Rajasthan

किराए के कमरे से हजारों अफसरों तक! जानें डॉ. मनोज की संघर्ष से सफलता तक की चौंकाने वाली कहानी

कोटा. कहते हैं कि कठिन परिस्थितियां ही व्यक्ति के भीतर छिपी असली ताकत को बाहर लाती हैं. ऐसी ही एक सफलता और संघर्ष की प्रेरक कहानी है बूंदी जिले के इंदरगढ़ निवासी डॉ. मनोज जैन की, जिन्होंने सीमित संसाधनों, कमजोर आर्थिक स्थिति और कठिन हालातों के बावजूद शिक्षा को अपना संकल्प बनाया और आज हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को दिशा देने वाले मार्गदर्शक बने हैं.

जुलाई 1995 में डॉ. मनोज जैन उच्च शिक्षा प्राप्त करने के उद्देश्य से इंदरगढ़ से कोटा आए. उन्होंने गवर्नमेंट कॉलेज कला, कोटा में प्रवेश लेकर वर्ष 1998 तक बीए की पढ़ाई पूरी की. उस दौर में संसाधनों की भारी कमी थी, लेकिन शिक्षा के प्रति उनकी लगन और आत्मविश्वास ने उन्हें कभी डगमगाने नहीं दिया. पढ़ाई के साथ जीवन की चुनौतियों ने उन्हें और अधिक मजबूत बनाया और आगे बढ़ने का हौसला दिया.

शिक्षक बनने का सपना और पीएचडी तक का सफरबीए के बाद उन्होंने शिक्षक बनने का सपना देखा और वर्ष 2000 में बीएड कर इस सपने को साकार किया. शिक्षा के क्षेत्र में और अधिक गहराई से योगदान देने की इच्छा ने उन्हें आगे भी अध्ययन के लिए प्रेरित किया. लंबे शोध, अनुशासन और निरंतर परिश्रम के बाद वर्ष 2013 में उन्होंने कोटा विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की. यह उपलब्धि उनके धैर्य, संघर्ष और शिक्षा के प्रति समर्पण का प्रमाण बनी.

किराए के कमरे से कोचिंग संस्थान तकडॉ. मनोज जैन का जीवन केवल पढ़ाई तक सीमित नहीं रहा. वर्ष 2002 से उन्होंने प्राइवेट स्कूल में अध्यापन कार्य शुरू किया. किराए के मकान में रहते हुए उन्होंने न सिर्फ अपनी पढ़ाई पूरी की, बल्कि दूसरों को शिक्षित करने का संकल्प भी लिया. इसी दौरान उन्होंने महसूस किया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की सही और व्यावहारिक तैयारी के लिए विद्यार्थियों को ईमानदार मार्गदर्शन की आवश्यकता है. बेहद साधारण शुरुआत करते हुए उन्होंने किराए के मकान में ही 10 से 12 विद्यार्थियों को पढ़ाना शुरू किया. उनका लक्ष्य स्पष्ट था, आरपीएससी शिक्षक भर्ती, राजस्थान पुलिस और अन्य राजकीय सेवाओं की परीक्षाओं के लिए विद्यार्थियों को सही दिशा देना. मेहनत, अनुशासन और सरल शिक्षण पद्धति से विद्यार्थियों का भरोसा धीरे-धीरे बढ़ता गया.

काव्य क्लासेज की स्थापना और पहचानवर्ष 2007 में कोटा के केशवपुरा क्षेत्र में उन्होंने अपनी कोचिंग संस्था काव्य क्लासेज की स्थापना की. यह एक छोटा सा कदम था, जो आगे चलकर शिक्षा के क्षेत्र में एक मजबूत पहचान बन गया. काव्य क्लासेज में पढ़ने के लिए न केवल कोटा, बल्कि पूरे हाड़ौती संभाग से विद्यार्थी आने लगे. आज इस संस्थान से पढ़े विद्यार्थी आरपीएससी शिक्षक भर्ती की प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी में चयनित होकर राजस्थान के विभिन्न जिलों में सेवाएं दे रहे हैं. कई विद्यार्थी आरएएस अधिकारी बनकर प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं. इसके अलावा एलडीसी, राजस्थान पुलिस कांस्टेबल और उप निरीक्षक पदों पर भी बड़ी संख्या में उनके विद्यार्थी कार्यरत हैं.

शिक्षा के साथ सामाजिक सरोकारडॉ. मनोज जैन शिक्षा के साथ-साथ सामाजिक दायित्वों से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. वे आध्यात्मिक गतिविधियों में सक्रिय रहते हुए हर वर्ष जागरण का आयोजन करते हैं. इसके साथ ही सरकारी विद्यालयों में ड्रेस वितरण, भ्रष्टाचार के विरुद्ध जागरूकता कार्यक्रम और साइबर क्राइम रोकथाम को लेकर लगातार अभियान चलाते रहे हैं. उनका मानना है कि समाज का वास्तविक विकास तभी संभव है, जब शिक्षा के साथ नैतिक मूल्यों को भी मजबूत किया जाए.

आज कोटा के दादाबाड़ी क्षेत्र में संचालित काव्य क्लासेज में हजारों विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं. एक साधारण परिवार से आने वाले, मंडी में आढ़त का कार्य करने वाले पिता के पुत्र डॉ. मनोज जैन ने अपने दम पर यह मुकाम हासिल किया है. उन्होंने न केवल अपने जीवन को संवारा, बल्कि अपनी शिक्षा, व्यवहार और मार्गदर्शन से हजारों युवाओं का भविष्य भी गढ़ा है. उनकी यह यात्रा उन सभी युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं.

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