आप तो नहीं खा रहे ये मछली? बढ़ सकता है कैंसर का खतरा, इसे पालना-बेचना भी गैरकानूनी

Last Updated:January 11, 2026, 00:11 IST
Khandwa News: डॉक्टर अनिल पटेल लोकल 18 को बताते हैं कि थाई मांगुर (कैट फिश) मछली में आयरन और लेड जैसी भारी धातुओं की मात्रा सामान्य से कहीं ज्यादा पाई जाती है. लंबे समय तक इसके सेवन से कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है.
खंडवा. आमतौर पर मछली को पौष्टिक आहार माना जाता है और लोग इसे सेहत के लिए फायदेमंद समझकर खाते हैं लेकिन बाजार में बिकने वाली एक ऐसी मछली है, जिसे खाने को लेकर एक्सपर्ट लगातार चेतावनी दे रहे हैं. यह मछली देखने में आम मछलियों जैसी लगती है लेकिन इसके नुकसान बेहद गंभीर बताए जा रहे हैं. इस मछली का नाम थाई मांगुर है. इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए खतरनाक माना गया है और इसका पालन और बिक्री भारत में प्रतिबंधित भी है. इसके बावजूद कई इलाकों में लोग अनजाने में इस मछली का सेवन कर रहे हैं. दरअसल थाई मांगुर एक ऐसी मछली है, जो कम पानी, कीचड़ और नमी वाली मिट्टी में मांद बनाकर बाहरी ऑक्सीजन से भी जीवित रह सकती है. यह मांसाहारी और बेहद आक्रामक प्रजाति की मछली है. जिस तालाब या जलाशय में यह पहुंच जाती है, वहां मौजूद दूसरी देसी मछलियों और जलीय जीव-जंतुओं का अस्तित्व धीरे-धीरे खत्म होने लगता है. इसकी तेजी से बढ़ने की क्षमता और भक्षण की प्रवृत्ति स्थानीय जल-पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है.
लोकल 18 से बातचीत में मध्य प्रदेश के खंडवा निवासी डॉक्टर अनिल पटेल बताते हैं कि थाई मांगुर मछली में आयरन और लेड जैसी भारी धातुओं की मात्रा सामान्य से कहीं अधिक पाई जाती है. लंबे समय तक इसका सेवन करने से कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है. डॉक्टर का कहना है कि यह मछली कीड़े-मकोड़े, दूसरी मछलियां और सड़े-गले जैविक पदार्थ तक खा जाती है. यह भोजन लंबे समय तक इसके शरीर में बना रहता है, जो इंसान के शरीर में जाकर बीमारियों का कारण बन सकता है.
देसी और थाई मांगुर को लेकर भ्रमडॉक्टर पटेल बताते हैं कि लोगों में देसी मांगुर और थाई मांगुर को लेकर अक्सर भ्रम रहता है. थाई मांगुर को कैटफिश भी कहा जाता है. इसका आकार देसी मांगुर से बड़ा होता है, शरीर ज्यादा मोटा और भारी होता है और इसकी त्वचा चिकनी और बेतरतीब दिखाई देती है. सरकारी नियमों की बात करें, तो भारत सरकार ने साल 2000 में थाई मांगुर मछली पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया था. इसके पालन, बिक्री और परिवहन पर रोक है लेकिन इसके बावजूद कुछ जगहों पर यह मछली चोरी-छिपे बेची जा रही है.
थाई मांगुर की कीमत कमथाई मांगुर की कीमत देसी मछलियों की तुलना में काफी कम होती है. जहां देसी मछलियां 250 से 600 रुपये प्रति किलो तक बिकती हैं, वहीं थाई मांगुर 100 से 150 रुपये प्रति किलो में मिल जाती है. सस्ती होने के कारण गरीब परिवार इसे खरीद लेते हैं लेकिन इसके गंभीर स्वास्थ्य नुकसान से अनजान रहते हैं. एक्सपर्ट का साफ कहना है कि लोगों को थाई मांगुर मछली की पहचान कर इससे पूरी तरह दूरी बनानी चाहिए. थोड़ी सी सावधानी न सिर्फ आपकी सेहत बचा सकती है बल्कि पर्यावरण और कानून के उल्लंघन से भी आपको सुरक्षित रख सकती है.
About the AuthorRahul Singh
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
Location :
Khandwa,Madhya Pradesh
First Published :
January 11, 2026, 00:11 IST
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आप तो नहीं खा रहे ये मछली? बढ़ सकता है कैंसर का खतरा, पालना-बेचना भी गैरकानूनी
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



