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गौतम गंभीर के गेम प्लान में छेद, बंद नही किया तो डूब सकती है वर्ल्ड कप में नैया

नई दिल्ली. एशिया कप, ऑस्ट्रेलिया दौरा और अब दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहला मैच, एक बात कॉमन रही और वो है टॉप आर्डर के बल्लेबाजों का खराब फॉर्म . उम्मीदों के अनुसार, कटक की पिच बल्लेबाज़ी के लिए अनुकूल थी पर ऊँचे छक्कों की जगह हमें डॉट बॉल और बेतरतीब शॉट देखने को मिले. कुछ गेंदे पिच पर रुक कर आ रही थी, खासकर जब तेज़ गेंदबाज़ अपनी उंगलियों को घुमा रहे थे या गेंद की गति कम कर रहे थे. पर उछाल उम्मीद के मुताबिक ही था। लाल मिट्टी की पिच पर हमें लगातार गति, उछाल और विकेट देखने को मिले. भारत हार की ओर बढ़ रहा था जब 12वें ओवर में हार्दिक पांड्या क्रीज़ पर आए. बचे हुए 8 ओवरों में इस ऑलराउंडर ने दक्षिण अफ़्रीकी तेज़ गेंदबाज़ों की जमकर धुनाई की.

हार्दिक पांड्या के क्रीज़ पर रहने के दौरान, भारत ने 8.2 ओवरों में 97 रन बनाए. इनमें से 59 रन हार्दिक के बल्ले से आए, वो भी सिर्फ़ 28 गेंदों में. उनके आने से पहले,भारत ने 11.4 ओवरों में सिर्फ़ 78 रन बनाए थे और 4 विकेट खो दिए थे. सब कुछ हारा हुआ लग रहा था,खासकर दूसरी पारी में ओस के असर को देखते हुए लेकिन हार्दिक के इरादे कुछ और ही थे. गौतम गंभीर के बैटिंग ऑर्डर के फ्लोटिंग प्लान की लगातार धज्जियां उड़ रही है.

कप्तान-उप कप्तान दोनों परेशान 

टी-20 की प्लेइंग ऐलेवन में खुद शुभमन गिल ने एक बार फिर अपने चयन पर सवाल खड़े कर दिए हैं. 2025 एशिया कप में वापसी के बाद से गिल ने अर्धशतक नहीं बनाया है. 13 पारियां, 7 विरोधी टीमें और 8 अलग-अलग मैदान पर नतीजा जस का तस. उन्हें अभिषेक शर्मा के साथी के रूप में शानदार प्रदर्शन करने वाले संजू सैमसन की जगह टीम में शामिल किया गया था. लेकिन फिलहाल उनके चयन को कोई भी कारण जायज नहीं ठहराता. उपकप्तान की तरह ही कप्तान सूर्यकुमार यादव के साथ भी यही हाल है. भारतीय कप्तान का औसत 2024 में 26.81 था और इस साल अब तक उनका औसत मात्र 15.07 है. मैचों की संख्या भी कम नहीं है. 2021 से 2023 तक सूर्यकुमार यादव विश्व के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी थे, लेकिन फिलहाल वे अपने पुराने फॉर्म से बिल्कुल अलग दिख रहे हैं.

बाकी बल्लेबाज लाचार नजर आते है 

2026 टी20 विश्व कप नजदीक होने के कारण, उनका फॉर्म प्रबंधन, चयनकर्ताओं और भारत के खिताब बचाने की संभावनाओं के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है. चलिए अब अन्य बल्लेबाजों की बात करते हैं. तिलक वर्मा धीमी पिचों पर संघर्ष करते हैं और यह कोई नई बात नहीं है लेकिन कटक में उन्होंने नकारात्मक पारी खेली, 32 गेंदों में 26 रन बनाए.शिवम दुबे, जो स्पिन बल्लेबाज के रूप में टीम में आए थे, अब टर्निंग पिचों पर नहीं खेल पा रहे हैं. जब तक स्पिनर बेहद खराब गेंदबाजी नहीं करते, दुबे उन्हें बाउंड्री के पार नहीं भेज सकते. आज उन्हें अंशकालिक गेंदबाज डोनोवन फरेरा ने आउट किया, जिनका मैच से पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में औसत 106 था.

‘पाटा’ पिच के पहलवान है भारतीय बल्लेबाज

अभिषेक शर्मा, जिन्हें शुरुआती दिनों में कई लोग ‘स्लॉगर’ कहते थे, आज जैसी पिचों पर भारत के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक हो सकते हैं ऐसा लगता है कि सभी बल्लेबाज अच्छी पिचों पर ही अच्छा प्रदर्शन करते हैं एशिया कप के दौरान यह बात साफ हो गई, जहां भारत ने जीत तो हासिल की, लेकिन कई मैचों में उसका प्रदर्शन खराब रहा. टी20 विश्व कप के दौरान भी ऐसी ही पिचें देखने को मिल सकती हैं. दरअसल, इतिहास बताता है कि आईसीसी टूर्नामेंटों में अक्सर मुश्किल विकेटें ही मिलती हैं ऐसे में भारतीय बल्लेबाजों को अपना प्रदर्शन सुधारना होगा, वरना खिताब बचाना आसान नहीं हो सकता है.

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