फिटनेस में हसन ने ChatGPT से 27 किलो वजन कम किया, बिना जिम और ट्रेनर.

आजकल फिटनेस से जुड़ी कहानियां अक्सर जिम की सेल्फी, महंगे प्रोटीन शेक और मोटिवेशनल डायलॉग्स के साथ वायरल होती हैं, जो कुछ हफ्तों बाद भूल भी जाती हैं. लेकिन एक टेक प्रोफेशनल हसन की कहानी थोड़ी अलग है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि उन्होंने सिर्फ तीन महीनों में 27 किलो वजन कम किया, वो भी बिना जिम जाए, बिना पर्सनल ट्रेनर और बिना किसी महंगे फिटनेस ऐप के.
सबसे दिलचस्प बात यह रही कि हसन ने अपनी पूरी फिटनेस जर्नी में सिर्फ ChatGPT के सात प्रॉम्प्ट्स का इस्तेमाल किया. यानी न ट्रेडमिल, न सप्लीमेंट्स, बल्कि एक साफ और सधा हुआ प्लान.
हसन टेक इंडस्ट्री में काम करते हैं, जहां लंबे समय तक बैठकर काम करना आम बात है. उन्होंने साफ कहा कि उनका ट्रांसफॉर्मेशन किसी जादू का नतीजा नहीं था, बल्कि डेली डिसिप्लिन की वजह से संभव हुआ. उनके मुताबिक, ChatGPT ने उन्हें मोटिवेशन नहीं दिया, बल्कि वो चीज दी जिसकी लोगों को सबसे ज्यादा कमी होती है और वह है एक स्ट्रक्चर.
सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हुई. कुछ लोगों ने मजाक भी बनाया, लेकिन बहुत से लोगों को इसमें एक ऐसा तरीका दिखा, जो सच में अपनाया जा सकता है. न जिम फीस, न महंगा खाना, न भारी-भरकम रूटीन-बस एक ऐसा प्लान जो आपकी लाइफस्टाइल के हिसाब से चलता है.
हसन ने बताया कि उन्होंने सबसे पहले ChatGPT से अपने शरीर का एनालिसिस करवाया. उन्होंने अपना वजन, उम्र, हाइट और टारगेट डालकर 12 हफ्तों का ऐसा फिटनेस और डाइट प्लान मांगा, जिसमें जिम की जरूरत न पड़े. इससे उन्होंने शुरुआत में ही अव्यावहारिक लक्ष्यों से बचाव कर लिया.
खाने का चार्ज बनायाइसके बाद उन्होंने खाने पर फोकस किया. ChatGPT ने उनके लिए हाई-प्रोटीन, तय कैलोरी वाला वीकली मील प्लान बनाया, जिसमें आम और सस्ते सामान शामिल थे. इससे रोज-रोज यह सोचने की टेंशन खत्म हो गई कि क्या खाना है.
वर्कआउट के लिए उन्होंने बिना किसी इक्विपमेंट वाला चार दिन का होम एक्सरसाइज प्लान लिया, जिसमें हर सेशन 25-35 मिनट का था. धीरे-धीरे एक्सरसाइज का लेवल बढ़ाया गया, ताकि शरीर पर अचानक जोर न पड़े.
क्रेविंग्स से निपटने के लिए भी ChatGPT काम आया. हसन ने लो-कैलोरी स्नैक्स की लिस्ट बनवाई और ओवरईटिंग रोकने के लिए खुद से बात करने वाले छोटे-छोटे मैसेज भी तैयार किए.
अकाउंटेबिलिटी के लिए ChatGPT रोज उनके खाने, नींद और वर्कआउट का रिव्यू करता था. हफ्ते में एक बार पूरा प्लान देखा जाता और जरूरत के हिसाब से बदलाव किए जाते.
डॉक्टरों का मानना है कि AI मेडिकल सलाह की जगह नहीं ले सकता, और हसन भी इससे सहमत हैं. उनका कहना सिर्फ इतना था कि AI ने काम नहीं किया, बल्कि काम को सही तरीके से मैनेज करना सिखाया.
इस कहानी की सबसे बड़ी सीख यही है कि लोग अक्सर मोटिवेशन की कमी से नहीं, बल्कि सही और टिकाऊ प्लान न होने की वजह से हार मान लेते हैं. हसन की जर्नी बताती है कि कभी-कभी सबसे अच्छा ट्रेनर वही होता है, जो चुपचाप एक चेकलिस्ट पकड़ा दे, और इस बार वह चेकलिस्ट AI ने बनाई थी.



