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सर्दियों में हरे नरम पत्तों से बनती है अफीम की पारंपरिक सब्जी, गांवों में आज भी कायम है यह अनोखा स्वाद, नोट करें रेसिपी

Last Updated:December 16, 2025, 06:11 IST

सर्दियों के मौसम में ग्रामीण इलाकों में हरे नरम पत्तों की अफीम की सब्जी एक पारंपरिक स्वाद मानी जाती है. इसमें अफीम के पौधे के कोमल पत्तों का उपयोग किया जाता है, जो जल्दी पक जाते हैं और हल्के स्वाद वाली होती है. देसी मसालों, घी या सरसों के तेल में बनी यह सब्जी पहले खेतों में काम करने वालों के लिए ऊर्जा का स्रोत मानी जाती थी. मूंग या चने की दाल मिलाने से यह और पौष्टिक हो जाती है.

उदयपुर. सर्दियों के मौसम में हरी सब्जियों की भरमार रहती है और इन्हीं में एक खास पारंपरिक सब्जी है हरे नरम पत्तों की अफीम की सब्जी. ग्रामीण इलाकों में इसे सर्दियों का मौसमी स्वाद माना जाता है, जिसे बड़े चाव से बनाया और खाया जाता है. खास बात यह है कि इसमें पौधे के हरे और कोमल पत्तों का उपयोग किया जाता है, जिससे इसका स्वाद हल्का और सब्जी जल्दी पकने वाली होती है. स्थानीय जानकारों के अनुसार, अफीम के पौधे के हरे नरम पत्ते सर्दियों की शुरुआत में ही तोड़े जाते हैं.

इन पत्तों को चुनने के बाद अच्छी तरह साफ किया जाता है ताकि मिट्टी या कड़वाहट न रहे.इसके बाद इन्हें बारीक काटकर या हल्का मसलकर सब्जी में डाला जाता है.पुराने समय में यह सब्जी खेतों में काम करने वाले लोगों के लिए ऊर्जा देने वाली मानी जाती थी. सब्जी बनाने की विधि काफी साधारण होती है. घर कढ़ाई में आराम से बना सकते हैं.

घर पर देसी मसालों के मिश्रण से बना सकते हैं सब्जी

इस सब्जी को बनाके लिए सबसे पहले कड़ाही में देसी घी या सरसों का तेल गर्म किया जाता है. इसमें जीरा और हींग का तड़का लगाया जाता है. फिर बारीक कटा प्याज डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनते हैं. इसके बाद अदरक-लहसुन का पेस्ट और हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च जैसे मसाले डालकर खुशबू आने तक भून लिया जाता है. अब कटे हुए हरे नरम पत्ते कड़ाही में डाल दिए जाते हैं और धीमी आंच पर ढककर पकाया जाता है.पत्ते जल्दी गल जाते हैं, इसलिए ज्यादा पानी की जरूरत नहीं पड़ती.

इसमें मूंग या चने की दाल भी कर सकते हैं मिक्स

कुछ जगहों पर इसमें मूंग दाल या चने की दाल भी मिलाई जाती है, जिससे सब्जी ज्यादा पौष्टिक हो जाती है. पकने के बाद इसमें नमक और थोड़ा सा गरम मसाला डाला जाता है. यह सब्जी खासतौर पर बाजरे या मक्के की रोटी के साथ परोसी जाती है, जो सर्दियों में स्वाद और सेहत दोनों का मेल मानी जाती है. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अफीम से जुड़े पौधों का उपयोग कानूनी और स्वास्थ्य नियमों के अंतर्गत आता है. इसलिए इसे केवल पारंपरिक जानकारी और स्थानीय नियमों के दायरे में ही देखा जाना चाहिए हरे नरम पत्तों की अफीम की सब्जी सर्दियों में बनने वाला एक पुराना देसी स्वाद है, जो आज भी कुछ इलाकों में परंपरा के रूप में जीवित है.

About the Authordeep ranjan

दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें

Location :

Udaipur,Rajasthan

First Published :

December 16, 2025, 06:11 IST

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