जालोर में सर्दी के बीच किसान बचा रहे अनार, अपनाया है खास जुगाड़; फलों का रंग और गुणवत्ता दोनों सुरक्षित

Last Updated:January 02, 2026, 06:33 IST
Pomegranate cultivation: जालोर जिले में बढ़ती सर्दी और सुबह की ओस का असर अनार की फसलों पर दिखने लगा है. किसान फलों पर दाग और गुणवत्ता कम होने से बचाने के लिए सफेद नेट बिछा रहे हैं और रात में पौधों को ढक रहे हैं. सुबह धूप लगने पर नेट हटाया जाता है ताकि नमी सूख सके. इन सावधानियों से अनार के दानों का रंग, आकार और चमक बरकरार है और बाजार में बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ गई है.
जालोर जिले में बढ़ती सर्दी और सुबह की ओस का असर अब बागवानी फसलों पर साफ नजर आने लगा है. खासतौर पर अनार की खेती करने वाले किसान इन दिनों अधिक सतर्क दिखाई दे रहे हैं. ठंडी हवाओं और लगातार पड़ रही ओस से अनार के फलों पर दाग पड़ने, छिलके की चमक कम होने और गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है. इसी को ध्यान में रखते हुए किसान फसलों की नियमित निगरानी कर रहे हैं. कई किसान दवाओं का छिड़काव और अन्य सुरक्षात्मक उपाय अपनाकर अनार की फसल को नुकसान से बचाने की कोशिश कर रहे हैं

अनार उत्पादक किसानों ने फसलों को सर्दी और ओस से बचाने के लिए बागों में सफेद रंग की नेट बिछाना शुरू कर दिया है. यह नेट फलों और पौधों पर सीधे ओस गिरने से रोकती है, जिससे अत्यधिक नमी का प्रभाव कम हो जाता है. खासकर सुबह के समय जब ओस अधिक होती है, तब यह व्यवस्था अनार के फलों को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभा रही है. किसानों का कहना है कि इस तकनीक से फलों का प्राकृतिक रंग और चमक बनी रहती है. साथ ही गुणवत्ता में सुधार होने से बाजार में बेहतर दाम मिलने की उम्मीद भी बढ़ गई है.

जालोर जिले में अनार की फसल को सर्दी से बचाने के लिए किसान अतिरिक्त सावधानियां बरत रहे हैं. कई किसान रात के समय अनार के पौधों और फलों को सुरक्षित तरीके से ढक रहे हैं. इससे ठंडी हवाओं का सीधा असर फलों पर नहीं पड़ता और बागों में तापमान संतुलित बना रहता है. खासकर खुले खेतों में, जहां सर्दी का असर अधिक होता है, यह उपाय बेहद कारगर साबित हो रहा है. किसानों का कहना है कि इससे फलों पर दाग पड़ने का खतरा कम होता है और गुणवत्ता भी बनी रहती है. इन प्रयासों से अनार की पैदावार सुरक्षित रखने में मदद मिल रही है.
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किसानों का कहना है कि सर्दी के इस दौर में थोड़ी सी लापरवाही पूरी अनार की फसल को नुकसान पहुंचा सकती है. इसी वजह से वे सुबह जल्दी खेतों में पहुंचकर फलों पर बिछाई गई सफेद नेट हटा देते हैं, ताकि दिन में धूप सीधे अनार पर पड़े और जमा नमी सूख सके. शाम होते ही दोबारा नेट ढक दी जाती है, जिससे रात की ठंड और ओस से फसल सुरक्षित रहती है. किसानों के अनुसार इस नियमित प्रक्रिया से फलों की गुणवत्ता बनी रहती है और रंग व चमक पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता. इससे अनार को बाजार में बेहतर दाम मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है.

इन प्रयासों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है. जिन खेतों में समय पर सुरक्षा और सावधानी बरती गई, वहां अनार की फसल सुरक्षित बनी हुई है और फलों की गुणवत्ता पर कोई खास असर नहीं पड़ा है. अनार के दानों का रंग, आकार और चमक पूरी तरह बरकरार है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद बढ़ गई है. स्थानीय बाजारों में भी ऐसी उच्च गुणवत्ता वाली फसल की मांग बनी हुई है. जालोर के किसान अपने अनुभव, मेहनत और नियमित निगरानी के चलते सर्दी के मौसम में भी अनार की फसल को सफलतापूर्वक बचाने में कामयाब हो रहे हैं.
First Published :
January 02, 2026, 06:33 IST
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जालोर में सर्दी के बीच किसान बचा रहे अनार, यह खास जुगाड़ आ रहा है काम



