अलवर में आधी रात जमीन पर टकराए दो समुदाय, कब्रिस्तान और कब्जे को लेकर तनाव, JCB से बढ़ा विवाद

नितिन शर्मा/अलवर. अलवर जिले के देसूला क्षेत्र से जमीन विवाद को लेकर एक संवेदनशील और तनावपूर्ण स्थिति सामने आई है, जहां एक ही जमीन पर दो अलग-अलग वर्गों ने अपना-अपना दावा पेश करते हुए आमना-सामना कर लिया. मामला इतना बढ़ गया कि देर रात तक क्षेत्र में तनाव बना रहा और पुलिस को मौके पर पहुंचकर स्थिति संभालनी पड़ी. फिलहाल प्रशासन की समझाइश से स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है, लेकिन जमीन को लेकर विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
जानकारी के अनुसार देसूला क्षेत्र में स्थित एक भूखंड को लेकर मेव समुदाय और अनुसूचित जाति समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए. मेव समुदाय का कहना है कि यह जमीन लंबे समय से उनके कब्रिस्तान के रूप में उपयोग में है और उसी के अंतर्गत आती है. वहीं अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों का दावा है कि यह भूमि उनकी है और वे इस पर अपना वैधानिक अधिकार जताते हुए कब्जे की बात कर रहे हैं. दोनों पक्षों के दावों के चलते इलाके में अचानक तनाव की स्थिति बन गई.
बीती रात विवाद उस समय और गहरा गया जब मेव समुदाय के लोगों ने जेसीबी मशीन की सहायता से कथित तौर पर अपने कब्रिस्तान की जमीन के हिस्से पर काम शुरू कर दिया. जैसे ही इस गतिविधि की जानकारी अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों को मिली, वे मौके पर पहुंच गए और इसका विरोध किया. देखते ही देखते दोनों पक्षों के लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हो गए, जिससे हालात बिगड़ने की आशंका पैदा हो गई.
पुलिस की समझाइश से टला बड़ा टकरावजमीन विवाद और बढ़ते तनाव की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची. पुलिस ने तत्काल दोनों पक्षों को शांत कराया और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने के लिए स्थिति पर नियंत्रण पाया. पुलिस अधिकारियों ने दोनों समुदायों से बातचीत कर उन्हें समझाइश दी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की. पुलिस की मौजूदगी के चलते मौके पर बड़ा टकराव टल गया.
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने को कहा गया है. जमीन से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. किसी भी पक्ष को कानून हाथ में न लेने की सख्त हिदायत दी गई है.
विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता भी उतरे मैदान मेंइस विवाद के बीच विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ता भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने अनुसूचित जाति समुदाय के लोगों का पक्ष लिया. विहिप कार्यकर्ताओं ने जमीन को अनुसूचित जाति के लोगों के नाम दर्ज करने की मांग उठाई. उनका कहना था कि यदि जमीन को लेकर कोई विवाद है तो उसका समाधान प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाना चाहिए, न कि जबरन कब्जे या निर्माण कार्य के जरिए.
विहिप की मौजूदगी के बाद मामले ने और अधिक तूल पकड़ लिया, हालांकि पुलिस और प्रशासन की सक्रियता के चलते स्थिति को संभाल लिया गया. फिलहाल इलाके में पुलिस निगरानी बनाए हुए है ताकि दोबारा किसी तरह का तनाव या विवाद न हो.
प्रशासनिक जांच की उठी मांगजमीन को लेकर दोनों समुदायों के दावे अब प्रशासनिक जांच के दायरे में आते नजर आ रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस विवाद का स्थायी समाधान तभी संभव है जब जमीन के रिकॉर्ड, सीमांकन और पुराने दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच की जाए. फिलहाल देसूला क्षेत्र में शांति बनी हुई है, लेकिन जमीन विवाद ने सामाजिक ताने-बाने को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं.



