उदयपुर में ब्रज की रसमय परंपरा बम रसिया, जहां एक साथ गूंजते हैं श्रीकृष्ण भक्ति और लोकभाव, लोक कलाकार देतें है प्रस्तुति!

Last Updated:December 14, 2025, 17:55 IST
ब्रज क्षेत्र की पारंपरिक लोकगायन शैली बम रसिया भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, रासलीला और लोकजीवन से जुड़ी एक अनूठी सांस्कृतिक विरासत है. भाव, अभिनय और संगीत के संगम से सजी यह लोककला न केवल भक्ति का माध्यम है, बल्कि ब्रजभूमि की रसमय परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है. बदलते समय के बावजूद बम रसिया कलाकार इस अमूल्य परंपरा को सहेजने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं.
उदयपुर. राजस्थान अपनी ऐतिहासिक धरोहरों और भव्य किलों के साथ-साथ समृद्ध लोककलाओं के लिए भी देश-विदेश में पहचान रखता है. इन्हीं लोककलाओं में एक खास स्थान है ब्रज क्षेत्र की पारंपरिक गायन शैली ‘बम रसिया’, जो भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और रासलीलाओं से जुड़ी हुई है. हाल ही में उदयपुर पहुंचे ब्रज क्षेत्र के बम रसिया कलाकारों ने इस अनूठी कला के महत्व और इसकी सांस्कृतिक विरासत पर विस्तार से जानकारी दी.
बम रसिया गायन पूरी तरह से भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित होता है. इस गायन शैली में श्रीकृष्ण के रसिया, उनकी बाल लीलाएं, रासलीला और राधा-कृष्ण के प्रेम प्रसंगों का भावपूर्ण वर्णन किया जाता है. कलाकारों के अनुसार, यह गायन केवल संगीत नहीं, बल्कि भक्ति, भाव और अभिनय का संगम है, जिसमें श्रोता खुद को ब्रजभूमि की रसमय परंपराओं से जुड़ा हुआ महसूस करता है.
बम रसिया गायन से पूरा माहौल हो उठता है भक्तिमय
इस लोकगायन की खास बात यह है कि इसमें ब्रज क्षेत्र में होली के दौरान देवर-भाभी के बीच खेले जाने वाले पारंपरिक हास-परिहास और लोकजीवन से जुड़े प्रसंगों को भी गीतों के माध्यम से प्रस्तुत किया जाता है. बम रसिया के बोल जहां एक ओर भक्ति से ओत-प्रोत होते हैं, वहीं दूसरी ओर उनमें लोकजीवन की सहजता और मिठास भी दिखाई देती है. प्रस्तुतियों के दौरान पुरुष और महिलाएं, दोनों ही भगवान श्रीकृष्ण और राधा के स्वरूप में सज-संवरकर मंच पर उतरते हैं.
पारंपरिक वेशभूषा, लोकवाद्य और भावपूर्ण नृत्य के साथ जब बम रसिया गायन होता है, तो पूरा माहौल भक्तिमय हो उठता है. दर्शक भी खुद को थिरकने से नहीं रोक पाते. हालांकि आधुनिकता और बदलते समय के साथ यह लोककला धीरे-धीरे कम होती जा रही है. नई पीढ़ी का इस ओर रुझान घटने से बम रसिया कलाकारों की संख्या भी सीमित होती जा रही है. इसके बावजूद लोक कलाकार इस परंपरा को जीवित रखने के लिए लगातार प्रयासरत हैं और देश के विभिन्न हिस्सों में जाकर अपनी प्रस्तुतियां दे रहे हैं.
उदयपुर सहित अन्य पर्यटन स्थलों पर जब ये कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं, तो स्थानीय लोग और पर्यटक इसे खूब पसंद करते हैं. बम रसिया न केवल राजस्थान और ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान है, बल्कि यह हमारी लोकपरंपराओं को सहेजने की एक जीवंत मिसाल भी है.
About the AuthorMonali Paul
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Location :
Udaipur,Rajasthan
First Published :
December 14, 2025, 17:55 IST
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जानिए उदयपुर में ब्रज क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत और श्रीकृष्ण भक्ति



