Animal Care : सर्दी में घट सकता है दूध… ठंड में ऐसे रखें पशुओं को फिट और पाएं मुनाफा डबल!

Last Updated:November 06, 2025, 17:28 IST
सर्दी के मौसम में तापमान, नमी और ठंडी हवाएं पशुओं की सेहत पर सीधा असर डालती हैं. थोड़ी लापरवाही दूध उत्पादन घटा सकती है और बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती है. पशुपालक अगर पशुशाला को सूखा, हवादार रखें और पौष्टिक आहार के साथ सही देखभाल करें, तो ठंड के मौसम में भी भरपूर दूध उत्पादन संभव है.
भीलवाड़ा – सर्दी का मौसम शुरू होते ही तापमान में उतार-चढ़ाव, नमी और ठंडी हवा पशुओं के स्वास्थ्य पर असर डालती है. इससे दूध उत्पादन घट सकता है और बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. पशुपालक यदि थोड़ी सावधानी बरतें और सही पोषण व प्रबंधन करें, तो पशु स्वस्थ रहकर अधिक दूध दे सकते हैं. पशुशाला को सूखा, ऊंचा और हवादार रखना सबसे जरूरी है. दीवारों पर चूने की पुताई और नियमित सफाई से जीवाणु नहीं पनपते.

पशुओं को दिन में थोड़ी देर धूप में रखना लाभदायक होता है. धूप और हवा के उचित प्रवाह से संक्रमण और दुर्गंध कम होती है. पानी पिलाने के लिए गुनगुना पानी ही दें और बर्तनों को नियमित साफ करें. खुले जल स्रोतों का पानी नहीं देना चाहिए. दुधारू पशु को प्रतिदिन करीब 60 से 80 लीटर पानी की आवश्यकता होती है, जिससे दूध उत्पादन प्रभावित न हो.

हरे चारे में पोषक तत्वों की भरपूर मात्रा होती है. बरसीम, ओट, मटर और सरसों का हरा चारा सर्दी में उपयुक्त माना जाता है. चारे को खिलाने से पहले धूप में हल्का सुखा लें ताकि नमी से गैस या आफरा न बने. सूखे चारे के साथ खनिज मिश्रण देना जरूरी है. दूध देने वाले पशु को हर लीटर दूध पर 400 ग्राम दाना देना चाहिए, जिसमें मक्का, चोकर, खली और खनिज शामिल हों.

सर्दी से बचाव के लिए पशुशाला के दरवाजों और खिड़कियों पर टाट या प्लास्टिक शीट लगाएं. पशु पर बोरी, कंबल या टाट डालना चाहिए ताकि ठंडी हवा से बचाव हो सके. नवजात बछड़ों को सूखे और गर्म स्थान पर रखें. पशुओं के टीकाकरण पर विशेष ध्यान दें की गलघोटू, एफएमडी, लंपी स्किन डिजीज और ब्लैक क्वार्टर जैसी बीमारियों से सुरक्षा के लिए समय पर टीके जरूरी हैं.

हर तीन से चार महीने में कीड़े मारने की दवा दें. मक्खी-मच्छरों से बचाव के लिए नीम तेल या हर्बल स्प्रे का उपयोग करें और नीम की पत्तियां जलाकर धुआं करें. गोबर खुले में न छोड़ें और पशुशाला के आस-पास पानी जमा न होने दें. इससे संक्रमण और दुर्गंध फैलने का खतरा कम होता है. पशु के दाने में थोड़ा गुड़ या तेल मिलाना भी फायदेमंद होता है.

गाभिन पशुओं को ठंडी हवा और नमी वाले स्थान से दूर रखें. उन्हें खनिज युक्त आहार दें. दूध की मात्रा घटने, भूख में कमी, नाक या आंख से स्राव, खांसी या बुखार जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत पशु चिकित्सक से सलाह लें. अचानक आहार या वातावरण में बदलाव पाचन बिगाड़ सकता है, इसलिए दूध दुहने का समय और चारे का क्रम नियमित रखें.
First Published :
November 06, 2025, 17:28 IST
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सर्दी में पशुओं की देखभाल बेहद जरूरी, सावधानी से बढ़ेगा दूध उत्पादन



