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तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है! दिव्यांगता को हराकर प्रेम और परिश्रम से राठौड़ दंपति ने रचा खेलों में इतिहास

दिव्यांगता को हराकर प्रेम और परिश्रम से राठौड़ दंपति ने रचा खेलों में इतिहास
Rathore couple sports victory: राठौड़ दंपति की कहानी प्रेम, विश्वास और अदम्य साहस की प्रेरणादायक मिसाल है. शारीरिक दिव्यांगता को कभी भी उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया, बल्कि एक-दूसरे का साथ और निरंतर परिश्रम उनकी सबसे बड़ी ताकत बना. कठिन हालात, सीमित संसाधन और सामाजिक चुनौतियों के बावजूद दोनों ने खेलों में बेहतरीन प्रदर्शन कर ऐतिहासिक जीत हासिल की. उनकी सफलता यह साबित करती है कि जब जीवनसाथी का संबल और मजबूत इच्छाशक्ति साथ हो, तो कोई भी बाधा रास्ता नहीं रोक सकती. यह कहानी युवाओं और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए आत्मविश्वास और उम्मीद का संदेश देती है.
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दिव्यांगता को हराकर प्रेम और परिश्रम से राठौड़ दंपति ने रचा खेलों में इतिहास




