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वेनेजुएला संकट में Rodríguez, Cabello और López की अहम भूमिका

नई दिल्‍ली. जिस पैलेस की दीवारों पर कल तक निकोलस मादुरो की हुकूमत की इबारत लिखी थी, आज वहां सन्नाटा है. अमेरिकी डेल्टा फोर्स के हेलीकॉप्टर तो मादुरो को लेकर न्यूयॉर्क के लिए उड़ चुके हैं, लेकिन पीछे छोड़ गए हैं एक ऐसा सियासी पावर-वैक्यूम जिसने वेनेजुएला को गृहयुद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है. सवाल यह नहीं है कि ट्रंप मादुरो को हटाकर संतुष्ट हैं या नहीं, बड़ा सवाल यह है कि क्या मादुरो के बिना वामपंथ का किला सुरक्षित रहेगा? काराकास के सत्ता के गलियारों में अब तीन नाम गूंज रहे हैं, जिनमें सबसे आगे हैं डेल्सी रोड्रिग्ज (Delcy Rodríguez). अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाल ही में जिनसे संपर्क की बात की है. वह कोई और नहीं बल्कि वेनेजुएला की मौजूदा उपराष्ट्रपति और मादुरो की सबसे भरोसेमंद सहयोगी डेल्सी रोड्रिग्ज हैं.

कानून की छात्रा से आयरन लेडी तक का सफरसाल 1969 में जन्मी डेल्सी रोड्रिग्ज का राजनीति से पुराना और गहरा नाता है. उनके पिता जॉर्ज एंटोनियो रोड्रिग्ज, वेनेजुएला के सोशलिस्ट लीग के संस्थापक थे. डेल्सी ने कानून की पढ़ाई काराकास और पेरिस से की है. वह मादुरो सरकार में आयरन लेडी मानी जाती हैं.

·         राजनीतिक उदय: 2013 में मादुरो के राष्ट्रपति बनने के बाद डेल्सी ने संचार और सूचना मंत्री के रूप में शुरुआत की. बाद में वे देश की पहली महिला विदेश मंत्री बनीं.

·         आर्थिक नियंत्रण: 2020 से वे देश की वित्त और अर्थव्यवस्था मंत्री भी हैं. वेनेजुएला के तेल क्षेत्र (Petroleum sector) और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर उनका सीधा नियंत्रण रहा है.

·         दबदबा: डेल्सी का नागरिक प्रशासन और नौकरशाही पर जबरदस्त प्रभाव है, हालांकि सेना में उनकी पहुंच उतनी गहरी नहीं है.

वो 3 चेहरे जो बदल सकते हैं वेनेजुएला की किस्मत

1.      डेल्सी रोड्रिग्ज (सिविलियन चेहरा): वह संवैधानिक रूप से मादुरो की उत्तराधिकारी हैं. उनकी ताकत उनकी कूटनीतिक पकड़ और आर्थिक संस्थानों पर नियंत्रण है.

2.      दियोसदादो काबेलो (सियासी दिग्गज): आंतरिक मामलों के मंत्री काबेलो को वेनेजुएला का दूसरा सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माना जाता है. वह पूर्व सैन्य अधिकारी हैं और खुफिया तंत्र व पैरामिलिट्री बलों पर उनकी गहरी पकड़ है.

3.      व्लादिमीर पाद्रिनो लोपेज (सैन्य रक्षक): रक्षा मंत्री पाद्रिनो पिछले एक दशक से सेना के सर्वेसर्वा हैं. बिना उनकी सहमति के वेनेजुएला में कोई भी सत्ता परिवर्तन संभव नहीं है.

विपक्ष की चुनौतीमादुरो के जाने के बाद सबसे बड़ा सवाल विपक्ष का है. नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मारिया कोरीना मचाडो ने साफ कर दिया है कि उन्हें सिर्फ मादुरो की विदाई नहीं बल्कि पूरा लोकतंत्र चाहिए. उन्होंने चुनाव परिणामों के आधार पर एडमंडो गोंजालेज को असली राष्ट्रपति मानने की मांग दोहराई है. ट्रंप के लिए चुनौती यह होगी कि क्या वे चाविज्मो के इन दिग्गजों के साथ समझौता करेंगे या सत्ता पूरी तरह विपक्ष को सौंपने का दबाव बनाएंगे.

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