कुख्यात अपराधी शहजाद की बेटी हिरण्या ने थामी राइफल, नेशनल शूटिंग में राजस्थान के लिए खेलेंगी

Last Updated:December 03, 2025, 13:27 IST
Success Story : नागौर की हिरण्या ने अपराधों से घिरे पारिवारिक माहौल को पीछे छोड़ अपनी पहचान खुद बनाई है. कुख्यात अपराधी रहे पिता के इतिहास के बावजूद, मात्र 13 साल की उम्र में राइफल उठाकर उन्होंने सपनों को निशाना बनाया. अब 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग में नेशनल चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर, वह पिता की उम्मीद और परिवार की नई रोशनी बन चुकी हैं.
यह कहानी सामाजिक परिस्थितियों को मात देकर आगे बढ़ने वाली खिलाड़ी हिरण्या की है. नागौर जिले के डेगाना क्षेत्र के कुख्यात अपराधी रह चुके शहजाद खान के परिवार में जन्मी हिरण्या ने अपने घर के माहौल से बिल्कुल उलट मेहनत से अपना नाम बनाने का जीवन चुना. पिता के आपराधिक इतिहास और कठिन हालातों के बावजूद हिरण्या ने बचपन से ही सकारात्मक दिशा में कदम बढ़ाए, जिससे परिवार को नई उम्मीद मिली.

शहजाद खान पर हत्या, लूट, डकैती, फिरौती और आर्म्स एक्ट सहित लगभग 14 गंभीर मुकदमे दर्ज रहे हैं. उन्होंने अपने जीवन के करीब 18 वर्ष जेल में बिताए. जेल में रहते हुए वे अपने बेटे वीर को वेटलिफ्टिंग का खिलाड़ी बनाना चाहते थे, लेकिन एक सड़क दुर्घटना में वीर की मौत ने पूरे परिवार को हिला दिया. इस हादसे ने शहजाद को गहरे सदमे में डाल दिया, जिससे उबरना उनके लिए बेहद मुश्किल था.

अपने पिता के टूटते हौसले को देखकर मात्र 13 साल की हिरण्या ने फैसला लिया कि वह पिता का सपना पूरा करेगी. हालांकि पिता चाहते थे कि बेटा खिलाड़ी बने, लेकिन बेटी ने इस जिम्मेदारी को अपनाते हुए राइफल उठाई. वह उस समय नारायणा स्कूल में 7वीं कक्षा की छात्रा थी जब उसने एयर राइफल शूटिंग की शुरुआत की. कम उम्र में लिया गया यह निर्णय उसके जीवन का महत्वपूर्ण मोड़ बन गया.
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हिरण्या बचपन से ही छर्रे वाली बंदूक से गुब्बारे फोड़ने में रुचि रखती थी. परिवार आर्मी बैकग्राउंड का होने के कारण घर में पारंपरिक रूप से लाइसेंसी हथियार मौजूद थे, जिससे वह हथियारों से बचपन से परिचित थी. इसी रुचि ने आगे चलकर उसे शूटिंग की ओर आकर्षित किया. परिवार ने भी उसके इस निर्णय का सम्मान करते हुए पूरी तरह से सहयोग दिया.

शूटिंग में कदम रखने के बाद हिरण्या ने अजमेर स्थित करणी शूटिंग अकादमी में प्रशिक्षण शुरू किया. उसके कोच मनोज शर्मा बताते हैं कि हिरण्या मेहनती लड़की है, जो टास्क उसे दिया जाता था वह उसे पूरा करके ही दम लेती थी. वह छुट्टियों में भी एकेडमी पहुंचकर तैयारी करना नहीं भूलती. उसकी इसी लगन और मेहनत ने केवल छह महीनों में उसे तीन बड़े टूर्नामेंट में क्वालीफाई करवाया, जो उसकी प्रतिभा का प्रमाण है.

हिरण्या ने पहले जिला स्तर पर अपनी पहचान बनाई, फिर राज्य स्तर की प्रतियोगिताओं में बेहतरीन प्रदर्शन किया. इसके बाद अब उसने 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग में नेशनल चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई कर लिया है. अगले महीने भोपाल में होने वाले नेशनल इवेंट में वह राजस्थान का प्रतिनिधित्व करेगी. हिरण्या का सपना है कि एक दिन वह ओलंपिक में भारत के लिए मेडल जीतकर देश का नाम रोशन करे.

दूसरी ओर, हिरण्या के पिता की शहजाद खान की जिंदगी भी उतार-चढ़ाव से भरी रही. काम न मिलने पर 2006 में विदेश जाने की कोशिश के दौरान वह ठगी का शिकार हो गया. लौटकर उसने गुस्से में एजेंट के साथ मारपीट की और धीरे-धीरे अपराध की दुनिया में फंसता चला गया. हालांकि 18 साल की सजा पूरी कर और अच्छे व्यवहार के कारण वह आज परिवार के साथ रह रहा है. बेटी की सफलता ने उसकी जिंदगी को नई दिशा दी है, और हिरण्या अब परिवार के भविष्य की नई आशा बन चुकी है.
First Published :
December 03, 2025, 13:27 IST
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अपराधी पिता की बेटी हिरण्या ने राइफल थामी, अब नेशनल में साधेंगी निशाना



