुत संगम: कोटा का असली खजाना पहाड़ों और घाटियों ….



