IAS Story: महिला अफसर ने मंदिरों के लाउडस्पीकरों पर उठाया सवाल, छिड़ गई बहस, जानिए कौन हैं ये अधिकारी?

IAS Story, MP News, IAS Shailbala Martin: मध्य प्रदेश में इन दिनों मंदिरों पर बजने वाले लाउडस्पीकर को लेकर चर्चा गरमा गई है. इस मामले में एक महिला आईएएस अधिकारी के ट्वीट के बाद विवाद और गहरा गया है. इस आईएएस अधिकारी का नाम शैलबाला मार्टिन है. शैलबाला 2009 बैच की मध्य प्रदेश कैडर की आईएएस अधिकारी हैं. वर्तमान में वह लोक प्रशासन विभाग यानी जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट (GAD) में एडिशनल सेक्रेटरी के पद पर तैनात हैं. हाल ही में उन्होंने बीते रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर मंदिरों और मस्जिदों दोनों के लाउडस्पीकरों के उपयोग पर सवाल उठाए, जिसके बाद वह चर्चा में हैं. आइए जानते हैं कि शैलबाला मूल रूप से कहां की रहने वाली हैं और उन्होंने अपनी पढ़ाई-लिखाई कहां से की है?
शैलबाला मार्टिन मूल रूप से मध्य प्रदेश के झाबुआ की रहने वाली हैं. मध्य प्रदेश सरकार की वेबसाइट gad.mp.gov.in/iaslist पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक शैलबाला का जन्म 9 अप्रैल 1965 को हुआ था. उनका पूरा नाम शैलबाला अंजना मार्टिन है. मध्य प्रदेश आईएएस की पीडीएफ लिस्ट में शैलबाला का नाम 116 नंबर पर है, जिसमें बताया गया है कि शैलबाला का चयन SCS (State Civil Service) के माध्यम से हुआ है. स्टेट सिविल सर्विसेज में कुछ समय तक काम करने के बाद उन्हें इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) के रूप में प्रमोट किया गया. वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, शैलबाला को 12 जून 2017 को आईएएस के रूप में अप्वाइंट किया गया था. शैलबाला ने बीए और एमए तक की पढ़ाई की है. कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि शैलबाला ने वर्ष 1983 में इंदौर के होल्कर साइंस कॉलेज से आर्ट्स में मास्टर की डिग्री ली थी. इसके बाद 2009 में उनका चयन स्टेट सिविल सर्विस के लिए हुआ था.
कहां-कहां रही हैं तैनातीआईएएस शैलबाला मार्टिन ने मध्य प्रदेश के कई विभागों में सेवाएं दी हैं. 2014 में वह स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत थीं. उसके बाद, वर्ष 2019 में वह बुरहानपुर की नगर आयुक्त के पद पर रहीं और इसी साल वह निवाड़ी जिले की कलेक्टर बनीं. 25 जनवरी 2022 को उन्हें मध्य प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग में एडिशनल सेक्रेटरी के पद पर तैनात किया गया, तब से वह यहीं कार्यरत हैं.
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किस बात को लेकर मचा है बवाल?असल में मोहन यादव सरकार ने पिछले साल ध्वनि प्रदूषण को कम करने के लिए एक दिशा-निर्देश जारी किया था, जिसमें धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकरों के उपयोग को सीमित करने की बात कही गई थी. अब एक पत्रकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस संबंध में ट्वीट किया, जिसमें मस्जिदों में लाउडस्पीकरों के उपयोग और बाहर बजने वाले डीजे की प्रथा पर सवाल किया था. इसी ट्वीट का रिप्लाई देते हुए आईएएस शैलबाला ने मंदिरों के लाउडस्पीकरों से होने वाले ध्वनि प्रदूषण पर सवाल खड़े किए. उन्होंने लिखा कि मंदिरों में लगे लाउडस्पीकर, जो कई गलियों में दूर तक स्पीकरों के माध्यम से ध्वनि प्रदूषण फैलाते हैं और जो आधी रात तक बजते रहते हैं, उनसे किसी को कोई समस्या नहीं होती? शैलबाला के टिवट पर भी कई यूजर्स ने कई तरह की प्रतिक्रिया दी है. किसी ने उनके इस सवाल को वाजिब बताया है वहीं कई लोगों ने उनके इस सवाल की आलोचना की है.
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FIRST PUBLISHED : October 21, 2024, 12:30 IST