“मैं सिरोही हूं, माउंट आबू की गोद में बसा…” रहस्यों, प्रेम कहानियों और देव आस्था से भरा शहर, जानिए मेरी कहानी

Last Updated:November 13, 2025, 15:18 IST
Sirohi News : राजस्थान का माउंट आबू – जहां इतिहास, आस्था और खूबसूरती एक साथ सांस लेते हैं. कभी ऋषि वशिष्ठ की तपोभूमि रहा ये स्थल आज हिल स्टेशन के रूप में देश-दुनिया के पर्यटकों का केंद्र है. नक्की झील की प्रेम कथा से लेकर गुरुशिखर की ऊंचाई तक, माउंट आबू हर मोड़ पर रहस्यों और रोमांच से भरा है.
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सिरोही : मैं हूं माउंट आबू. कभी धर्म नगरी के रूप में पहचाने जाने वाला तीर्थ स्थल, अब देश दुनिया में हिल स्टेशन के रूप में विख्यात हुं. भगवान राम के कुलगुरु ऋषि वशिष्ठ और भगवन दत्तात्रेय की तपोस्थली के रूप में पहचाने जाने वाले इस शहर में हर साल लाखों पर्यटक यहां की सुंदरता को निहारने आते हैं. राजस्थान और अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी समेटे हुए इस शहर की कहानी भी अनोखी है.
माउंट आबू की स्थापना को लेकर एक किंवदंती विख्यात है कि यहां बने गुरु वशिष्ठ के आश्रम में उनकी कामधेनू गाय एक बार यहां बनी खाई में गिर गई थी. तब गुरु वशिष्ठ ने भगवान शिव से आराधना कर इस खाई को पाटने के लिए सरस्वती नदी प्रवाहित करवाई. इस नदी पर पहाड़ हो स्थिर करने के लिए भगवान शिव ने अर्बुद नाग को यहां भेजा. माना जाता है ये अर्बुद नाग और आबू की पहाडियां भगवान शिव के अंगूठे पर टिकी हुई. इस अंगूठे की पूजा यहां बने अचलेश्वर महादेव मंदिर में शिवलिंग के स्थान पर होती है.
अर्बुदरण्य से माउण्ट आबू तक मिले कई नामप्राचीन काल में इस शहर की पहचान अर्बुदरण्य के रूप में हुआ करती थी. जिसका उल्लेख कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है. बाद में अर्बुद क्षेत्र, अर्बुदांचल, आबूराज आबू पर्वत के रूप में पहचान मिली. 1190ई के दौरान आबू का शासन राजा जेतसी परमार के हाथों में था. बाद में आबू भीम देव द्वितीय के शासन का क्षेत्र और माउंट आबू चौहान साम्राज्य का हिस्सा बना. इसके बाद माउंट आबू को राजपूताना मुख्यालय के लिए अंग्रेजों को पट्टे पर दे दिया. अंग्रेजों के शासन काल में इस शहर का नाम बदल कर माउंट आबू किया गया और यहां 1864 में एक नगरपालिका बनाई गई.
रसिया बालम के अधूरे प्रेम की निशानी माउण्ट आबू की पहचान यहां के धार्मिक और पर्यटक स्थलों से है. यहां बनी प्रसिद्ध नक्की झील रसिया बालम के अधूरे प्रेम की निशानी है. रसिया बालम ने ये झील एक रात में अपने नाखून से खोद दी थी, लेकिन अपने प्रेम को नहीं पा सके थे. यहां बने अर्बुदा देवी मंदिर को मां कात्यायनी के स्वरूप और शक्तिपीठ के रूप में पूजा जाता है. मान्यता है कि इसी स्थान पर मां सती के होंठ गिरे थे. वहीं देलवाड़ा के प्रसिद्ध जैन मंदिर की तुलना आगरा के ताजमहल की बनावट से की जाती है. यहां भगवान राम की तपोस्थली होने से प्राचीन रघुनाथ मंदिर में उनकी अकेले स्वरूप में पूजा होती है. इसके अलावा सनसेट पॉइंट, हनीमून पॉइंट प्रसिद्ध पर्यटक स्थल हैं.
सबसे ऊंची चोटी देखने आते हैं लाखों पर्यटकसमुद्र तल से 1722 मीटर ऊंचाई पर बनी राजस्थान और अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी गुरुशिखर माउंट आबू शहर से 12 किलोमीटर दूरी पर है. जिसे देखने के लिए देश दुनिया से लाखों पर्यटक आते हैं. यहां बनी भगवान दत्तात्रेय की गयफा धार्मिक स्थल है. इस चोटी की धार्मिक यात्रा पृथ्वीराज चौहान ने विवाह से पहले की थी. अचलगढ़ में परमार शासकों और राणा कुम्भा ने भव्य किला बनवाया था. जहां मीरा बाई ने भी 12 सालों तक एक कुटिया में तपस्या की थी.
रुपेश कुमार जायसवाल ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के ज़ाकिर हुसैन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस और इंग्लिश में बीए किया है. टीवी और रेडियो जर्नलिज़्म में पोस्ट ग्रेजुएट भी हैं. फिलहाल नेटवर्क18 से जुड़े हैं. खाली समय में उन…और पढ़ें
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Location :
Sirohi,Rajasthan
First Published :
November 13, 2025, 15:18 IST
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“मैं सिरोही हूं, माउंट आबू की गोद में बसा… रहस्यों और आस्था से भरा शहर”



