रबी फसलों के लिए ओस का महत्व | Importance of Dew for Rabi Crops Rajasthan News

Last Updated:December 26, 2025, 09:23 IST
Sikar News : दिसंबर के अंत में बदले मौसम ने रबी की फसलों को नया जीवन दिया है. ओस की बूंदें और हवा में बढ़ी नमी गेहूं और चने के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो रही हैं. शेखावाटी में पानी की किल्लत के बीच यह प्राकृतिक सिंचाई किसानों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है. इससे मिट्टी में नमी बनी रहेगी और पौधों का अंकुरण बेहतर होगा. कृषि विभाग को इस बार बंपर उत्पादन की उम्मीद है.

दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह में मौसम के बदलते मिजाज ने शेखावाटी के किसानों के चेहरे पर खुशी ला दी है. खेतों में गिर रही ओस और वातावरण में बढ़ी नमी रबी की फसलों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है. शेखावाटी क्षेत्र, जहाँ सिंचाई के संसाधन सीमित हैं और भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, वहाँ यह प्राकृतिक नमी मिट्टी में जरूरी आर्द्रता (Moisture) बनाए रखने में मदद करेगी. इससे बीजों का अंकुरण बेहतर और मजबूत होगा. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस मौसम का सबसे अधिक लाभ गेहूं और चना की फसलों को मिलेगा, जिससे पैदावार बढ़ने की उम्मीद है.

गेहूं की फसल के लिए वर्तमान मौसम अत्यंत अनुकूल साबित हो रहा है, जिससे पौधों में तेजी से बढ़त और अधिक फुटाव (Tillering) देखने को मिलेगा. किसानों के अनुसार, इस समय गेहूं की फसल अपने अंकुरण और शुरुआती विकास की अवस्था में है, और ऐसे में बढ़ती सर्दी फसल के लिए ‘सोना’ साबित हो रही है. ठंड बढ़ने से न केवल बीजों का जमाव बेहतर होता है, बल्कि फसल का वानस्पतिक विकास भी तेजी से होता है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस बार सीकर कृषि खंड के चारों जिलों में लगभग दस लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की फसलों की बुवाई की गई है, जिससे अच्छी पैदावार की उम्मीद जगी है.

सीकर के अतिरिक्त कृषि निदेशक एसआर कटारिया ने इस प्राकृतिक प्रक्रिया के वैज्ञानिक लाभों पर प्रकाश डाला है. उनके अनुसार, सर्दियों में तापमान गिरने से वातावरण की नमी पौधों की पत्तियों पर ओस की बूंदों के रूप में जमा हो जाती है. जब आसमान साफ होता है, तो सूरज निकलने पर यह पानी धीरे-धीरे वाष्पित होने लगता है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ओस में मौजूद नाइट्रोजन पौधों के लिए प्राकृतिक यूरिया की तरह काम करता है. यदि वातावरण प्रदूषण रहित है और फसलों पर नियमित रूप से ओस गिर रही है, तो किसानों को खेतों में अलग से यूरिया खाद डालने की कम आवश्यकता पड़ती है. यह न केवल फसलों की सेहत के लिए अच्छा है, बल्कि इससे किसानों की लागत में भी कमी आती है.
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एसआर कटारिया ने आगे जानकारी दी कि ओस के माध्यम से मिलने वाला नाइट्रोजन पौधों के लिए अत्यंत गुणकारी होता है. यह न केवल पौधों के शीघ्र विकास में मदद करता है, बल्कि पत्तियों पर गिरने वाले नाइट्रोजन से उनकी संरचनात्मक मजबूती भी बढ़ती है. इसके अतिरिक्त, यह प्रक्रिया जड़ों के माध्यम से पोषक तत्वों के अवशोषण (Absorption) को भी सुगम बनाती है. इसका सीधा सकारात्मक प्रभाव फसल की बढ़वार और अंतिम पैदावार पर पड़ता है. उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि आगामी दिनों में मौसम इसी तरह अनुकूल बना रहा, तो गेहूं, चना और अन्य सभी रबी फसलों की बंपर पैदावार होगी, जिससे क्षेत्र के किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा.

किसानों के अनुसार, रबी फसलों पर ओस गिरने से शुरुआती अवस्था में पौधों की जड़ों का विकास काफी बेहतर होता है. इससे गेहूं के पौधों की लंबाई और बालियों के आकार में वृद्धि होती है, जिसके परिणामस्वरूप पैदावार के दाने अधिक चमकदार और वजनदार बनते हैं. चने की फसल के मामले में, ओस से मिलने वाली नमी फूल और फलियां गिरने की समस्या को कम करने में मददगार साबित होती है. साथ ही, खेतों में ओस के कारण हरियाली बनी रहने से पौधों की बढ़वार संतुलित रहती है और वे स्वस्थ रहते हैं.

ओस के प्रभाव से दानों का आकार और उनकी गुणवत्ता में सुधार होता है, साथ ही फसल में कीटों के प्रकोप में भी आंशिक रूप से कमी आती है. सरसों की फसल में इसके सकारात्मक परिणाम शाखाओं के बेहतर विकास के रूप में दिखाई देते हैं; अगेती सरसों में फूल आने की प्रक्रिया तेज हो जाती है और दानों में तेल की मात्रा भी बढ़ जाती है. इसके अलावा, जौ और अन्य दलहनी फसलों का अंकुरण बेहतर होता है और नमी की उपलब्धता के कारण पौधों में मौसम की मार से होने वाला तनाव कम हो जाता है.
First Published :
December 26, 2025, 09:23 IST
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